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    जलने की समस्या-त्वचा में फिर आ सकती है रौनक

    By Edited By:
    Updated: Tue, 21 Oct 2014 12:01 PM (IST)

    दीपावली पर जलने की समस्या सेसंबंधित मामले कुछ ज्यादा ही सामने आते हैं, लेकिन देश में जलने (बर्न) की समस्या के मामले हर दिन सामने आते हैं। ऊपरी त्वचा या मामूली रूप से जली त्वचा को छोड़ दें, तो गहराई तक जली त्वचा क्षतिग्रस्त हो जाती है और घाव के दागदार निशान शेष रह जाते हैं। अगर

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    दीपावली पर जलने की समस्या सेसंबंधित मामले कुछ ज्यादा ही सामने आते हैं, लेकिन देश में जलने (बर्न) की समस्या के मामले हर दिन सामने आते हैं। ऊपरी त्वचा या मामूली रूप से जली त्वचा को छोड़ दें, तो गहराई तक जली त्वचा क्षतिग्रस्त हो जाती है और घाव के दागदार निशान शेष रह जाते हैं। अगर त्वचा गहराई तक जली हो और पहले ही हफ्ते के अंदर त्वचा की स्किन ग्राफ्टिंग(शरीर के किसी भाग से त्वचा की पर्त लेकर दूसरे भाग में लगाने को स्किन ग्रफ्टिंग कहा जाता है ) नहीं की जाती है, तो उसे ठीक होने में दो हफ्ते से ज्यादा का वक्त लग सकता है, जिसके कारण जला हुआ भाग स्कार(दागदार गहरा निशान) के रूप में तब्दील हो जाता है। प्रभावित त्वचा सिकुड़ जाती है और उसमें मोटापन आ जाता है।

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    त्वचा में सिकुड़न

    जब शरीर के किसी भाग की त्वचा जलती है, तो उसके आसपास की त्वचा में खिंचाव शुरू हो जाता है। इस कारण त्वचा में सिकुड़न आ जाती है। ऐसे में जलने की स्थिति में शीघ्र ही उपचार कराने की जरूरत होती है क्योंकि त्वचा के क्षतिग्रस्त होने से जख्म वाले हिस्से में मूवमेंट प्रभावित होता है और अगर जोड़ों वाले हिस्से में ऐसा होता है, तो अपंगता की समस्या भी हो सकती है।

    त्वचा का क्षतिग्रस्त दागदार भाग काफी बड़ा, अस्थिर और रंगहीन (डी-पिग्मेंटेड) हो सकता है। कई बार यह प्राणघातक भी हो सकता है। इस तरह के ज्यादातर मरीज जली त्वचा के ठीक होने के बाद भी प्रभावित हिस्से में खुजली या त्वचा के फटने की शिकायत करते हैं और ऐसे मरीजों को एंटी-एलर्जिक दवाएं लेने की सलाह दी जाती है। इस तरह की खुजली की रोकथाम केवल मरीज के आराम के लिए ही जरूरी नहीं है बल्कि इससे फोड़ा या फफोला पड़ने से भी बचाव होता है। जलने से क्षतिग्रस्त त्वचा का मॉइश्चराइजिंग लोशंस, प्रेशर गारमेंट थेरेपी, सिलिकॉन शीट ट्रीटमेंट, सिलिकॉन जेल्स आदि के जरिये उपचार किया जा सकता है।

    आधुनिक उपचार विधि

    आधुनिक उपचार विधि के तहत दागदार त्वचा पर आंशिक लेजर ट्रीटमेंट किया जाता है और दागदार निशान वाली त्वचा में वसा की सुई(फैट इंजेक्शन) लगायी जाती है। वसा की सुई दागदार त्वचा को ठीक करने में बेहद कारगर है और प्लास्टिक सर्जन के लिए यह एक नवीनतम विधि है। इस वसा वाली सुई में कोशिका को पुनर्जीवित करने वाले तत्व(जिनमें स्टेम सेल्स भी शामिल हैं) होते हैं, जो दागदार त्वचा को ठीक करने में मददगार होते हैं। फैट इंजेक्शन में मरीज के शरीर की वसा का इस्तेमाल किया जाता है, जो जली त्वचा के क्षतिग्रस्त हिस्से में खुजली और घाव के निशान को ज्यादा बढ़ने से रोकती है। वसा कोशिका को नाभि के आसपास के हिस्सों,जांघ या कूल्हे जैसे भागों से निकाला जाता है। इसे एक सिरिंज से निकाला जाता है और व्यक्ति की पीड़ित या प्रभावित वसा में लगा दिया जाता है।

    लेजर ट्रीटमेंट

    दागदार व सिकुड़न भरी त्वचा के उपचार में लेजर ट्रीटमेंट काफी हद तक कारगर साबित हुआ है। इसकी मदद से दागदार त्वचा में सुधार किया जा सकता है और त्वचा के रंग और पर्त में भी सुधार हो सकता है। इस विधि से उपचार में कम दर्द का अहसास होता है और सबसे अच्छी बात यह है कि चोट या दुर्घटना के कई सालों बाद भी इसके जरिये उपचार संभव है।

    विशेषता

    लेजर ट्रीटमेंट के उपचार के लिए मरीज को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत नहीं पड़ती। माह में दो अंतराल के दौरान कई बार इस तरह का उपचार करने की जरूरत होती है। दागदार त्वचा के भागों में त्वचा की मोटाई कम करने और उसे लचीला बनाने में लेजर ट्रीटमेंट खासा प्रभावी है। अगर दागदार त्वचा में सिकुड़न आ जाती है और इसके कारण किसी जोड़ (ज्वॉइंट) के मूवमेंट में दिक्कत आ रही हो,तो उस क्षतिग्रस्त दागदार त्वचा को निकालकर नई त्वचा का प्रत्यारोपण कर दिया जाता है। प्रत्यारोपण के बाद फिजियोथेरेपी कराने की जरूरत होती है।

    (डॉ.अनूप धीर, सीनियर प्लास्टिक व कॉस्मेटिक सर्जन अपोलो हॉस्पिटल, नई दिल्ली)