चंबा, सुरेश ठाकुर। पिछड़े जिलों में शुमार चंबा के लोगों की सोच विकसित है, इसी सोच ने पहाड़ के उत्‍पाद को समुद्र पार तक पहुंचा दिया। आज जिला के उत्‍पादों की जितनी मांग है उतनी आपूर्ति नहीं हो पा रही है। पांगी हिल्स रूरल मार्ट ने चंबा जिला के जैविक उत्‍पादों को ऑनलाइन लाकर इन्‍हें पहचान दिलाई। राष्‍ट्रीय व अंतरराष्‍ट्रीय बाजार में इन्‍हें अच्‍छा दाम भी मिल रहा है। किसान भी आर्थिक रूप से सुदृढ़ हो रहे हैं। पांगी हिल्‍स रूरल मार्ट संस्‍था ने 750 महिलाओं को इससे जोड़कर रोजगार प्रदान किया है। पहले किसानों को जैविक खेती की ओर प्रोत्‍साहित किया। जैविक उत्‍पादों को बाजार में अच्‍छी कीमत मिल रही है, इससे किसानों के चेहरे भी खिल उठे हैं।

पांगी हिल्‍स रूरल मार्ट वेबसाइट पर ऑर्डर बुक होने के बाद उत्पाद को पैक कर देश-विदेश में पहुंचाया जा रहा है। विशेषज्ञों के पैनल की ओर से उत्पादों का चयन करने के बाद मूल्य तय कर उन्हें ऑनलाइन बेचा जा रहा है। ऑनलाइन कारोबार होने के कारण चंबा के उत्पादों की डिमांड लगातार बढ़ रही है। ये उत्पाद रूस, कजाकिस्तान व सऊदी अरब के लोगों की पहली पसंद बन चुके हैं। विदेशी लोगों के साथ देश के लोग भी जैविक उत्पादों की जमकर खरीदारी कर रहे हैं। लोग ऑनलाइन बुकिंग करवा रहे हैं। हर माह पांगी हिल्स रूरल माट में ऑनलाइन 50 से 60 हजार ऑर्डर बुक हो रहे हैं।

नाबार्ड कर रहा सहयोग

हर्बल चाय को अंतरराष्ट्रीय मंच पर लाने के लिए राष्ट्रीय कृषि एवं ग्रामीण विकास बैंक (नाबार्ड) सहयोग कर रहा है। बैंक द्वारा महिलाओं को पैकिंग व ग्रेडिंग के बारे में प्रशिक्षण भी दिलाया गया है। इसके अलावा ऋण भी दिया जा रहा है।

इन उत्‍पादों की है भारी मांग

चंबा जिला की कबायली पांगी घाटी में पैदा होने वाले शहद, हेजलनट, अखरोट, राजमाह, माह, मक्की, शिलाजीत, केसर, हर्बल चाय, रतनजोत तेल, हवन सामग्री, चंबा जरीस, चंबा चप्पल, चंबा रुमाल तथा हस्तशिल्प निर्मित पांगी शाल व टोपी सहित 42 उत्पादों की बिक्री होती है। पांगी हिल्स रूरल मार्ट ऑनलाइन के साथ चंबा में भी इन उत्‍पादों की बिक्री करता है। यह ऐसा स्टार्टअप है, जिसमें उत्पादों का एकत्रीकरण, ग्रेडिंग, पैकेजिंग, प्रोडक्शन से लेकर सेल तक सारा काम चंबा की महिलाएं संभालती हैं।

चार हजार किसान जैविक खेती के लिए किए प्रोत्‍साहित

पांगी में सामाजिक उद्यमशीलता का अनूठा उदाहरण देखा जा सकता है। चंबा जिला के 75 स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी 1100 महिलाएं और 4000 किसान जैविक खेती कर रहे हैं। इन किसानों को संस्‍था ने ही प्रोत्‍साहित किया। अपने स्थानीय संसाधनों के दम पर क्षेत्र के आर्थिक विकास की कहानी लिख रही पांगी घाटी की महिलाओं ने यहां के उत्पादों की ग्रेडिंग, पैकेजिंग से वैल्यू एडिशन कर उन्हें ग्‍लोबल मार्केट तक पहुंचाने की मिसाल कायम की है। पांगी हिल्स रूरल मार्ट’ गुणवत्‍तापरक उत्पादों के लिए भरोसे का ब्रांड बन गया है।

ऐसे पड़ी कारोबार की नींव

पांगी घाटी से संबंध रखने वाले डॉ. हरेश शर्मा ने सोशल वर्क में पीएचडी करने के बाद वर्ष 2012 में पांगी की महिलाओं व सीमांत किसानों के सशक्‍तीकरण के लिए सेवा’ संस्था की शुरुआत की। स्वयं सहायता समूहों और किसान उत्पादक संघों का गठन कर घाटी के कृषकों व महिलाओं को कौशल विकास का प्रशिक्षण दिया। घाटी के उत्पादकों को बैंक और बाजार से जोड़ा गया। उन्होंने घाटी में सामाजिक आर्थिक बदलाव की जमीन तैयार की। वर्ष 2019 में दिल्ली में महिलाओं को स्वरोजगार देने व उत्पादों को सही दाम प्रदान करने को लेकर अंतरराष्ट्रीय संस्था सीएमएस द्वारा डॉ. हरेश शर्मा को राष्ट्रीय ग्रीन एंबेसडर पुरस्कार से भी नवाजा गया है। यह संस्था लोगों को स्वरोजगार उपलब्ध करने पर कार्य करती है। डॉक्‍टर हरेश शर्मा ने पांगी हिल्स रूरल मार्ट वेबसाइट बनाकर चंबा के उत्‍पादों को पहचान दिलाई। संस्‍था से आज हजारों लोग लाभांवित हो रहे हैं।

और महिलाओं को जोड़ा जाएगा : डॉ. हरेश

चंबा जिला की महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ना व चंबा के उत्पादों को अंतरराष्ट्रीय मंच प्रदान करवाना ही संस्‍था का मुख्य उदेश्य है। अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उत्‍पादों को ग्रेडिंग कर निर्यात किया जाता है। चंबा की 750 महिलाओं को रोजगार दिया जा रहा है। जिला की और भी महिलाओं को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए पूरा प्रयास किया जा रहा है। -डॉ. हरेश शर्मा, अध्यक्ष, पांगी हिल्स रूरल मार्ट।

Edited By: Rajesh Sharma