बंसीलाल ने 1999 में बनाया था लोकपाल कानून
रेवाड़ी, जागरण संवाद केंद्र : काग्रेस के प्रदेश प्रवक्ता वेद प्रकाश विद्रोही ने कहा कि चौ. बंसीलाल ने अपने शासनकाल में वर्ष 1999 में ही हरियाणा लोकपाल कानून बनाकर इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस समय कार्यरत जज श्री आईपी वशिष्ठ को हरियाणा का पहला लोकपाल बनाया था। उस समय लोकपाल को सू-मोटिव लेकर किसी भी मंत्री व अधिकारी की भ्रष्टाचार की जांच करने का अधिकार था, लेकिन अन्ना हजारे को पत्र लिखकर उनके आदोलन का समर्थन करने वाले विपक्ष के नेता ओमप्रकाश चौटाला ने ही अपने कार्यकाल में लोकपाल को लोकायुक्त का दर्जा देकर उनके अधिकारों में कटौती की थी।
बुधवार को यहा जारी बयान में विद्रोही ने कहा कि उस समय भ्रष्टाचार की जांच के लिए हरियाणा के लोकपाल को किसी की भी अनुमति लेने की आवश्यकता नहीं थी, लेकिन चौटाला सरकार ने हरियाणा लोकपाल बिल में परिवर्तन करके अधिकार देने की बजाय हरियाणा लोकायुक्त एक्ट बनाकर चौधरी बंसीलाल के शासन में लोकपाल को दिए गए अधिकारों में कटौती कर दी। लोकपाल के सू-मोटिव के अधिकारों से मंत्री व अधिकारी की बिना किसी की अनुमति से भ्रष्टाचार की जांच करने का अधिकार छीन लिया गया। चौटाला द्वारा 2002 में बनाए गए हरियाणा लोकायुक्त एक्ट के अनुसार लोकायुक्त को अपने आप में किसी भी मंत्री व अधिकारी के खिलाफ जांच करने का अधिकार नही है। मंत्री व अधिकारी के खिलाफ भ्रष्टाचार की शिकायत की जांच लोकायुक्त कानून के अनुसार मुख्यमंत्री की अनुमति से व मुख्यमंत्री के खिलाफ कोई जांच राज्यपाल की अनुमति से ही हो सकती है। यह कानून 6 जनवरी 2003 में लागू होने के बाद भी चौटाला ने मार्च 2005 तक अपने मुख्यमंत्री काल में कोई लोकायुक्त हरियाणा में नियुक्त नहीं किया, जबकि मार्च 2005 में सत्ता मिलने के बाद हुड्डा सरकार ने जस्टिस एनके सूद को लोकायुक्त बनाया। उन्होने कहा कि इस तरह के तथ्य सामने होने के बावजूद विपक्ष के नेता का गांधीवादी नेता अन्ना हजारे को पत्र लिखकर जन लोकपाल बिल के प्रति अपना समर्थन जताना हास्यास्पद है।
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