जागरण संवाददाता, रेवाड़ी : प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्व. राव बिरेंद्र ¨सह को आज भी अदब के साथ याद किया जाता है। भले आज के रानजीतिक परिवेश में काफी बदलाव आया हो लेकिन अहीरवाल में एक समय ऐसा था, जब यहां की राजनीति पूर्व मुख्यमंत्री स्व. राव बिरेंद्र ¨सह के इशारे पर चलती थी। अहीरवाल नाम को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान देने वाले पूर्व मुख्यमंत्री राव बिरेंद्र का आवास रामपुरा हाउस वर्षों तक अहीरवाल की राजनीति का केंद्र रहा। राव बिरेंद्र ¨सह की शनिवार को पुण्यतिथि है। राव बिरेन्द्र ¨सह का निधन 30 सितंबर 2009 को गुरुग्राम में हुआ था। निधन से कई वर्ष पहले ही वे सक्रिय राजनीति से दूर हो गये थे, लेकिन अहम मुद्दों पर उनकी टिप्पणी राजनीति में गर्मी पैदा करती रही। उनकी पुण्यतिथि पर 30 सितंबर को रामपुरा सहित अन्य स्थानों पर कार्यक्रम आयोजित होंगे।

1952 में लड़ा था पहला चुनाव

20 फरवरी 1921 को जन्मे राव बिरेंद्र ¨सह ने दिल्ली के सेंट स्टीफन कालेज से स्नातक की उपाधि हासिल की। इसके बाद वे सेना में कैप्टन बने गये, परंतु कुछ समय बाद इस्तीफा देकर वे सक्रिय राजनीति में आ गये। वर्ष 1952 में पहली बार विस चुनाव लड़ा। पहले चुनाव में उन्हें सफलता नहीं मिली, लेकिन बाद में उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा। वर्ष 1954 में राव मात्र 30 वर्ष की उम्र में ही संयुक्त पंजाब के एमएलसी बने। सरदार प्रताप ¨सह कैंरों मंत्रिमंडल में उन्हें परिवहन व राजस्व मंत्री का जिम्मा दिया गया, परंतु कैरों से पटरी अधिक समय तक नहीं बैठी। हरियाणा गठन के बाद वर्ष 1967 में हुए पहले आम चुनावों में राव बिरेंद्र अपनी ही विशाल हरियाणा पार्टी से पटौदी से चुनाव जीतकर विधायक बने। उन्हें प्रदेश का प्रथम निर्वाचित विधानसभा अध्यक्ष बनने का गौरव मिला। 24 मार्च 1967 को राव संयुक्त विधायक दल के बल पर प्रदेश के दूसरे मुख्यमंत्री बने। वर्ष 1971 में राव ने विशाल हरियाणा पार्टी से महेंद्रगढ़ लोस का चुनाव जीता। वर्ष 1977 में अटेली से विधायक बने। आपातकाल के बाद इंदिरा गांधी के आग्रह पर राव ने अपनी पार्टी का कांग्रेस में विलय किया। वर्ष 1980 में केंद्र में कांग्रेस सरकार बनने पर इंदिरा गांधी ने राव को कृषि, ¨सचाई, ग्रामीण विकास, खाद्य एवं आपूर्ति जैसे महत्वपूर्ण विभागों का जिम्मा सौंपा।

Posted By: Jagran

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