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    किताबें नकली, मुनाफा ज्यादा... बाजार में धड़ल्ले से बिक रहीं NCERT की नकली बुक्स; अभिभावकों को लगा रहे चूना

    By Jagran NewsEdited By: Sushil Kumar
    Updated: Fri, 11 Jul 2025 10:01 PM (IST)

    रोहतक में नया सत्र शुरू होते ही एनसीईआरटी की नकली किताबें बाजार में धड़ल्ले से बिक रही हैं। दैनिक जागरण की टीम ने पड़ताल कर इसका खुलासा किया है। 70 फीसदी तक किताबें नकली पाई गईं जिन्हें असली कीमत पर बेचा जा रहा है। लालच के चलते बुक डिपो संचालक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। एनसीईआरटी की किताबें जिले में अनिवार्य हैं।

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    नकली किताबों पर मुनाफा ज्यादा कमा रहे दुकानदार। फाइल फोटो

    प्रियंका देशवाल, रोहतक। लालच की नकली किताबें... जी हां, नया स्कूल सत्र शुरू हुआ नहीं कि नकली किताबों के जरिये लालच में आकर बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ किया जा रहा है। शहर के बाजारों में इन दिनों एनसीईआरटी की नकली किताबें खुलेआम धड़ल्ले से बिक रही हैं।

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    नकली किताबें छापने वाला गिरोह इतना शातिर है कि इन्हें पहले से पता होता है कि इस बार प्रिंटिंग लेट होगी तो ये महीनाभर पहले ही नकली किताबों को बाजार में उतार देते हैं। रोहतक में इसे लेकर दैनिक जागरण की टीम ने खुद जाकर बाजार में कई अलग- अलग दुकानों से अलग विषयों की किताबें खरीदी तो इसका पर्दाफाश भी हो गया।

    दैनिक जागरण की टीम ने छह दिन तक लगातार रोहतक शहर के बड़ा बाजार, पुराना बाजार, भिवानी स्टैंड व माल गोदाम रोड सहित कई जगहों पर एनसीईआरटी की डुप्लीकेट किताबों की पड़ताल की और इन्हें खरीदा भी।

    एक्सपर्ट से जांच करवाने पर पाया कि इन किताबों में 70 फीसदी तक नकली किताबें बेची जा रही है। खास यह है कि नकली किताबें भी पूरी कीमत पर मुनाफे के साथ बेची गई हैं। अभिभावकों को निकली किताबों के लिए भी असली के बराबर की कीमत चुकानी पड़ रही है।

    ये है लालच का गणित

    नाम न छापने की शर्त पर शहर के एक बुक डिस्ट्रीब्यूटर बताते हैं कि एक असली किताब पर 10 रुपये बचत होती है। वहीं नकली किताब पर 30 रुपये का मुनाफा होता है। इसी मुनाफे के चक्कर में बुक डिपो संचालक बच्चों के भविष्य से खिलवाड़ कर रहे हैं। जिले में 5 से 12वीं तक के सभी विद्यार्थियों के लिए एनसीईआरटी की किताबें अनिवार्य हैं।

    यूं सामने आई नकली किताबों की असली सच्चाई

    केस एक

    रोहतक शहर के बड़े बाजार में एक बुक डिपो से कक्षा 11वीं की हिंदी की एनसीईआरटी किताब खरीदी। यह किताब नकली है। इसके बाद टीम ने नजदीक के एक और बुक डिपो पर जाकर 11वीं कक्षा की ही एनसीईआरटी की किताब खरीदी, लेकिन यह असली मिली।

    दोनों की क्वालिटी में काफी अंतर है। नकली किताब का कागज हल्का व प्रिंट धुंधला मिला। डिपो संचालक से पूछा तो बड़ी बेबाकी से नकली को ही असली बताने का दावा किया।

    दो दिन बाद रोहतक के भिवानी स्टैंड से कक्षा 11वीं की हिंदी की वितान पुस्तक खरीदी। यह नकली मिली। दुकानदार से बिल मांगा तो मना कर दिया। बोले- ले गए तो बदलेंगे भी नहीं। दोनाें के वजन में भी अंतर है। असली किताब का वजन 130 ग्राम है, जबकि नकली किताब का वजन 94 ग्राम है।

    चार दिन बाद शहर के बड़े बाजार से कक्षा 11वीं की फिजिक्स की किताब खरीदी गई। जब इस किताब के पन्नों को चेक किया तो किसी भी पन्ने पर एनसीईआरटी का वाटर मार्क नहीं मिला। ना ही प्रिंटिंग सही और ना कागज। दुकानदार ने इन्हें वापिस ना लेने की भी ताकीद कर दी।

    एनसीईआरटी की सभी किताबों पर वाटरमार्क होता है। किताब के किसी भी 8 पन्नों में से एक पर यह वाटरमार्क जरूर दिखाई देता है। अगर कोई भी ध्यान से देखेगा तो उसको यह मिल जाएगा।

    अगर बिना वाटर मार्क की किताब को कोई दुकानदार बेच रहा है तो उसकी तुरंत शिकायत करें, उस पर कार्रवाई की जाएगी। एनसीईआरटी की किताबों की प्रिंटिंग में कागज अच्छी क्वालिटी का प्रयोग किया जाता है।

    - प्रो. एमवी श्रीनिवासन, हेड प्रकाशन विभाग, एनसीईआरटी।