ईंट के सरकारी रेट कम, भट्ठों पर ज्यादा, अटके विकास कार्य
जागरण संवाददाता रोहतक पंचायतों के चुनाव निकट हैं लेकिन विकास कार्यों को कराने के

जागरण संवाददाता, रोहतक : पंचायतों के चुनाव निकट हैं, लेकिन विकास कार्यों को कराने के लिए ईंटों की कमी सामने आ रही है। शुक्रवार को जिला परिषद के चेयरमैन, पार्षदों और अधिकारियों की अहम बैठक हुई। चेयरमैन ने कड़ी आपत्ति जताई कि ईंटों के सरकारी रेट कम हैं। भट्ठों पर ईंट के रेट ज्यादा हैं, इस वजह से ईंटों की आपूर्ति में अड़चनें सामने आ रहीं हैं। इसी कारण पंचायतों में तमाम विकास कार्य ठप हो गए हैं। बैठक में यह भी फैसला लिया है कि ग्रामीण क्षेत्रों में खेतों के कच्चे रास्तों को पक्का किया जाएगा। दूसरी ओर, ग्रामीण क्षेत्रों में पानी की किल्लत का मामला भी उठा।
जिला परिषद के चेयरमैन सतीश भालौठ ने बताया कि सरकारी रेट के मुकाबले ईंटों के मार्केट रेट अधिक हैं। केवल एक ही भट्ठे की ईंट के रेट मंजूर होते हैं। रोहतक ब्लॉक में एक भट्ठे से ही ईंटों की आपूर्ति संभव नहीं। इसलिए परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। बैठक के दौरान पार्षदों ने आपत्ति जताई कि ग्रामीण क्षेत्रों में जमीन का लेवल एक जैसा नहीं है। इस कारण दूषित पानी की निकासी नहीं हो पाती। इस संबंध में सरकार एक पालिसी बनाए। जिससे दूषित पानी की निकासी हो सके। गांवों के गंदे नालों का पानी तालाबों में जाता है। इस कारण पशुओं के लिए पीने का पानी भी उपलब्ध होने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। पशुओं को इस कारण बीमारियां भी हो रही हैं। दूसरी ओर, सदन में मनरेगा के तहत पक्के कार्यों का मैटैरियल व लेबर की राशि समय पर नहीं मिल पाती। इस कारण भी विकास कार्यों में अड़चनें सामने आ रहीं हैं। जलघरों में ट्यूबवेल से भरा जाता है पानी, लोग हो रहे बीमार
हाउस की बैठक में पार्षदों ने तमाम पंचायतों के उदाहरण दिए कि जलघरों के टैंकों में प्रतिदिन के बजाय नहरी पानी आने पर सिर्फ एक बार पानी भरा जाता है। बाद में पानी की कमी होती है तो ट्यूबवेल से पानी की आपूर्ति शुरू कर दी जाती है। इससे लोगों को बीमारियों का सामना करना पड़ रहा है। लगातार ग्रामीण क्षेत्रों में जल संकट बढ़ता जा रहा है। पशुओं तक के लिए पीने के लिए पानी नहीं होता। सदन में मांग की गई कि आरओ के पानी की आपूर्ति का इंतजाम प्रत्येक पंचायत में किया जाए। रोडवेज की बसों का ग्रामीण रूट से संचालन बंद
चेयरमैन भालौठ ने आपत्ति दर्ज कराई कि रोडवेज की बसों का संचालन ग्रामीण रूट से पूरी तरह से बंद हो गया है। गांवों के अंदर से बसों का आवागमन नहीं होने से छात्र-छात्राओं, शहर नौकरी व दूसरे कार्यों से आने वालों को परेशानी हो रही है। स्कूल-कालेज, अस्पतालों व जरूरी कार्य के लिए आवागमन में परेशानी हो रही है। बुढ़ापा पेंशन में दो लाख रुपये की शर्त हटाने की मांग
जिला परिषद चेयरमैन के अलावा पार्षदों ने मांग रखी है कि बुढ़ापा सम्मान भत्ता पेंशन, विधवा, दिव्यांग पेंशन नई बनवाने के लिए दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। ग्रामीण दस्तावेज जमा करवाने के बाद भी इस योजना का लाभ नहीं ले पा रहे हैं। सरकार से मांग की है कि योजना की जटिलता समाप्त हो। पेंशन योजना में कठिन शर्त यह है कि इसमें बच्चों की आय दो लाख से ज्यादा है तो इसे हटाना चाहिए। यह शर्त साल 2006-2007 में पिछली सरकार में जोड़ी गई थी।
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