यमुनानगर, जागरण संवाददाता। धान की कटाई के बाद खेतों में पराली जलाने वालों कार्रवाई शुरू हो गई है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग ने गांव नाहरपुर में एक एकड़ में पराली जलाने पर 2500 रुपये जुर्माना किया है। इसके अलावा ब्लाक स्तर पर गठित टीमें अपने-अपने क्षेत्र में विशेष रूप से निगरानी कर रही हैं।

गत वर्ष धान के सीजन में फसल अवशेष जलाने पर 61 चालान हुए थे। एक लाख 52 हजार 500 रुपये जुर्माना किया गया था। उधर, भूसे के भाव में उछाल के चलते पराली की डिमांड बढ़ी है। ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि इस बार पराली जलाने वालों की संख्या कम ही रहेगी। खेत में फसल अवशेष जलाने पर दो एकड़ तक 2500 रुपये, दो से पांच एकड़ तक पांच हजार रुपये व इससे अधिक जलाने पर 15 हजार रुपये जुर्माने का प्रावधान है।

बीते वर्ष यह रही स्थिति

वर्ष 2017 में गेहूं के सीजन में 41 चालान हुए जबकि एक लाख पांच हजार 500 रुपये जुर्माना किया गया था। धान के सीजन में 11 चालान व 27500 रुपये जुर्माना, वर्ष 2018 में गेहूं सीजन में 34 चालान व एक लाख दो हजार 500 रुपये जुर्माना, धान के सीजन में 112 चालान व दो लाख 82 हजार 500 रुपये जुर्माना, 2019 में गेहूं के सीजन में 11 चालान व 27 हजार 500 रुपये जुर्माना, धान के सीजन में 116 चालान व दो लाख 90 हजार जुर्माना, 2020 में गेहूं के सीजन में 14 चालान व 28 हजार रुपये जुर्माना, धान के सीजन में 248 चालान व छह लाख 35 हजार रुपये जुर्माना किया गया था।

यह है बेहतर विकल्प

कंबाइन से धान की कटाई के बाद गांठें बनवाना बेहतर विकल्प है। ऐसा करने पर किसान को प्रति एकड़ एक हजार रुपये प्रोत्साहन राशि मिलेगी। दूसरा, धान के अवशेषों के बीच ही किसान सुपर सीडर से गेहूं की बिजाई कर सकते हैं। इसके कई फायदे हैं। पहला खेत की जुताई करने की आवश्यकता नहीं होती। दूसरा, जमाव अच्छा रहता है। खाद-खुराक गेहूं के दाने के साथ डलता है। जिससे पौधे को लाभ मिलता है। धान के अवशेषों में सुपर सीडर से बिजाई करने पर प्रदूषण की समस्या से निजात मिलती है। भूमि की उपजाऊ शक्ति में किसी प्रकार की कोई कमी नहीं आती है। पैदावार में भी बढ़ोतरी होती है। सुपर सीडर से अवशेषों के बीच गेहूं की स्वस्थ फसल पैदा होती है। सिंचाई की कम जरूरत पड़ती है। फसल के गिरने की संभावना न के बराबर रहती है।

यह है जलाने का नुकसान

खेतों में जल रहे फसल अवशेष जमीन को बंजर कर रहे हैं। विशेषज्ञों के मुताबिक एक टन धान की पराली जलाने से मिट्टी में 5.5 किलोग्राम नाइट्रोजन सल्फर 12 किलोग्राम, पोटाश 2.3 किलोग्राम व आर्गेनिक कार्बन 400 किलोग्राम पोषक तत्वों की हानि होती है। प्रदूषित कण शरीर के अंदर जाकर फेफड़ों में सूजन सहित इंफेक्शन, निमोनिया और हार्ट की बीमारियां का कारण बनते हैं। खांसी, अस्थमा, डाइबिटीज के मरीजों की संख्या बढ़ रही है।

"पराली जलाने पर एक किसान को जुर्माना किया गया है। हमारा प्रयास है कि जिले में पराली जलाने की घटनाएं कम से कम हों। इसके लिए किसानों को प्रबंधन के बारे प्रोत्साहित किया जा रहा है। किसानों को बताया जा रहा है कि किस तरह पराली का बेहतर तरीके से प्रबंधन किया जा सकता है। कृषि एवं किसान कल्याण विभाग की टीमें इस दिशा में विशेष रूप से काम कर रही हैं।"

डा. राकेश कुमार पोरिया, कृषि उप मंडल अधिकारी।

Edited By: Anurag Shukla

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