तीन दिन बाद भी नलों से बूंद-बूंद टपकता पानी
चंबा जिला के दुर्गम इलाके अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं।

संवाद सहयोगी, चंबा : चंबा जिला के दुर्गम इलाके अब भी मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं। शहर से करीब 28 किलोमीटर दूर कैला पंचायत के करीब 25 गांवों के लोगों के गले गर्मी के दस्तक देते ही सूखने लगे हैं। सर्दी में भी इसी तरह के हालात का ग्रामीण सामना करते हैं। आलम यह है कि इन गांवों को तीसरे दिन पेयजल आपूर्ति होती है। बूंद-बूंद टपकते पानी से मुश्किल से ही दो-तीन बर्तन ही भर पाते हैं। आठ साल से बरकरार इस समस्या का समाधान न होने से ग्रामीणों में रोष है। यहां सरकार के हर घर को पर्याप्त पानी के दावे पानी भरते हुए नजर आ रहे हैं।
ग्रामीण भूपेंद्र, आशा, विमला, देशराज, महिद्र सिंह, शशिपाल, हरिदर, तिलक सिंह, नरेंद्र व भुवनेश का कहना है कि कैला गांव में तीन दिन बाद पानी आता तो जरूर है, पर वह भी बूंद-बूंद। गर्मी में पानी की व्यवस्था करने के लिए उन्हें दो किलोमीटर दूर नाग मंदिर की दौड़ लगाना पड़ती है। यहां हैंडपम्प से पानी भरने के लिए लंबी लाइन में लगना पड़ता है। महिलाएं सिर पर पानी के बर्तन उठाकर पैदल दो किलोमीटर चलती हैं। सर्दी में पानी की व्यवस्था करने में उनका पसीना निकल जाता है।
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पेयजल योजना का सिरे चढ़ने में लग सकता है समय
जलशक्ति विभाग विभाग ने कैला पंचायत के लोगों की समस्या का समाधान करने के लिए सिल्लाघ्राट से उठाऊ पेयजल योजना सिरे चढ़ाने के लिए तमाम औपचारिकताओं को सिरे चढ़ा दिया है। इसके लिए पैसा भी मंजूर हो चुका है। अगर यह योजना सिरे चढ़ती है तो तो ग्रामीणों को पेयजल संकट से नहीं जूझना पड़ेगा। उधर ग्रामीणों का कहना है कि सिल्लाघ्राट से जिस पेयजल स्रोत से योजना बनाई जा रही है, उसको पूरा होने में कई साल लग जाएंगे। ऐसे में उनकी दिक्कतें खत्म होती नहीं दिख रही हैं। विभाग को इस योजना के काम को जल्द शुरू कर गांव तक पानी पहुंचाने के लिए युद्धस्तर पर प्रयास करने चाहिए।
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इस विकल्प से मिल सकता है प्रियउंगल व कैला को पानी
कैला पंचायत से सटे प्रियउंगल गांव के नीचे एक खड्ड बहती है। यहां पर पानी काफी मात्रा में है। ग्रामीणों का कहना है कि अगर यहां पर जलशक्ति विभाग उठाऊ पेयजल योजना का निर्माण करता है तो कैला व प्रियउंगल गांव के करीब 30 परिवारों की पानी की दिक्कत दूर हो सकती है। इस योजना का प्रस्ताव आगामी ग्राम सभा की बैठक में पारित करने की भी पंचायत ने तैयारी कर ली है।
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पानी के लिए जेबें करनी पड़ती हैं ढ़ीली
अप्रैल व मई में कैला पंचायत में हालात यह हो जाते हैं कि ग्रामीणों को पैसे खर्च कर पानी की व्यवस्था करनी पड़ती है। कभी बस तो कभी घोड़ों से घर तक पानी पहुंचाना पड़ता है। गाड़ी से कैला तक पानी पहुंचाने के 1200 रुपये देने पड़ते हैं। ग्रामीणों में इस बात को लेकर रोष है कि विभाग बिल तो पहुंचाने में देर नहीं करता पर पानी की आपूर्ति में अव्यवस्था जरूर दिखाता है।
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गर्मी में टैंकर लगाए प्रशासन
ग्रामीणों का कहना है कि अगर प्रशासन गर्मी में टैंकर से पानी की व्यवस्था करे तो उनकी दिक्कत दूर हो सकती है। उन्हें थोड़ी बहुत राहत जरूर मिलेगी। इतने वर्ष बाद प्रशासन यह व्यवस्था भी नहीं बना पाया है। अब गर्मी में उन्हें पानी की गाड़ी बुलाने के लिए अपनी जेब से पैसे देने पड़ेंगे।
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कैला पंचायत में पानी की बहुत दिक्कत है। प्रियउंगल गांव के नीचे बहती खड्ड पर अगर पेयजल बनाई जाती है तो 30 परिवारों की पेयजल दिक्कत दूर हो सकती है। ग्रामसभा की बैठक में इस पर प्रस्ताव पारित कर जल्द विभाग को सौंपेगे। पंचायत इस मुद्दे को लेकर गंभीर है।
-नरेश कुमार, उपप्रधान कैला पंचायत।
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पानी की समस्या का समाधान करने के लिए जलशक्ति विभाग ने युद्धस्तर पर प्रयास शुरू कर दिए हैं। पेयजल योजना के संबंध में एस्टिमेट मंजूर होने के बाद औपचारिकताएं पूरी की जा रही हैं। जब तक योजना का कार्य पूरा नहीं होता, तब तक लोगों को पानी उपलब्ध करवाने के लिए अन्य विकल्प देखा जाएगा।
-राजेंद्र ठाकुर, अधिशाषी अभियंता जलशक्ति विभाग मंडल चंबा
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