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पूर्व CM वीरभद्र सिंह ने 1996 में शुरू की थी हक की लड़ाई, अब चंडीगढ़ पर 7.19% हिस्सेदारी के लिए दावा ठोकेगा हिमाचल

Published: Fri, 06 Nov 2026 10:58 PM (IST)

हिमाचल प्रदेश ने भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में बिजली हिस्सेदारी पर सुप्रीम कोर्ट का ऐतिहासिक फैसला जीता है। अब ...और पढ़ें

पूर्व CM वीरभद्र सिंह और सीएम सुक्खू। फाइल फोटो

पूर्व CM वीरभद्र सिंह और सीएम सुक्खू। फाइल फोटो

HighLights

  1. बीबीएमबी में हिमाचल को बिजली हिस्सेदारी पर मिली ऐतिहासिक जीत।

  2. अब चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा करेगा हिमाचल।

  3. वीरभद्र सिंह ने 1996 में शुरू की थी हक की लड़ाई।

राज्य ब्यूरो, शिमला। हिमाचल के हक की लड़ाई अब बीबीएमबी से आगे चंडीगढ़ तक पहुंचेगी। भाखड़ा ब्यास प्रबंधन बोर्ड (बीबीएमबी) में प्रदेश की बिजली हिस्सेदारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को ऐतिहासिक जीत बताते हुए लोक निर्माण मंत्री विक्रमादित्य सिंह ने चंडीगढ़ में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का दावा मजबूती से उठाने का ऐलान किया है।

उन्होंने शिमला में पत्रकार वार्ता के दौरान कहा कि बीबीएमबी में प्रदेश के अधिकारों की लड़ाई वर्ष 1996 में तत्कालीन मुख्यमंत्री स्वर्गीय वीरभद्र सिंह ने शुरू की थी। करीब चार दशक के कानूनी संघर्ष के बाद अब प्रदेश को इसका लाभ मिलने जा रहा है। विक्रमादित्य सिंह ने कहा कि पंजाब पुनर्गठन अधिनियम, 1966 के तहत बीबीएमबी परियोजनाओं में हिमाचल की 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी का अधिकार है।

बकाया ऊर्जा लाभों की गणना और वसूली का मामला लंबित था

तत्कालीन प्रधानमंत्री पीवी नरसिम्हा राव और सोनिया गांधी के सहयोग से वीरभद्र सिंह सरकार ने इस मामले को न्यायिक मंच पर उठाया था। वर्ष 2011 में भी सुप्रीम कोर्ट ने हिमाचल के हिस्सेदार के अधिकार को स्वीकार कर क्रियान्वयन के निर्देश दिए थे, लेकिन बकाया ऊर्जा लाभों की गणना और वसूली का मामला लंबित था।

अब सुप्रीम कोर्ट के फैसले के तहत हिमाचल को अगले 20 वर्षों तक प्रतिवर्ष 60 करोड़ यूनिट बिजली मिलेगी। इससे प्रदेश को हर साल 400 से 500 करोड़ रुपये का अतिरिक्त आर्थिक लाभ मिलने का अनुमान है। मंत्री ने मुख्यमंत्री सुखविन्द्र सिंह सुक्खू को इस सफलता का श्रेय देते हुए कहा कि सरकार ने देश के बेहतरीन वकीलों के माध्यम से कानूनी लड़ाई लड़ी।

उन्होंने कहा कि भाखड़ा-नंगल और पोंग बांध के कारण विस्थापित परिवारों के लंबित अधिकारों की लड़ाई भी जारी रहेगी। जल, वन और भूमि संसाधनों पर हिमाचल का उचित अधिकार सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है। अब चंडीगढ़ में 7.19 प्रतिशत हिस्सेदारी के लिए भी कानूनी और राजनीतिक स्तर पर लड़ाई तेज की जाएगी।

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