Laxman Singh Yadav MLA Kosli : लक्ष्मण रेखा कभी नहीं लांघेंगे हरियाणा के लक्ष्मण
Laxman Singh Yadav MLA Kosli पिछले दिनों विधायक चिरंजीव राव ने जब राव इंद्रजीत पर निशाना साधा तो लक्ष्मण यादव को छोड़कर अधिकांश राव समर्थकों ने चिरंजीव पर शब्दबाण चलाने में देर नहीं की। इसको भी राजनीति से जोड़ा जा रहा है।

रेवाड़ी [महेश कुमार वैद्य]। 'लक्ष्मण रेखा कभी नहीं लांघेंगे 'लक्ष्मण' यह रामचरित मानस का प्रसंग नहीं है। यह लाड़-प्यार से राम के भाई कहलाने वाले कोसली के विधायक लक्ष्मण यादव की बात है। अपने क्षेत्र की पैरवी में लक्ष्मण कमी नहीं छोड़ रहे, मगर विरोधी उनकी टांग खिंचाई कुछ ज्यादा ही कर रहे हैं। पिछले दिनों कांग्रेस विधायक चिरंजीव राव ने जब राव इंद्रजीत पर निशाना साधा तो लक्ष्मण यादव को छोड़कर अधिकांश राव समर्थकों ने चिरंजीव पर शब्दबाण चलाने में देर नहीं की। लक्ष्मण के क्षणिक मौन में कोई राजनीति नहीं थी, मगर विरोधियों ने उड़ाना शुरू कर दिया कि मंत्री बनने के लिए लक्ष्मण अब राव इंद्रजीत सिंह की वफादारी छोड़कर केवल भाजपा के समर्पित सिपाही दिखना चाहते हैं। अब खबरची तो पीछे लगने ही थे। दो दिन बाद ही लक्ष्मण ने चिरंजीव पर शब्दबाण छोड़ दिया। खबरची की मानें तो लक्ष्मण भाई अभी लक्ष्मण रेखा नहीं लांघेंगे। उन्हें पता है जो चंडीगढ़ पहुंचा सकते हैं वह राजनीतिक जमीन हिला भी सकते हैं।
सीरियसली नहीं लेते बड़े खिलाड़ी
जूनियर शर्मा जी आजकल अपने पिता सीनियर शर्मा जी वाला रुतबा हासिल करने की जुगत में लगे हुए हैं, मगर फिलहाल फासला इतना ज्यादा है कि इंतजार के अलावा कोई उपाय नहीं है। बात महेंद्रगढ़ जिला भाजपा अध्यक्ष राकेश शर्मा की है। एक समय हरियाणा भाजपा में उनके पिता कैलाश शर्मा की तूती बोलती थी। पिता स्वर्गीय हुए तो राकेश के सितारे भी गर्दिश में आ गए थे, मगर धनखड़ की टीम बनी तो नए समीकरणों
में राकेश की चेत गई। अब महेंद्रगढ़ टीम भाजपा में अक्सर यह सवाल पूछा जाता है कि जूनियर शर्मा जी का रुझान किस विधायक या खेमे की ओर है। चर्चा में जवाब भी निकल आता है। अभी ना काहू से दोस्ती ना काहू से बैर वाली स्थिति है, मगर समस्या यह है कि जूनियर शर्मा जी को महेंद्रगढ़ जिले के बड़े खिलाड़ी सीरियस ही नहीं ले रहे। जूनियर शर्मा जी के लिए यही चुनौती है।
चर्चा में इंसाफ मंच
केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह अहीरवाल की राजनीति के केंद्र में बने ही रहते हैं। इन दिनों उनका इंसाफ मंच चर्चा में है। एक दशक पहले राव ने कांग्रेस को आंख दिखाने के लिए बेटी आरती राव की अगुवाई में मंच बनाया था, मगर भाजपाई बनने के बाद राव ने मंच को गैर राजनीतिक करार देते हुए टीम आरती को सेवा क्षेत्र में जुटा दिया। अब पिछले दिनों राव ने कोरोना के खतरे को देखते हुए जैसे ही कोसली के लिए इंसाफ मंच की ओर से एंबुलेंस देने की घोषणा की, वैसे ही राजनीतिक चर्चाएं उफान पर आ गई। लोगों ने कहना शुरू कर दिया कि आरती का नया ठिकाना कोसली होगा। कुछ लोगों ने तो कोसली के विधायक लक्ष्मण के शुभचिंतकों को नया ठिकाना तलाशने की सलाह भी दे डाली। पता नहीं लोगों को राव और इंसाफ मंच के तालमेल में लक्ष्मण का घालमेल क्यों दिख रहा है।
हुड्डा की बुराई नहीं करते कैप्टन
आजकल माडल टाउन वाले फौजी नेता कैप्टन अजय सिंह यादव बदले-बदले नजर आते हैं। कुछ समय पहले पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा उनके निशाने पर रहते थे, मगर आजकल उन्होंने हुड्डा को लेकर मौन साधा हुआ है। उन्होंने रेवाड़ी को अपने विधायक बेटे चिरंजीव राव के हवाले कर खुद का दायरा बढ़ाना शुरू कर दिया है। कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी विवेक बंसल से भी निकटता बढ़ा रहे हैं। दो दिन पहले बंसल से मां शांतिदेवी की प्रतिमा का अनावरण करवाया। लालू प्रसाद के समधी होने का उन्हें फायदा मिल रहा है। सोनिया के दरबार में उनकी पहुंच पहले से मजबूत हुई है। कैप्टन की निगाह खुद तो गुरुग्राम लोकसभा पर है ही, मगर उनका इरादा कुछ वफादार शुभचिंतकों को विधानसभा के मैदान के लिए तैयार करने का भी है। अपनी मंशा पूरी करने के लिए कैप्टन का पूरा जोर पार्टी में कद व स्वीकार्यता बढ़ाने पर है।
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