शरद पूर्णिमा पर बन रहा 'सर्वार्थ सिद्धि योग', पंडित जी से जानें किस समय खीर रखने से मिलेगा निरोगी काया का वरदान
शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा, जब चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर अमृत वर्षा करेगा। ...और पढ़ें

सर्वार्थ सिद्धि योग में होगा चंद्रोदय, शाम 5 बजे निकलेगा चंद्रमा (AI-Image)

समय कम है?
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जागरण संवाददाता, सोनीपत। अश्विन माह के शुक्ल पक्ष की पूर्णिमा तिथि को शरद पूर्णिमा के रूप में मनाया जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस रात चंद्रमा अपनी 16 कलाओं से युक्त होकर धरती पर अमृत वर्षा करता है।
आचार्य डॉ. मनमोहन मिश्रा के अनुसार, अश्विन शुक्ल पूर्णिमा तिथि 25 अक्टूबर को दिन में 11 बजकर 55 मिनट पर शुरू होगी और इसका समापन 26 अक्टूबर को सुबह 9 बजकर 41 मिनट पर होगा। उदयातिथि के आधार पर पूर्णिमा का स्नान और दान 26 अक्टूबर को किया जाएगा, जबकि शरद पूर्णिमा का पर्व 25 अक्टूबर को मनाया जाएगा।
शरद पूर्णिमा पर सर्वार्थ सिद्धि योग
डॉ. मनमोहन मिश्रा ने बताया कि शरद पूर्णिमा के दिन रवि योग सुबह 6:28 बजे से शाम 7:22 बजे तक रहेगा। इसके पश्चात शाम 7:22 बजे से सर्वार्थ सिद्धि योग शुरू होगा, जो अगले दिन 26 अक्टूबर की सुबह 6:29 बजे तक रहेगा। इस दिन चंद्रोदय शाम 05 बजे होगा।
उन्होंने बताया कि शरद पूर्णिमा की रात को चंद्रमा के पूर्ण रूप से चमकने और शीतलता बिखेरने पर, रात 9 बजे के बाद खीर बनाकर खुले आसमान के नीचे इस तरह रखी जाती है कि उस पर सीधी चंद्रमा की किरणें पड़ें। ऐसी मान्यता है कि चंद्रमा की किरणों से ओत-प्रोत यह खीर औषधीय गुणों से भरपूर हो जाती है और इसके सेवन से व्यक्ति निरोगी रहता है।
पौराणिक और धार्मिक महत्व
पौराणिक कथाओं के अनुसार, रावण शरद पूर्णिमा की रात चंद्रमा की किरणों को दर्पण की सहायता से अपनी नाभि पर केंद्रित करता था, जिससे उसकी नाभि में स्थित अमृत में वृद्धि होती और उसे पुनर्योवन शक्ति प्राप्त होती थी। इस रात भगवान श्रीकृष्ण ने गोपियों के साथ महारास रचा था।
मान्यता है कि इस दिन व्रत रखने से सभी मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं और विवाहित स्त्रियों को संतान की प्राप्ति होती है। इसी पावन रात्रि को समुद्र मंथन के दौरान माता लक्ष्मी प्रकट हुई थीं। मान्यता है कि इस रात मां लक्ष्मी अपने वाहन उल्लू पर सवार होकर पृथ्वी पर भ्रमण करती हैं।
शरद पूर्णिमा पर यह रहेगा शुभ मुहूर्त
- ब्रह्म मुहूर्त: प्रात: 04:46 बजे से से 05:37 बजे तक
- अभिजीत मुहूर्त: सुबह 11:42 बजे से दोपहर 12:27 बजे तक
- अमृत काल: शाम 05:05 बजे से शाम 06:36 बजे तक
- निशिता मुहूर्त: देर रात 11:40 बजे से मध्य रात्रि 12:31 बजे तक
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