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    पेड़ के बड़े खोल या पुरानी इमारत में घोंसला बनाता है नक्टा

    By JagranEdited By:
    Updated: Sun, 01 Jul 2018 06:00 PM (IST)

    यह एक बड़े आकार की बतख होती है, जिसे ज्यादातर हिस्सों में नक्टा के नाम से जाना जाता है। भारत में यह एक स्थानीय पक्षी है, जो मौसम अनुसार स्थानीय प्रवास भी करता है। इस पक्षी का नाम नक्टा इसकी चोंच के ऊपर गांठ जैसे उभार के कारण पड़ा है। इसके शरीर का ऊपरी हिस्सा काले रंग का होता है, जिसमें नीली व हरी चमक दिखाई देती है। इसकी गर्दन व शरीर के नीचे का हिस्सा सफेद रंग का होता है।

    पेड़ के बड़े खोल या पुरानी इमारत में घोंसला बनाता है नक्टा

    प¨रदों की दुनिया: कॉम्ब डक (नक्टा)

    परिवार: एनाटीडी

    जाति: सार्किडियोर्निस

    प्रजाति: सिल्वीकोला

    लेख संकलन: सुंदर सांभरिया, ईडेन गार्डन रेवाड़ी। यह एक बड़े आकार की बतख होती है, जिसे ज्यादातर हिस्सों में नक्टा के नाम से जाना जाता है। भारत में यह एक स्थानीय पक्षी है, जो मौसम अनुसार स्थानीय प्रवास भी करता है। इस पक्षी का नाम नक्टा इसकी चोंच के ऊपर गांठ जैसे उभार के कारण पड़ा है। इसके शरीर का ऊपरी हिस्सा काले रंग का होता है, जिसमें नीली व हरी चमक दिखाई देती है। इसकी गर्दन व शरीर के नीचे का हिस्सा सफेद रंग का होता है। इसकी गर्दन व सिर पर काले रंग के धब्बे होते हैं। नर पक्षी की चोंच के ऊपरी हिस्से पर गांठ जैसा उभार होता है। यह उभार प्रजनन के समय में ज्यादा बड़ा हो जाता है। मादा पक्षी की चोंच पर ऐसा उभार नहीं होता। मादा पक्षी आकार में नर से छोटी होती है। इसकी आंख की पुतली भूरी व चोंच काले रंग की होती है। बतख की यह प्रजाति काफी शक्ति से उड़ान भरती है। उड़ान के दौरान नर पक्षी आगे उड़ता है। समूह में रहता है यह पक्षी

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    ये पक्षी पानी वाली ऐसी जगह पर रहते हैं, जहां पर जलीय वनस्पति के साथ-साथ आसपास पेड़ भी हों। झील, पानी के टैंक व जोहड़ों में ये एक जोड़ें या एक छोटे पारिवारिक समूह में दिखते हैं। ये पक्षी मुख्यत जंगली वनस्पति के बीज, धान के खेतों में चावल व जलीय वनस्पति की जड़े खाते है। इसके साथ-साथ ये जलीय कीट को भी खाते हैं। इस पक्षी के प्रजनन का समय जून से सितंबर तक होता है। एक आवाज पर चूजे छोड़ देते है घोंसले

    ये पक्षी घोंसला पेड़ों में बनाते है। घोंसला आमतौर पर पेड़ के बड़े खोल या एक बड़ी टहनी जहां पर कई टहनियां मिलती है, उस जगह तिनकों से बनाते है। घोंसले के ऊपरी हिस्से में घास का का प्रयोग भी करते है। पेड़ के साथ-साथ ये पुरानी खंडहर पड़ी इमारतों की दरारों, पानी के किनारे उगी बड़ी घास जैसे रीडस आदि में छुप कर जमीन पर भी घोंसला बनाते हैं। कभी-कभी ये बड़े पक्षियों के बेकार पड़े पुराने घोंसले का भी प्रयोग कर लेते हैं। मादा पक्षी औसतन 7 से 12 अंडे देती है। मादा अकेली ही अंडों को सेती है। आमतौर पर यह बतख शांत रहते है, लेकिन घोंसले की रक्षा के लिए ये तेज आवाज निकाल कर शिकारी जीव को भगा देते है। अंडे से निकलने के एक या दो दिन में मादा पक्षी जब आवाज देती है तो चूजे घोंसले से नीचे जमीन पर कूद जाते हैं। इस पक्षी की संख्या धीरे-धीरे कम हो रही है, जिसका मुख्य कारण हैबीटॉट का सिकुड़ना, अवैध शिकार व कुछ देशों में धान के उत्पादक भी इसे हानि पहुंचाते है।