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    Haryana Roadways: महिलाओं को निशुल्क यात्रा सुविधा देने के बावजूद रोडवेज ने कमाया राजस्व

    By Avneesh kumar Edited By: MOHAMMAD AQIB KHAN
    Updated: Thu, 31 Aug 2023 06:15 PM (IST)

    रक्षाबंधन पर दो दिनों तक रोडवेज विभाग की ओर से महिलाओं व 15 वर्षीय बच्चे की यात्रा निशुल्क की गई। इसके बावजूद भी रोडवेज लाभ में रही। इन दो दिनों में रोडवेज ने लगभग 25 लाख रुपये का राजस्व किया है जो आम दिनों से लगभग एक लाख रुपये अधिक है। रोडवेज के ट्रैफिक मैनेजर ने बताया कि त्योहार के दिनों में यात्री अधिक निकलते हैं।

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    महिलाओं को दिन निशुल्क यात्रा के बावजूद राेडवेज ने कमाया राजस्व

    यमुनानगर, जागरण संवाददाता: रक्षा बंधन पर्व पर दो दिनों तक रोडवेज विभाग की ओर से महिलाओं व 15 वर्षीय बच्चे की यात्रा निशुल्क की गई। निशुल्क यात्रा की सुविधा देने के बावजूद भी रोडवेज लाभ में रही। इन दो दिनों में रोडवेज ने लगभग 25 लाख रुपये का राजस्व किया है जो आम दिनों से लगभग एक लाख रुपये अधिक है। इसकी वजह यह है कि त्योहार में महिलाओं के साथ-साथ अन्य यात्रियों की भी संख्या बढ़ जाती है। जिसका असर रोडवेज की आमदनी पर पड़ता है। महिलाओं के लिए निशुल्क यात्रा होने के बावजूद भी रोडवेज को नुकसान नहीं रहता।

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    रोडवेज के बेड़े में 191 बसें हैं। सभी बसें आन रूट रहती है। सरकार की ओर से महिलाओं को रक्षा बंधन पर्व पर निश्शुल्क यात्रा का तोहफा दिया गया। जिस वजह से बसों में आम दिनों के मुकाबले अधिक भीड़ रही। आम दिनों में रोडवेज को रोजाना 12 लाख रुपये का राजस्व मिलता है। इन दो दिनों में रोडवेज ने लगभग 25 लाख रुपये की कमाई की।

    निजी बस चालकों पर भी रखी निगरानी

    रोडवेज की ओर से पहले ही आरटीओ को निजी बसों के बारे में लिख दिया गया था। सभी को कड़ी हिदायत दी गई थी कि वह किसी भी महिला का टिकट न काटे। यमुनानगर से नारायणगढ़, अंबाला व कुरूक्षेत्र के रूट पर निजी बसें चलती हैं। अक्सर निजी बस चालक लालच में फेरे कम कर देते हैं। इसके लिए रोडवेज विभाग व आरटीओ की टीम निगरानी रखे हुए थे। जिस वजह से निजी बसों के बारे में भी कोई शिकायत नहीं मिली।

    इनका कहना है

    रोडवेज के ट्रैफिक मैनेजर संजय रावल ने बताया कि त्योहार के दिनों में यात्री अधिक निकलते हैं। जिस वजह से रोडवेज बसों में भी आम दिनों के मुकाबले यात्रियों की संख्या अधिक रहती है। इसी तरह से रक्षा बंधन पर्व पर भी महिलाओं के साथ-साथ अन्य यात्री भी सफर करते हैं। जिससे राजस्व का नुकसान नहीं होता।