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    घुटने की चोट ने छुड़वाई पहलवानी, फिर दिन-रात पढ़कर बनीं एसडीएम, पढ़िए डॉ अनमोल की प्रेरक कहानी

    By Prateek KumarEdited By:
    Updated: Thu, 08 Jul 2021 06:47 PM (IST)

    2012 मे घुटने में चोट के कारण उन्हें पहलवानी छोड़नी पड़ी। इसके बाद अनमोल ने पूरा समय पढ़ाई को दिया। 2008 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीकाम करने के बाद 2012 में एमपीईएड किया। इसके बाद उन्होंने यूजीसी नेट पास किया और चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा से शारीरिक शिक्षा में पीएचडी की।

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    एसडीएम डा. अनमोल कुश्ती में जीत चुकी हैं 14 मेडल।

    सोनीपत [नंदकिशोर भारद्वाज]। हरियाणा की छोरियां छोरों से किसी भी मामले में कमजोर नहीं हैैं। ऐसी ही एक बेटी ने पहले कुश्ती में झंडे गाड़े, जब घुटने की चोट ने रास्ता रोक लिया तो दूसरा रास्ता चुनकर सफलता का शिखर हासिल किया। ये हैं खरखौदा की एसडीएम डा. अनमोल। पढ़ाई में होशियार अनमोल को कुश्ती का शौक था। उन्होंने अखाड़े में पसीना बहाकर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 14 मेडल हासिल किए। इसी दौरान चोटिल हुईं तो पहलवानी छोड़नी पड़ी, लेकिन हार नहीं मानी। उच्च शिक्षा के बल पर दो सरकारी नौकरियां प्राप्त की, लेकिन दोनों नौकरी छोड़नी पड़ी। इसके बाद वह हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा पास कर एसडीएम बनीं। आज डा. अनमोल खरखौदा की एसडीएम बनकर 47 गांव और शहर के 15 वार्ड संभाल रही हैं।

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    राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में जीते 14 मेडल

    हिसार के गांव जाखौद खेड़ा की रहने वाली अनमोल के पिता अमर सिंह सिंचाई विभाग में डिप्टी कलेक्टर थे और माता राजबाला शारीरिक शिक्षा की अध्यापिका। एक जनवरी 1989 में जन्मी कुशाग्र बुद्धि की अनमोल का रुझान कुश्ती की ओर था। वर्ष 2003 में कुश्ती शुरू करने के बाद कई साल में जीतोड़ मेहनत के बल पर अनमोल ने राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में 14 मेडल जीते।

    घुटने में चोट के कारण छोड़नी पड़ी पहलवानी

    वर्ष 2012 मे घुटने में चोट के कारण उन्हें पहलवानी छोड़नी पड़ी। इसके बाद अनमोल ने पूरा समय पढ़ाई को दिया। 2008 कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय से बीकाम करने के बाद 2012 में एमपीईएड किया। इसके बाद उन्होंने यूजीसी नेट पास किया और चौधरी देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा से शारीरिक शिक्षा में पीएचडी की। अनमोल ने दिल्ली विश्वविद्यालय के दौलतराम कालेज में सहायक प्रोफेसर के रूप में दो वर्ष तक पढ़ाया। इस नौकरी को छोड़कर दिल्ली में ही प्रोफेसर भी बनीं। इसके बाद वर्ष 2020 में हरियाणा सिविल सेवा पास करते हुए सोनीपत के खरखौदा में बतौर एसडीएम पहली नियुक्ति हुई।

    कोरोना को मात देकर फिर जनता की सेवा में लौटीं

    इसी साल मार्च में कोरोना संक्रमण बढ़ने के बाद एसडीएम अनमोल जनता की सेवा के लिए दिन-रात फील्ड में थीं। उन्होंने अपने दो साल के बेटे और पति से भी दूरी बना ली लेकिन वह संक्रमण की चपेट में आ गईं। घर पर रहने हुए उन्होंने खुद को क्वारंटाइन कर लिया और एहतियात बरतते हुए कोरोना संक्रमण को हराकर वे जल्द ही लोगों की सेवा में लौट आईं।

    पहलवानों को शिक्षा में नरमी के खिलाफ

    डा. अनमोल पहलवानों को शिक्षा में दी जा रही नरमी के खिलाफ हैं। उन्होंने बताया कि इससे पहलवानों का भला नहीं अहित हो रहा है। इससे पहलवान शिक्षित नहीं हो पाते और सभ्य समाज के तौर-तरीकों से अनभिज्ञ ही रहते हैं। उन्होंने पहलवानों द्वारा अपराध का रास्ता चुनने के लिए भी अशिक्षा को ही जिम्मेदार बताया। उन्होंने सभी अखाड़ों के उस्तादों और प्रशिक्षकों से अपील की है कि वे पहलवानों की शिक्षा में मिल रही ढील को खत्म कर उन्हें आदर्श व्यक्ति बनाएं।

    खेल में उपलब्धियां

    03 मेडल अंतरराष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में

    08 बार अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश का प्रतिनिधित्व किया

    07 गोल्ड मेडल राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में

    02 सिल्वर और 02 ब्रांज मेडल राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं में

    ये सरकारी नौकरियां हासिल की :

    - भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र, बरेली में एओओ, लेकिन ज्वाइन नहीं किया

    - दिल्ली विवि के दौलतराम कालेज में सहायक प्रोफेसर

    - दिल्ली सरकार के जीएनसीटी के तहत प्रोफेसर

    - हरियाणा सिविल सेवा परीक्षा पास कर एसडीएम बनीं