रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। अंतिम हिंदू सम्राट के नाम से चर्चित हुए हेमू अब इतिहास के पन्नों में छुपे हुए नहीं रहेंगे। इस बार अक्टूबर में सम्राट हेमू के राज्याभिषेक दिवस के उपलक्ष्य में दिल्ली के पुराना किला से लेकर अलवर जिले के माचेड़ी तक भव्य आयोजन होंगे। रेवाड़ी में भी सम्राट को याद किया जाएगा, क्योंकि युवा हेमू रेवाड़ी की कर्मभूमि से ही सैन्य कौशल में पारंगत होकर सम्राट बन पाए थे।

सात अक्टूबर को उनका राज्याभिषेक दिवस इस बार खास होगा। उस दिन दिल्ली के पुराने किले में विशेष आयोजन की तैयारी शुरू हो चुकी है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ व विश्व हिंदू परिषद सहित कई हिंदूवादी संगठन आयोजन में शिरकत करेंगे। इसके अलावा अक्टूबर में ही अलवर जिले के माचेड़ी गांव में पहली बार हेमचंद्र विक्रमादित्य की स्मृति में आयोजन किया जाएगा।

दशहरा के दिन हेमू का जन्म

माना जाता है कि अरावली श्रंखला से घिरे माचेड़ी गांव में ही एक अक्टूबर को दशहरा के दिन हेमू का जन्म हुआ था। हालांकि हेमू की जाति को लेकर विरोधाभास भी है, लेकिन उनकी वीरता को लेकर किसी को कोई संदेह नहीं है। वैसे डॉ. इंदु राव सहित अधिकांश शोधार्थियों का यह स्पष्ट मत है कि हेमू ब्राह्मण थे। उनके पिता पूरनदास राजपुरोहित थे। उनकी जागीरदारी माचेड़ी से नारनौल तक फैली हुई थी।

रेवाड़ी में भी होगे कार्यक्रम

सम्राट हेमू की स्मृति में रेवाड़ी में भी कार्यक्रम होंगे। हेमू कम उम्र में ही माचेड़ी से रेवाड़ी आ गए थे। इसके बाद ही शक्ति प्राप्त करके उन्होंने लगातार 22 लड़ाइयां जीतकर सम्राट का ओहदा हासिल किया। हालांकि उनका कार्यकाल लंबा नहीं रहा, लेकिन कम समय में ही उन्होंने भारत की सनातन संस्कृति की रक्षा के लिए बड़े काम किए थे।

राज्याभिषेक दिवस की पूर्व संध्या पर भव्य आयोजन

इंदिरा गांधी विश्वविद्यालय में उनके नाम पर पीठ स्थापित है। इस बार आइजीयू की ओर से भी अक्टूबर में सेमीनार के आयोजन की तैयारी है। हेमचंद्र विक्रमादित्य फाउंडेशन के सौजन्य से 6 अक्टूबर को सुधीर भार्गव व उनके साथी रेवाड़ी में भी राज्याभिषेक दिवस की पूर्व संध्या पर भव्य आयोजन करेंगे।

विश्व हिंदू परिषद के प्रांतीय अध्यक्ष रमेश चंद गुप्ता का कहना है कि हेमू की वीरता इतिहास के पन्नो में दर्ज है। उसे व्यापक दायरे में पढ़ाया भी नहीं गया। उनका दिल्ली के जिस पुराने किले में राज्याभिषेक हुआ था वहां लंबे समय से आयोजन हो रहे हैं। इस बार थोड़ा व्यापक कार्यक्रम है। मैं सभी से अपील करूंगा कि भारत मां के गौरव व हिंदू हृदय सम्राट की स्मृति को चिरस्थायी बनाने के लिए उनके राज्याभिषेक दिवस पर होने वाले कार्यक्रमो में बढ़चढ़ कर भाग लें।

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Posted By: Amit Mishra

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