मुनीष गारिया, धर्मशाला

हिमाचल प्रदेश स्कूल शिक्षा बोर्ड में अब तीन भाषाओं में काम होगा। बोर्ड ने अपने कामकाज में हिदी और अंग्रेजी के अलावा संस्कृत भाषा को भी शामिल करने का निर्णय लिया है। शुक्रवार से संस्कृत में कामकाज की शुरुआत हो जाएगी। हिमाचल प्रदेश सरकार ने संस्कृत को राज्य भाषा बनाने की मंजूरी दी है। सरकार के फैसले का स्वागत करते हुए बोर्ड ने भी इसे स्वीकार कर लिया है।

बोर्ड शुक्रवार को एक साल की उपलब्धियों को अपडेट करेगा। बोर्ड की ओर से जारी होनी वाली उपलब्धि स्मारिका का प्रेस नोट हिदी, अंग्रेजी व संस्कृत में भी होगा। इस सत्र से कार्यालय के अन्य कामों में तो संस्कृत का प्रयोग नहीं होगा लेकिन प्रयास किया जा रहे है कि अगले साल से कार्यालय के काम भी संस्कृत में ही होंगे। कार्यालय कामकाज में संस्कृत के शामिल होने से विद्यार्थियों और अन्य अभ्यर्थियों को आवेदन फॉर्म भरने में हिदी और संस्कृत के अलावा संस्कृत में भी फॉर्म भरने का ऑप्शन होगा।

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जमा दो के भूगोल विषय के पेपर में क्वारंटाइन सेंटर का पेंच

शिक्षा बोर्ड ने जमा दो के भूगोल विषय का पेपर करवाने का निर्णय तो लिया है, लेकिन परीक्षा संचालन में कोविड-19 क्वारंटाइन सेंटरों का पेंच फंस गया है। प्रदेश और मुख्य रूप से जिला हमीरपुर में स्कूलों को ही क्वारंटाइन सेंटर बनाया गया है। ऐसे में चार हजार बच्चों का भूगोल विषय का पेपर करवाना मुश्किल हो गया है। इस बाबत बोर्ड प्रशासन ने सरकार और शिक्षा मंत्री से बात की है। कहा है कि 31 मई तक जरूरत अनुसार सेंटर बनाए गए स्कूलों को खाली करवा दिया जाए। भूगोल विषय की परीक्षा के बाद ही जमा दो का परिणाम आ पाएगा। दसवीं का परिणाम जून से दूसरे सप्ताह आएगा।

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बोर्ड में संस्कृत भाषा के प्रयोग की शुरुआत शुक्रवार से की जाएगी। शुरुआत में बोर्ड की उपलब्धियों की स्मारिका और प्रेस नोट हिदी, अंग्रेजी और संस्कृत तीनों भाषा में होंगे। कार्यालय कामकाज में संस्कृत का प्रयोग करने के भी प्रयास किए जाएंगे।

-डॉ. सुरेश कुमार सोनी, अध्यक्ष, स्कूल शिक्षा बोर्ड

Posted By: Jagran

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