संवाद सहयोगी, भगेड़ : सर्दी के मौसम में मुर्गियों में विभिन्न बीमारियों के फैलने की संभावना अधिक हो जाती है। जिसके चलते इस मौसम में मुर्गी पालकों को अधिक सावधानी बरतने की आवश्यकता है।

सर्दी के मौसम में धुंध पड़ने से ऑक्सीजन की कमी हो जाती है जिसके कारण मुर्गी के चूजों को सांस लेने में दिक्कत हो जाती है। शरीर के हिसाब से तापमान भी कम जाता है। ऐसे में मुर्गियों को ऊष्मा देने की आवश्यकता होती है। सबसे अधिक सावधानी एक दिन के चूजे के प्रति रखनी पड़ती है। कुछ लोग एक दिन के चूजों को मोटा दाना देना शुरू कर देते हैं जिसके कारण उनकी नली बंद हो जाती है तथा उनकी मृत्यु हो जाती है। मोटा दाना देने के स्थान पर गुड़ पानी देना अधिक उचित रहता है तथा बारीक देना पड़ता है। मुर्गीखाने में एलइडी के स्थान पर साधारण बल्ब का प्रयोग करना चाहिए उससे चूजों को ऊष्मा मिलती रही। मुर्गियों में सर्दी के मौसम में निमोनियां तथा सीआरडी नामक बीमारी हो जाती है जिसके इलाज के लिए मुर्गी पालकों को एक लीटर पानी में करीब चार ग्राम एंटीबायोटिक ऑक्सीटेट रासाइक्लीन दवाई डालकर देनी चाहिए। सर्दी के मौसम में बर्ड फ्लू फैलने का खतरा भी बना रहता है । इसकी जांच के लिए खून, लार के सैंपल आरडीडी लैब जालंधर भेजे जाते हैं।

उधर, पशु पालन विभाग बिलासपुर के उपनिदेशक अविनाश शर्मा ने बताया कि यदि मुर्गीपालकों को किसी प्रकार की परेशानी आती है तो उसे पशु चिकित्सक से सहायता लेनी चाहिए।

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