संवाद सहयोगी, धर्मशाला : फुटबॉल ऐसा खेल है, जिसमें युवा तभी पारंगत हो सकते हैं, जब उन्हें सुविधाएं मिले और सात वर्ष की आयु में ही उनका बेसिक प्रशिक्षण शुरू हो जाए। हिमाचल में फुटबॉल खेल के लिए आधारभूत ढांचे के साथ कोचों की भी कमी है। हालांकि यहां के युवाओं में प्रतिभा है, लेकिन उसे निखारने के लिए बुनियादी सुविधाओं के साथ कोचों का समय पर मार्गदर्शन व छोटी आयु से ही प्रशिक्षण दिलाना होगा।

राजकीय स्नातकोत्तर महाविद्यालय धर्मशाला में इंडिया यूथ स्कोरर एसोसिएशन व अर्सनल कम्युनिटी के सहयोग से अंडर-16 के लिए चल रहे कैंप के दौरान दैनिक जागरण से विशेष बातचीत में इंडिया यूथ स्कोरर एसोसिएशन (आइवाइएसए) के ट्रस्टी अरूप दास ने यह बात कही। उनके मुताबिक आइवाइएसए का उद्देश्य ग्रामीण प्रतिभाओं को उजागर कर उन्हें मंच प्रदान करना है। इसके लिए हिमाचल व पंजाब में समय-समय पर ऐसे कैंपों का आयोजन किया जाएगा। आइवाइएसए भविष्य में धर्मशाला में फुटबॉल अकादमी खोलेगा, ताकि हिमाचल के युवाओं को इसका लाभ मिल सके। उनके मुताबिक धर्मशाला का मौसम हर खेल के लिए बेहतर है और यहां वर्ष भर खेल गतिविधियां हो सकती हैं। कैंप के दौरान यह स्पष्ट हुआ है कि यहां के बच्चे बेसिक तकनीकी में अभी बहुत पीछे हैं। इनकी बेसिक तकनीक में सुधार को लेकर नियमित प्रशिक्षण के साथ कोच का भी मार्गदर्शन आवश्यक है। आइवाइएसए से प्रशिक्षण प्राप्त दिल्ली के मोहित घिनोट व नरेंद्र घिनोट का अंडर-17 विश्वकप के लिए भारतीय टीम में चयन हुआ है। भविष्य में हिमाचल से युवाओं का चयन हो सकता है।

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कैंप में 28 बच्चों ने लिया प्रशिक्षण

धर्मशाला कॉलेज में दो दिवसीय कैंप में धर्मशाला के 10, जबकि कांगड़ा व शाहपुर में नौ-नौ बच्चों ने भाग लिया। इस कैंप में अर्सनल कम्युनिटी के लीक्वी सिनामो एवं लोकी परसनज व यूएसए के स्कोट एवं जूआइना अलीन ने प्रशिक्षण दिया।

Posted By: Jagran

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