रस्सी पर चलकर दो जून की रोटी जुटाने को मजबूर है अंजली
महताब अली,गढ़मुक्तेश्वर सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देकर देश बेटियों को सुखद जीवन जीने
महताब अली,गढ़मुक्तेश्वर
सरकार बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा देकर देश बेटियों को सुखद जीवन जीने के अवसर उपलब्ध कराने का दावा कर रही है। लेकिन राजस्थान की रहने वाली अंजली को सरकार की इस योजना का कोई लाभ नहीं मिल सका है। वह आज भी दो जून की रोटी जुटाने के लिए संघर्ष कर रहे अपने परिवार की करतब दिखा कर मिलने वाले चंद सिक्कों से मदद करने को मजबूर है। रोजी रोटी की तलाश में राजस्थान से चल कर ¨सभावली तक अपने परिवार के साथ पहुंची अंजलि अपने दो भाइयों के सहयोग से ऐसे करतब दिखाती है जिन्हें देख कर लोग दांतों तले अंगुली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। लेकिन इन बच्चों की प्रतिभा गरीबी के बोझ के नीचे दब कर रह जाती है।
राजस्थान के भरतपुर के मूल निवासी अमीचंद के दो पुत्र अंकुर व रौनक और एक पुत्री अंजली है। उसकी पत्नी बीना की एक वर्ष पूर्व लम्बी बीमारी के चलते मौत हो गई थी।बीना की मौत के बाद अमीचंद अपने दोनों पुत्रों और पुत्री को लेकर दिल्ली पहुंच गया। यहां आकर उसने अपने तीनों बच्चों को चलते-फिरते सर्कस में दिखाई जाने करतब दिखा कर उन्हें प्रशिक्षित किया। उसके बाद तीनों बच्चे दो जून की रोटी जुटाने में उसकी मदद करने लगे। वह सर्कस में दिखाए जाने वाले करतबों की तरह सड़कों पर करतब दिखा कर लोगों से आर्थिक सहायता करने की अपील करते हैं। इन करतबों को देखकर मनोरंजन करने वाले लोग जो कुछ उन्हें दे जाते हैं, उसी से वे चारों अपना पेट भरने का प्रबंध कर पाते हैं। अंजली अपने जीवन को जोखिम में डाल कर रस्से पर चलने का खतरनाक करतब दिखाती है। इन बच्चों करतबों को देख कर लोग दांतों तले उगली दबाने को मजबूर हो जाते हैं। टेलिविजन पर करोड़ों रुपये खर्च कर Þइंडियाज गॉट टेलेंट'जैसे सीरियलों में भी इस तरह के करतब दिखाने वाले बच्चों को इसलिए मौका नहीं मिल पाता कि उन्हें पेट पालने के लिए अपने हुनर का प्रदर्शन करने के अतिरिक्त जानकारी है ही नहीं। जिस देश में स्कूल जाने की अवस्था में बच्चों को दो जून की रोटी जुटाने की ¨चता करनी पड़ती है, वहां विकसित देश बनने का सपना कैसे देखा जा सकता है।
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