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    वेरिकोज वेन: ऐसे बचें अल्सर के खतरे से

    By Babita kashyapEdited By:
    Updated: Tue, 17 Nov 2015 11:59 AM (IST)

    आधुनिक तकनीक से इलाज आजकल वेरिकोज वेन के इलाज में मल्टी-पोलर आरएफए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। वेरिकोज अल्सर के इलाज में रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) सबसे आधुनिक और प्रभावी पद्धति है।

    आधुनिक तकनीक से इलाज आजकल वेरिकोज वेन के इलाज में मल्टी-पोलर आरएफए मशीन का इस्तेमाल किया जाता है। वेरिकोज अल्सर के इलाज में रेडियो फ्रीक्वेंसी एब्लेशन (आरएफए) सबसे आधुनिक और प्रभावी पद्धति है।

    कलर-डॉप्लर अल्ट्रासाउंड विजन के जरिये असामान्य नसों में एक रेडियोफ्रीक्वेंसी कैथेटर पिरोया जाता है और प्रभावित वेन्स (शिराओं)का इलाज रेडियो-एनर्जी से किया जाता है।

    अनेक क्षेत्रों में आधुनिक लाइफ स्टाइल के बढ़ते दखल ने कई ऐसे रोगों में इजाफा किया है, जिनका पहले कभी हमने नाम तक नहीं सुना था। ऐसी ही एक बीमारी का नाम है वेरिकोज वेन। इस बीमारी में पैरों की नसें मोटी हो जाती है। यदि वेरिकोज वेन का समय पर इलाज नहीं कराया जाए, तो वह वेरिकोज अल्सर में बदल जाता है। कम उम्र की ऐसी युवतियों में भी वेरिकोज वेन पनपने का खतरा बढऩे लगा है जो तंग जीन्स और ऊंची एडिय़ों वाली जूतियां पहनती हैं।

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    लक्षण

    वेरिकोज वेन दोनों टांगों में हो सकता है, जहां कई सारे वॉल्व होते हैं और जिनसे हृदय तक रक्त

    प्रवाह में मदद मिलती है। जब ये वॉल्व क्षतिग्रस्त हो जाते हैं, तो टांगों में रक्त जमा होने लगता है।

    इस वजह से सूजन, दर्द, थकान, त्वचा का बदरंग होना, खुजलाहट और वेरिकोसिटी (नसों का फूल जाना) जैसी समस्याएं पैदा होती हैं। यदि समय पर इलाज नहीं कराया जाए तो टांग में गंभीर अल्सर भी विकसित हो सकता है, जो सिर्फ एड़ी के पास ही होता है।

    अल्सर का कारण- वेरिकोज अल्सर के कारणों में मोटापा, व्यायाम का अभाव और महिलाओं में गर्भधारण के दौरान नसों (नव्र्स) पर असामान्य दबाव आदि को शामिल किया जाता है। इसके अलावा लंबे समय तक खड़े रहना या फिर अधिक देर तक टांग लटकाकर बैठना वेरीकोज अल्सर की समस्या को उत्पन्न कर सकता है।

    आजकल कंप्यूटर प्रोफेशनल्स, रिसेप्शनिस्ट, सिक्योरिटी गार्ड, ट्रैफिक पुलिस, दुकानों और

    डिपार्टमेंटल स्टोर्स में काउंटर पर कार्यरत सेल्समैन और लगातार डेस्क जॉब करने वाले लोगों में वेरिकोज अल्सर के मामले सबसे ज्यादा पाए जाते हैं।

    महिलाओं में कुछ खास

    हार्मोन के प्रभाव के कारण पैरों की नसों की दीवारें फूल जाती हैं। इसके अलावा गर्भधारण के दौरान टांगों की नसों पर बहुत ज्यादा दबाव पडऩे के कारण ये नसें कमजोर हो जाती हैं

    और सूज जाती हैं।

    जांच- कलर डॉप्लर परीक्षण द्वारा सामान्य जांच और अल्ट्रासाउंड कराने से क्षतिग्रस्त वॉल्व और सूजी हुई नसों के रूप में इस रोग का सटीक स्थान देखा जा सकता है।

    इलाज- वेरिकोज अल्सर के पुराने इलाज के अंतर्गत पीडि़त व्यक्ति को लेटने या बैठने के दौरान टांगों को ऊपर उठाकर रखने की सलाह दी जाती थी। जब रोग बहुत ज्यादा बढ़ जाता है, तो वेन स्ट्रिपिंग (ऑपरेशन के जरिये वेन या शिरा को बाहर निकाल देना)जैसी बड़ी सर्जरी करानी पड़ती है। इस वजह से टांगों में भद्दा निशान पड़ जाता है और रिकवरी में भी ज्यादा वक्त लगता है।

    सावधानियां बरतें

    बहरहाल, वेरिकोज अल्सर के ठीक हो जाने का मतलब यह नहीं है कि यह समस्या खत्म हो चुकी। भले ही ऊपरी त्वचा दुरुस्त हो जाए, लेकिन नसों के अंदर की समस्या बनी रहती है और आपको अल्सर की पुनरावृत्ति से बचने के लिए सावधानियां बरतनी होंगी। जहां तक संभव हो पैरों को ऊपर उठाकर रखना होगा। इसी तरह त्वचा की शुष्कता (ड्राइनेस) दूर करने के लिए ज्यादा से ज्यादा मॉइश्चराइजिंग क्रीम का इस्तेमाल करते हुए त्वचा को अच्छी स्थिति में रखना होगा। ताजा फलों का सेवन, व्यायाम करना और धूम्रपान से दूर रहना भी अल्सर को शीघ्र भरने में सहायक होता है।

    डॉ. प्रदीप मुले

    सीनियर इंटरवेंशनल रेडियोलॉजिस्ट

    फोर्टिस हॉस्पिटल, नई दिल्ल