रोहतक, [विनीत तोमर]। सिंहपुरा गांव के युवक से प्रेम विवाह करने वाली ममता के शव को लेकर बवाल खड़ा हो गया। सिंहपुरा गांव में हुई पंचायत में पंचों ने फैसला सुनाया कि पड़ोस के गांव की बेटी उनके गांव की बहू नहीं बन सकती। गांव में शव का अंतिम संस्कार हुआ तो पूरे गांव की बेइज्जती होगी। ऐसे में यदि युवक के परिजन शव गांव में लेकर आए आैर उसका यहां अंतिम संस्‍कार किया तो उनका सामाजिक बहिष्कार किया जाएगा।

प्रेम विवाह करने वाली ममता के शव को लेकर विवाद, सिंहपुरा गांव में हुई पंचायत

तीन दिन पहले ऑनर किलिंग की शिकार हुई गद्दीखेड़ी गांव की ममता के शव को लेकर मचे बवाल के बीच अब सिंहपुरा गांव की पंचायत भी आ गई है। इस मामले को लेकर सिंहपुरा कलां गांव में पंचायत हुई। पंचायत में ग्रामीणों कहा कि ममता उनके पड़ोसी गांव गद्दीखेड़ी की बेटी है, जिसमें उनका भाईचारा है। वहीं शादी के समय ममता नाबालिग थी। उनकी शादी को कानून ने भी मान्यता नहीं दी थी। ऐसे में ममता के शव का उनके गांव में अंतिम संस्कार करने का कोई औचित्य नहीं है।

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पंचों का फैसला, पड़ोस के गांव की बेटी नहीं बन सकती हमारे गांव की बहू

पंचायत में लड़के की बिरादरी के लोगों को भी बुलाया गया था, लेकिन उन्होंने इसमें आने से मना कर दिया। इसके बाद पंचों ने फैसला सुनाया कि यदि गांव में शव लाकर उसका अंतिम संस्कार किया गया तो युवक के परिवार का बहिष्कार किया जाएगा। गांव और अठगामा का कोई भी व्यक्ति उनसे संबंध नहीं रखेगा। ग्रामीणों ने पुलिस-प्रशासन से भी मांग की है कि गांव में शव को न आने दिया जाए।

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'' गांव में आठ गांवों की पंचायत हुई है। पंचायत में सर्वसम्मति से गांव-समाज के हित को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। इस बारे में गद्दीखेड़ी गांव के सरपंच से भी बात की गई है। उनसे भी कहा गया कि सिंहपुरा कलां गांव में अंतिम संस्कार का कोई औचित्य नहीं है।

                                                                                                - प्रमोद कुमार, सरपंच, सिंहपुरा कलां।

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डीएसपी से लेकर थाना प्रभारी तक हुए जज के सामने पेश

जेएमआइसी मानसी गौड की कोर्ट में शुक्रवार को एसडीएम राकेश सैनी, डीएसपी रमेश और थाना प्रभारी इंस्पेक्टर सुनीता को बुलाया गया। इसके बाद तय किया गया कि 48 घंटे की अवधि पूरी होने के बाद ही फैसला लिया जाएगा कि शव ससुरालियों या मायके वालों में किसे दिया जाए। उधर, शव लेने के लिए शुक्रवार को ममता की भाभी और उसका ताऊ भी पहुंचे थे। वहीं ममता के ससुरालियों की तरफ से भी कोर्ट में अपील दायर की गई थी कि शव उन्हें सौंपा जाए, लेकिन कोर्ट ने उनकी अपील को खारिज कर दिया।

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जन्म देने और परवरिश करने वाले माता-पिता ने रची की हत्या की साजिश

ममता की हत्या की साजिश उसे जन्म देने वाले और पालने वाले माता-पिता ने रची थी। इस हत्याकांड को युवती के मौसेरे भाई ने साथियों के साथ मिलकर अंजाम दिया। इस दौरान करनाल के एसआइ नरेंद्र कुमार को भी उक्त लोगों ने मार डाला था। वारदात के समय युवती का पिता (फूफा) भी हमलावरों के साथ मौजूद था। आर्य नगर थाना पुलिस ने इस मामले में चारों मां-बाप को गिरफ्तार कर लिया है।  अन्य आरोपितों की तलाश की जा रही है।

बता दें कि मूलरूप से गद्दीखेड़ी गांव की रहने वाली ममता को हिसार रोड निवासी उसके फूफा रमेश ने गोद ले रखा था। पिछले साल ममता ने सिंहपुरा गांव निवासी सोमी के साथ अंतरजातीय प्रेम विवाह किया था। हालांकि नाबालिग होने के कारण अदालत ने उसे करनाल के नारी निकेतन भेज दिया था। वहीं उसके बालिग होने के फर्जी कागजात बनाने पर पति सोमी और ससुर को जेल भेज दिया था।

युवती की हत्‍या के मामले में गिरफ्तार उसकी जन्‍म देनेवाली मां और गोद लेेने वाली मां।

इसी मामले में पेशी के लिए ममता को बुधवार को करनाल पुलिस नारी निकेतन से लेकर आई थी। यहां परिजनों ने उसकी हत्या कर दी। शुक्रवार शाम को आर्य नगर थाना प्रभारी सुनीता की टीम ने ममता के असली पिता रामकेश और मां सरिता और उसे गोद लेने वाले पिता(फूफा) रमेश और मां(बुआ) कृष्णा को गिरफ्तार कर लिया। वहीं हत्याकांड में प्रयुक्त बाइक को भी बरामद कर लिया है।

25 जुलाई को देना था हत्याकांड को अंजाम

पूछताछ के दौरान आरोपितों ने बताया कि हत्याकांड का मास्टरमाइंड ममता की मौसी का लड़का मोहित उर्फ मंगलू है। इससे पहले उन्होंने 25 जुलाई को ममता की हत्या की साजिश रची थी। साजिश के तहत ममता के असली पिता रामकेश ने 25 जुलाई को रोहतक कोर्ट में आकर रेकी की थी। मगर उस दिन वह वारदात को अंजाम नहीं दे सके। वहीं बुधवार को वारदात के समय दो आरोपित बाइक पर थे, जबकि अन्य कार में थे।

युवती की हत्‍या के मामले में गिरफ्तार पिता और उसे गोद लेेने वाले फूफा।

हत्या के लिए उत्तरप्रदेश से साथियों को लेकर आया था मंगलू

आरोपितों ने बताया कि मोहित उर्फ मंगलू हत्याकांड को अंजाम देने के लिए उत्तरप्रदेश से अपने साथियों को लेकर आया था। वह सभी ममता की पेशी से एक दिन पहले ही रोहतक पहुंच गए थे। मगर मंगलू ने उन्हें अपने घर की बजाय इधर-उधर रखा था। साजिश के तहत बुधवार सुबह नौ बजे ही वे कोर्ट में पहुंच गए। पहले कोर्ट के बाहर घटना को अंजाम देना था, लेकिन पुलिस की मौजूदगी के कारण उन्हें अपना इरादा बदलना पड़ा।

हमलावरों को पता था कि सोनीपत स्टैंड के पास पहुंचने के बाद ममता और पुलिसकर्मी ऑटो में सवार होकर बस स्टैंड जा सकते हैं। इसीलिए ऑटो में बैठने से पहले ही उसे और एसआइ नरेंद्र को मार डाला। मंगलू ने अपने साथियों पर खर्च करने के लिए कुछ दिन पहले ही एक लाख रुपये उधार लिए थे।

अब लगा एससी-एसटी एक्ट, डीएसपी करेंगे जांच

करनाल के एसआइ नरेंद्र सिंह अनुसूचित जाति से ताल्लुक रखते थे। ऐसे में डीजीपी के निर्देश पर पुलिस ने आरोपितों के खिलाफ दर्ज केस में एससी-एसटी एक्ट की धारा भी जोड़ दी है। अब पूरे मामले की जांच डीएसपी रमेश कुमार करेंगे।

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Posted By: Sunil Kumar Jha