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    पड़ोस में पर्यटन : अध्यात्म और नवचेतना भरती आदिबद्री की यात्रा

    By JagranEdited By:
    Updated: Wed, 25 Sep 2019 06:37 AM (IST)

    आदिबद्री का यह खूबसूरत नजारा हर किसी को भी अपनी ओर खींच लेता है। हरियाली के साथ धार्मिक स्थलों से घिरे इस एरिया में आदिबद्री और मंत्रा देवी मंदिर है। गोमुख से निकलता पानी सरस्वती नदी का प्रमाण देता है। घूमने के लिहाज से अच्छी जगह है।

    पड़ोस में पर्यटन : अध्यात्म और नवचेतना भरती आदिबद्री की यात्रा

    जागरण संवाददाता, यमुनानगर : आदिबद्री का यह खूबसूरत नजारा हर किसी को भी अपनी ओर खींच लेता है। हरियाली के साथ धार्मिक स्थलों से घिरे इस एरिया में आदिबद्री और मंत्रा देवी मंदिर है। गोमुख से निकलता पानी सरस्वती नदी का प्रमाण देता है। घूमने के लिहाज से अच्छी जगह है। यहां आने की प्लॉनिग परिवार के साथ की जा सकती है। यात्रा अध्यात्म से भरी है। जिला मुख्यालय से 47 किलोमीटर की दूरी पर है। सीधे बस सर्विस है।

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    यहां राजा परीक्षित का किला भी

    भगवान केदारनाथ मंदिर और दो हजार फुट ऊंचे पहाड़ की चोटी पर माता मंत्रा देवी मंदिर के रूप में क्षेत्र की पहचान है। पुजारी ब्रह्मचारी विनय स्वरूप और मनोज आचार्य बताते हैं कि आदिबद्री धाम में पूजा का महत्व है, क्योंकि यहां पर सरस्वती नदी का उद्गम स्थल है। साथ ही केदारनाथ मंदिर, बद्रीनाथ मंदिर और पहाड़ियों पर माता मंत्रा देवी का मंदिर हैं। धार्मिक उत्सवों का आयोजन होता ही है। यहां पर राजा परीक्षित का किला और बौद्ध धर्म से जुड़ी वस्तुएं भी है। पर्यटन इनके बारे में भी जानकारी ले सकते हैं।

    महाभारत कालीन शंख के होते दर्शन

    सोम नदी के एक किनारे पर बद्रीनाथ तो दूसरे किनारे पर केदारनाथ है। बताया जाता है कि यहां भगवान बद्रीनाथ का महाभारत कालीन शंख रखा हुआ है। भगवान बद्रीनाथ की प्रतिमा आकर्षित करती है। इसको देखने से मन को शांति मिलती है। बद्रीनाथ मंदिर में माता मंत्रा देवी की पिडी भी हैं। जो श्रद्धालु पहाड़ों पर नहीं चढ़ सकता वह यहां पूजा कर सकता है। नदी के दूसरे छोर पर भगवान केदारनाथ का मंदिर है। मंदिर में स्वयंभू भगवान शिवलिग है। मान्यता है कि 21 दिन पूजा करने से मनोकामना भगवान केदारनाथ पूरी करते हैं। यहीं पर सीढि़यों के नजदीक भगवान शनि देव का मंदिर भी है। बराबर में ही बड़ी गोशाला है। यहां श्रद्धालुओं को औषधियों की चाय प्रसाद रूप में दी जाती है।

    ऐसे पहुंचे मंदिर

    जिला मुख्यालय से 47 किलोमीटर की दूरी पर आदिबद्री है। यमुनानगर-जगाधरी से बिलासपुर, रणजीतपुर होते हुए काठगढ़ गांव से छोटी बड़ी मनमोहक पर्वत मालाओं को पार कर चार किमी पैदल पर्वत श्रृंखला नाहन, सरौठा जमदाग्नि धूना रेणुका एवं हिमाचल की अनेक श्रृंखलाओं का विहंगम दृश्य देखते हैं। यमुनानगर से तीन बसें आदिबद्री के लिए चलती हैं, लेकिन तीनों रणजीतपुर तक ही जाती है। रणजीतपुर से आदिबद्री स्थित यज्ञशाला की दूरी तीन किलोमीटर है। यज्ञशाला से केदारनाथ मंदिर की दूरी तीन किलोमीटर है। इस तरह रणजीतपुर से केदारनाथ मंदिर तक छह किलोमीटर का सफर है, लेकिन यह सफर पैदल ही तय करना पड़ता है।