डॉ. अंबेडकर ने रहन-सहन व शाकाहारी होने पर बल दिया
जागरण संवाददाता, रोहतक : डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्माण दिवस पर पं. नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद
जागरण संवाददाता, रोहतक :
डॉ. भीमराव अंबेडकर के परिनिर्माण दिवस पर पं. नेकीराम शर्मा राजकीय महाविद्यालय में मंगलवार को विचार गोष्ठी का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता राजीनति शास्त्र के प्रोफेसर रण¨सह ने की व गोष्ठी का संचालन डॉ. कपिल कौशिक ने किया। गोष्ठी की शुरुआत करते हुए महर्षि दयानंद विश्वविद्यालय के भूगोल विभाग में कार्यरत प्रोफेसर रेनू आर्या ने कहा कि डॉ. भीमराव एक शिक्षाविद् अर्थशास्त्री के साथ-साथ एक अच्छे फिलोस्पर रहे।
उन्होंने वर्ण व्यवस्था पर कार्य किया और जो वंचित लोग थे उनका अधिकार दिलवाने में अहम भूमिका निभाई। लोक प्रशासन की प्रोफेसर डॉ. अंजना गर्ग ने कहा कि डॉ. भीमराव ने विभिन्न देशों में घुमकर संविधान के महत्वपूर्ण तथ्यों को जुटाकर भारतीय संविधान का निर्माण किया। आजादी के इतने वर्षों बाद भी जहां हम स्वच्छता, बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओं की बात करते हैं ये विभिन्न सामाजिक मुद्दें उनके जहन में वर्षों पहले थे। उन्होंने मानव के सही रहन-सहन व शाकाहारी होने पर बल दिया। डॉ. रेनू राणा ने कहा आज के आधुनिक परिवेश में भी समाज में मानसिक व शारीरिक भेदभाव मौजूद है जिस पर हमें मिलकर काम करना होगा, यही डॉ. भीमराव को सच्ची श्रद्धांजलि होगी।
अंबेडकर के व्यक्तित्व को समझने की जरूरत
गोष्ठी के आयोजक व कॉलेज प्राचार्य डॉ. वेदप्रकाश श्योराण ने कहा कि हमें डॉ. अंबेडकर के व्यक्तित्व को सोचने व समझने की जरूरत है क्योंकि उनकी दूरदर्शी सोच ने ही समाज को एक दिशा देने का कार्य किया। अंबेडकर संघर्ष की एक प्रेरणा मूर्ति हैं, जिनकी ख्याति को बड़े-बड़े विद्वानों ने भी माना है। आज के युवा वर्ग के लिए डॉ. अंबेडकर से बड़ा प्रेरक कोई नहीं हो सकता। अपने मां-बाप की चौदहवीं संतान में से ये एक मात्र थे जो दस पास कर सके। 32 डिग्री तथा 64 विषयों के विशेषज्ञ रहते हुए उन्होंने हर क्षेत्र में अपना योगदान दिया।
हर वर्ग के लिए किया काम
गोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए प्रोफेसर रण¨सह ने कहा कि डॉ. भीमराव हर वर्ग के लिए पैदा हुए और अपनी अंतिम सांस तक उनके लिए संघर्ष किया। उन्होंने अपने जीवन में विभिन्न बाधाओं को झेलते हुए एक अग्रणी स्थान हासिल किया। उन्होंने संविधान निर्माण के जरिए देश को एक सूत्र में पिरोया। समाज में महिला उत्थान के लिए पिता की संपत्ति में अधिकार, विधवा विवाह व बच्चा गोद लेने का अधिकार दिया।
मानसिकता बदने की जरूरत
गोष्ठी का संचालन करते हुए डॉ. कपिल कौशिक ने कहा कि आज हमें अपनी मानसिकता बदलने की जरूरत है। डॉ. भीमराव के विचारों पर अमल करते हुए आपसी भाईचारे व सामाजिक समानता अपनाने की आवश्यकता है। आज के इस जागरूकता एवं आधुनिकता के युग में भी समाज में जाति तौर पर और उच्च एवं निम्न वर्ग में असमानताएं हैं जिनको हमें मिलकर दूर करना होगा, ऐसा तभी संभव है जब हम सभी अपनी मानसिकता को बदलें।
आज भी समाज में काम करने की जरूरत
कंप्यूटर साइंस विभागाध्यक्ष डॉ. सूरज प्रकाश यादव ने बताया कि डॉ. अंबेडकर ने सभी वर्गों के लिए कार्य करते हुए संविधान निर्माण में अहम भूमिका निभाई और एक उच्च कोटि का संविधान देश को दिया, लेकिन आज भी समाज में वर्ण को लेकर ¨खचातान व भेदभाव मौजूद है, जिस पर हमें कार्य करना होगा।
आपस में बंट रहा है समाज
मदवि के प्रोफेसर सत्यवान बरोदा के अनुसार जिस जातिवाद को खत्म करने का प्रयास बाबा साहेब ने शुरू किया था आज उसी के आधार पर समाज बंट रहा है व वर्गों के अंदर लड़ाई जारी है। जबकि उनके अनुसार मिलकर चलने की जरूरत है।
भारत को विखंडित होने से बचाया
डॉ. आरके वर्मा ने कहा कि डॉ. भीमराव ने खंडित समाज को एकजुट करने व उच्च वर्ग तथा निम्न वर्ग को एक करने का कार्य किया। उन्होंने भारत को विखंडित होने से बचाया। उन्होंने कहा कि आज हमें संविधान के प्रति जागरूक होने की आवश्यकता है व स्कूल और कॉलेजों में संविधान को विषय में सम्मलित करने पर बल दिया।
सामाजिक असमानता को मिटाना होगा
डॉ. राज¨सह नांदल ने कहा कि डॉ. भीमराव एक इतिहास पुरूष थे। उन्होंने कहा कि आज संविधान को जानना सभी का मौलिक अधिकार है। इसके साथ ही उन्होंने संविधान को सरल भाषा में प्रकाशित करने की अपिल की ताकि वह आम जनमानस तक पहुंच सके। उन्होंने सामाजिक असमानता पर ¨चता व्यक्त करते हुए कहा कि हमें इसे जड़ से मिटाना चाहिए। इस गोष्ठी में नरेश ढल व देवेंद्र कौर आदि ने भी अपने विचार व्यक्त किए।
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