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    Haryana News: 1975 से किसान लड़ रहे थे केस, नहीं मिला मुआवजा; कोर्ट के आदेश पर PWD का ट्रक ले गए घर

    Updated: Thu, 21 Aug 2025 10:10 PM (IST)

    यमुनानगर में पीडब्ल्यूडी विभाग द्वारा सड़क निर्माण के लिए 1975 में अधिग्रहित की गई जमीन का मुआवजा किसानों को नहीं दिया गया। इस कारण किसानों ने कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी को किसानों को मुआवजा देने का आदेश दिया जिसका पालन न करने पर कोर्ट ने विभाग का ट्रक और रोड रोलर किसानों को सौंप दिया। अगली सुनवाई 25 अगस्त को है।

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    मुआवजा नहीं देने पर कोर्ट के आदेश पर किसान ले गए पीडब्ल्यूडी का ट्रक। फोटो जागरण

    जागरण संवाददाता, यमुनानगर। पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सड़क के लिए अधिग्रहण की जमीन का किसानों को मुआवजा नहीं दिया। न ही नियमित कोर्ट में पेश किए। जगाधरी कोर्ट ने पीडब्ल्यूडी का एक ट्रक, रोड रोलर व स्टोर किसानों को सौंपने के आदेश कर दिए। वीरवार को किसानों ने ट्रक कब्जे में लिया। ट्रक किसानों के घर खड़ा है। किसान 1975 से केस लड़ रहे थे। अब इस मामले में अगली सुनवाई 25 अगस्त को है।

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    गुंदियानी निवासी सुशील कुमार ने बताया कि उनके बुजुर्ग प्रेमचंद, अजमेर, ज्ञानंचद, मेहरचंद, बरखाराम और रामकिशन की कूड़ी सरस्वतीनगर से लाड़वा रोड पर दो मरले में थी। साल 1975 में पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने सरस्वतीनगर रेलवे स्टेशन से लाडवा रोड का निर्माण कराया है।

    कूड़ी का गड्ढ़ा सड़क निर्माण में चल गया, विभाग ने किसानों की जमीन का मुआवजा नहीं दिया। प्रभावित किसानों ने पहले तो विभाग के अधिकारियों को शिकायत दी, विभाग में सुनवाई नहीं हुई। अजमेर, रामकिशन की मृत्यु हो चुकी है।

    जाना पड़ा कोर्ट

    प्रभावित किसानों का कहना है कि सुनवाई नहीं होने पर कोर्ट का दरवाजा खटखटाया। कोर्ट ने सुनवाई करते हुए पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को दो लाख 52 हजार देने के आदेश दिए, लेकिन अधिकारियों ने किसानों को मुआवाजा नहीं दिया।

    इस बारे में किसानों ने कोर्ट को बताया। एडीजे की अदालत ने पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों को मुआवजा नहीं देने पर एक ट्रक, रोड रोलर व विश्वकर्मा चौक का स्टोर किसानों को सौंपने के आदेश दे दिए।

    कोर्ट के कर्मचारी पहुंचे किसानों के साथ

    किसानों ने बताया कि कोर्ट के कर्मचारियों के साथ पीडब्ल्यूडी कार्यालय में पहुंचे। वहां एक ट्रक मिला। मौके पर रोड रोलर नहीं था। साथ ही स्टोर पर नोटिस चस्पा कर दिया। किसान विभाग का ट्रक अपने घर ले गए। पीडब्ल्यूडी के एक्सईएन से कब्जा देने के दस्तावेजों पर हस्ताक्षर भी करवाए।