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    इतिहास का आइना है श्री लीलाधर दुखी संग्रहालय

    By JagranEdited By:
    Updated: Mon, 18 May 2020 06:17 AM (IST)

    महेंद्र सिंह मेहरा सिरसा संस्कृति को सबसे अधिक संरक्षित करने का काम सिरसा में हुआ ह

    इतिहास का आइना है श्री लीलाधर दुखी संग्रहालय

    महेंद्र सिंह मेहरा, सिरसा :

    संस्कृति को सबसे अधिक संरक्षित करने का काम सिरसा में हुआ है। सिरसा में बरनाला रोड स्थित बालभवन में श्री लीलाधर दुखी संग्रहालय में हड़प्पाकालीन, मुगलकालीन सहित अनेक पुरातात्विक अवशेष संग्रहित है। यह संग्रहालय हरियाणवी सभ्यता व संस्कृति का आइना है। यह हरियाणा की झलक दिखने वाला एकमात्र संग्रहालय है। परंपरागत संस्कृति को संजोकर आने वाली पीढ़ी को इस संग्रहालय से रूबरू कराना जरूरी है। इस संग्रहालय को देखने के लिए स्कूल व कॉलेजों के छात्रों की भीड़ लगी रहती है। हालांकि लॉकडाउन के चलते संग्रहालय को बंद किया हुआ है। 2001 में बनाया गया संग्रहालय

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    सिरसा में लीलाधर दुखी स्मारक सरस्वती संग्रहालय का शुभारंभ 26 अप्रैल 2001 को तत्कालीन आयुक्त उमेश नंदा व उपायुक्त अमित झा ने किया। यह संग्रहालय इतिहासवेता स्व. लीलाधर दुखी के प्रयासों से संग्रहित किया गया। पुरातत्व में अधिक रुचि उनकी थी। इसी को लेकर उन्होंने हजारों की संख्या में दुर्लभ हस्तलिखित ग्रंथ, मूल्यवान प्राचीन सिक्के, हड़प्पा कालीन मूर्तिया, फरसे, पहिये, चित्रों का संग्रह किया। उनके आवास के दो कमरों से संग्रहालय बन गया।

    इस संग्रहालय में आसपास के क्षेत्रों की खुदाई से जो पुरातात्विक अवशेष मिले, उनको एक स्थान पर एकत्रित किया गया है। इनमें अनेक अवशेष संग्रहालय में रखे गये हैं। संग्रहालय में 7वीं व 8वीं शती के सूर्य के साथ पिघल व प्रति उषा, 9वीं शती की विष्णु की मूर्ति, 8वीं शती की विष्णु की मूर्ति, 8वीं शती की कार्तिकेय की मूर्ति 2200-1700 ई. पूर्व 3 फरसे हड़प्पाकालनीन, 2200-1700 ई. पूर्व की मृणनिर्मित चूड़ियां, 9वीं शत का घटपल्लव स्तंभ, 2200 ई. पूर्व मृणनिर्मित कुल्हाड़ा सहित अनेक पुरातात्विक अवशेष हैं। प्राचीन वस्तुओं की कला भी संग्रहालय में

    संग्रहालय में मुगलकालीन आभूषण भी रखे हुए हैं। इनमें झूमके, कुंडल, चूड़ी, कुंठल, हार, कंगन व अन्य आभूषण रखे हुए हैं। इसी के साथ 7वीं व 8वीं शती का वृहद अनाजपात्र, कला के नायाब नमूने लकड़ी से बने भिक्षापात्र, हड़प्पाकालीन पाशे हैं। इस संग्रहालय में पांडुलिपि संग्रह, दादूदयाल जी की वाणी, दादूदयाल कृत माडेनो, संगीत में रामायण, संत वाणी, वैराग्य शतक की श्रीमछ्वागवत गीता व प्राचीन दुर्लभ पुस्तकें भी संग्रहित हैं। पूर्व उप प्रधानमंत्री के जीवन से जुड़ी यादें दिला रहा है संग्रहालय

    चौधरी देवीलाल विद्यापीठ सिरसा में भी पूर्व उप प्रधानमंत्री चौधरी देवीलाल के जीवन को लेकर संग्रहालय की स्थापना की जा चुकी है। जिसमें चौ. देवीलाल के संपूर्ण जीवन की विकास गाथा को दर्शाया गया है। इस संग्रहालय में उनके जीवन से जुड़ी वस्तुओं को रखा गया है। इस संग्रहालय को दूसरे प्रदेश के विद्यार्थी देखने के लिए पहुंचते हैं।

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    श्री लीलाधर दुखी संग्रहालय में भारतीय संस्कृति की झलक भी देखने को मिलती है। इस संग्रहालय में प्राचीन काल की अनेक वस्तुएं रखी गई है। इस संग्रहालय को शिक्षण संस्थानों के छात्र व अनेक लोग देखने पहुंचते हैं। कोरोना वायरस को लेकर लॉकडाउन के चलते अभी संग्रहालय बंद किया हुआ है।

    - पूनम नागपाल, इंचार्ज, जिला बाल कल्याण परिषद, सिरसा।