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'सरकारी स्कूल में कभी टाट पर बैठकर पढ़ता था, आज मुख्यमंत्री हूं '; हिमाचल CM सुक्खू ने बच्चों को सुनाई प्रेरक कहानी

Published: Sat, 07 Nov 2026 10:33 AM (IST)

मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने चंबा के मैहला स्कूल में छात्रों से संवाद करते हुए सरकारी स्कूल से मुख्यमंत्री तक के अपने सफर को साझा किया।

बच्चों से मिलते सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (जागरण फोटो)
बच्चों से मिलते सीएम सुखविंदर सिंह सुक्खू (जागरण फोटो)

HighLights

  1. सीएम सुक्खू ने छात्रों से साझा किया अपना संघर्षपूर्ण सफर

  2. सरकारी स्कूल से मुख्यमंत्री बनने की प्रेरणादायक कहानी सुनाई

  3. मैहला स्कूल को 2 करोड़ रुपये और बस सुविधा का आश्वासन

सुरेश ठाकुर, चंबा। कभी सरकारी स्कूल में बैठने के लिए टाट मिलता था, आज उसी विद्यार्थी के कंधों पर पूरे हिमाचल को संभालने की जिम्मेदारी है। न कोई बड़ा पद विरासत में मिला और न ही सफलता का रास्ता आसान था। मेहनत, हौसले और नेतृत्व करने की इच्छाशक्ति ने एक सरकारी स्कूल के विद्यार्थी को मुख्यमंत्री की कुर्सी तक पहुंचाया।

यह अनुभव मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने शुक्रवार को पीएम श्री आदर्श वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय मैहला में विद्यार्थियों के साथ संवाद के दौरान बच्चों से साझा किए। उनहोंने कहा कि सपने देखने के लिए परिस्थितियां नहीं, बल्कि हौसला बड़ा होना चाहिए।

सरकारी स्कूल में पढ़ने वाला बच्चा भी अपनी मेहनत और लगन से प्रदेश का मुख्यमंत्री बन सकता है। इसलिए लक्ष्य बड़ा रखें और उसे हासिल करने के लिए पूरी ईमानदारी से जुट जाएं।

मुख्यमंत्री का विद्यार्थियों के साथ यह संवाद कई मायनों में खास रहा। यहां बच्चे केवल मुख्यमंत्री को सुनने नहीं आए थे, बल्कि उन्होंने बेझिझक अपनी समस्याएं रखीं, सवाल पूछे और अपने भविष्य के सपनों को भी साझा किया।

मुख्यमंत्री ने भी मंच की औपचारिकताओं से बाहर निकलकर बच्चों के बीच समय बिताया। कहीं उनके सवालों पर ठहाके लगाए तो कहीं जीवन की ऐसी सीख दी, जो विद्यार्थियों के लिए लंबे समय तक प्रेरणा बनी रहेगी।

मैहला के विद्यार्थियों के लिए यह संवाद केवल मुख्यमंत्री से मुलाकात नहीं, बल्कि अपने सपनों को नई उड़ान देने का अवसर बन गया। बच्चों को स्कूल की सुविधाओं के लिए भरोसा मिला तो मुख्यमंत्री के संघर्ष की कहानी से यह सीख भी मिली कि परिस्थितियां चाहे जैसी हों, मजबूत इरादों के सामने मंजिल कभी दूर नहीं रहती।

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40 बच्चों के बीच पहुंचे मुख्यमंत्री

विद्यालय पहुंचते ही मुख्यमंत्री करीब 40 विद्यार्थियों के बीच पहुंच गए। उन्होंने बच्चों से हाथ मिलाया, गले मिले और पूछा कि बड़े होकर क्या बनना चाहते हैं?

जवाब में 10 बच्चों ने पुलिस अधिकारी, 15 ने अध्यापक और 10 ने सेना में जाने की इच्छा जताई। दो बच्चों ने वकील, एक ने भारतीय प्रशासनिक सेवा का अधिकारी, एक ने कमांडो और एक ने चिकित्सक बनने का सपना बताया।

मुख्यमंत्री ने मुस्कुराकर पूछा कि कोई नेता नहीं बनना चाहता? इस पर किसी ने हाथ नहीं उठाया। उन्होंने हंसते हुए कहा कि वह स्वयं भी सरकारी स्कूल में पढ़कर मुख्यमंत्री बने हैं।

बच्चों ने बताईं स्कूल की मुश्किलें, मुख्यमंत्री ने की दो करोड की घोषणा

बात केवल सपनों तक सीमित नहीं रही। 12वीं की छात्रा सुहानी ने कमरों की कमी का मुद्दा उठाते हुए बताया कि विद्यार्थियों की संख्या के अनुपात में पर्याप्त कमरे नहीं हैं।

मुख्यमंत्री ने अपने विद्यार्थी जीवन को याद करते हुए बताया कि प्राथमिक कक्षाओं में उन्हें भी टाट पर बैठकर पढ़ाई करनी पड़ती थी। उन्होंने नए भवन के लिए जगह उपलब्ध होने और औपचारिकताएं पूरी होने पर जल्द दो करोड़ रुपये देने की घोषणा की।

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पांचवीं के छात्र गोविंद ने प्रतियोगिताओं के आयोजन के लिए बड़े हॉल की आवश्यकता बताई। मुख्यमंत्री ने स्कूल में बड़ा हॉल बनाने का भरोसा दिया। वहीं, 11वीं के छात्र परम चौहान ने बताया कि कई विद्यार्थी तीन से चार किलोमीटर पैदल चलकर स्कूल पहुंचते हैं। पहले बस सेवा उपलब्ध थी, लेकिन अब बंद हो गई है। इस पर मुख्यमंत्री ने बस सुविधा दोबारा शुरू करवाने का आश्वासन दिया।

परीक्षा का तनाव सताए तो किताबों से हटाएं नजर, अपनों से करें बात

11वीं की छात्रा तमत्ना कपूर ने परीक्षा के दौरान होने वाले तनाव से निपटने का तरीका पूछा। मुख्यमंत्री ने कहा कि तनाव महसूस होने पर कुछ समय पढ़ाई से ध्यान हटाकर दोस्तों, सहपाठियों और परिवार के सदस्यों से बातचीत करनी चाहिए। हंसने-बोलने से तनाव कम करने में मदद मिलती है। उन्होंने मोबाइल फोन का कम इस्तेमाल करने की सलाह भी दी।

पूरा हिमाचल एक परिवार, आर्थिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती

छठी की छात्रा शिवाया ने पूछा कि प्रदेश का मुखिया बनने के बाद सबसे बड़ी चुनौती क्या होती है? मुख्यमंत्री ने जवाब दिया कि आर्थिक संतुलन बनाए रखना सबसे बड़ी चुनौती है।

रविवार की छुट्टी नहीं लेता: सीएम सुक्खू

इसी बीच सातवीं कक्षा के छात्र आयुष ने जब उनसे पूछा कि मुख्यमंत्री बनने के बाद क्या रविवार को छुट्टी मिलती है, तो सुक्खू ने मुस्कुराते हुए जवाब दिया, 'मुख्यमंत्री दूसरों को छुट्टी दे सकता है, लेकिन खुद छुट्टी नहीं ले सकता।'

उनका यह जवाब सुनकर बच्चे भी मुस्कुरा उठे। मुख्यमंत्री ने बताया कि आज वह विद्यार्थियों के बीच हैं तो अगले दिन दूसरे बच्चों और आम लोगों की समस्याएं सुननी होती हैं।

लोगों की सेवा करते हुए ही उनका अधिकतर समय निकल जाता है। विद्यार्थियों के साथ उनका यह संवाद केवल सवाल-जवाब नहीं रहा, बल्कि इसमें संघर्ष, सफलता, असफलता और जीवन के अनुभवों की कई प्रेरक कहानियां भी सामने आईं।

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