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    पथ संचलन में दिखा राष्ट्रभक्ति का जज्बा

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    Updated: Sun, 16 Oct 2016 07:41 PM (IST)

    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से रविवार को पथ संचलन किया गया। स्वयं सेवक

    जागरण संवाददाता, रेवाड़ी राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ की ओर से रविवार को पथ संचलन किया गया। स्वयं सेवक पहले ¨हदू वरिष्ठ माध्यमिक विद्यालय में एकत्रित हुए, जहां आरएसएस के प्रांत प्रचार प्रमुख अनिल ने बतौर मुख्य वक्ता संबोधित कर रहे थे।

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    कार्यक्रम की अध्यक्षता वैश्य समाज के जिला प्रधान ब्रजलाल गोयल ने की।

    सेवानिवृत्त कानूनगो रमेश सोनी विशिष्ट अतिथि के तौर पर मौजूद रहे। पथ संचलन में शामिल स्वयं सेवकों का अनुशासन देखते ही बनता था। पथ संचलन में अनुशासन के साथ राष्ट्रभक्ति का जज्बा भी दिखाई दिया। प्रांत प्रचार प्रमुख अनिल ने कहा कि संघ का गणवेश (चित्र) अवश्य बदला गया है, परंतु चरित्र नहीं। उन्होंने कहा कि आरएसएस की स्थापना 1925 में विजयदशमीं के दिन हुई थी। आज हम संघ स्थापना के 92वें वर्ष में प्रवेश कर रहे हैं। स्थापना दिवस के अवसर पर शस्त्र पूजन से लेकर पथ संचलन जैसे कार्यक्रम किए जाते रहे हैं। इस बार का कार्यक्रम कुछ अलग है। स्वयं सेवक परिवर्तित स्वरूप में है। निक्कर के स्थान पर पैंट आ गई है। जुराब का रंग भी बदला गया है तथा जूते भी चमड़े के स्थान पर कपड़े के आ गए हैं। यहां मौजूद सभी स्वयं सेवकों का सौभाग्य ही है कि हम परिवर्तन की इस बेला के साक्षी बने हैं। उन्होंने कहा कि बाहरी अलंकारों में परिवर्तन पहले भी आए थे और आज भी आए हैं, लेकिन स्वयं सेवक की भूमिका कभी नहीं बदलेगी। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के संस्थापक डा. केशव बलिराम हेडगेवार ने कहा था कि मैं और मेरा राष्ट्र एक ही हैं। राष्ट्र के प्रति हमारे समर्पण भाव कभी नहीं बदलने चाहिए। उन्होंने कहा कि संघ की कोई तस्वीर नहीं है। संघ का मतलब स्वयं सेवकों से हैं। स्वयं सेवकों से मिलकर ही संघ बनता है।

    देशभर में 55 हजार से अधिक शाखाएं

    प्रांत प्रचार प्रमुख ने कहा कि संघ के स्वरूप में परिवर्तन अलग तरह से हो रहा है। आज देशभर में आरएसएस की 55 हजार शाखाएं चल रही है। इतना ही नहीं 75 हजार से अधिक स्थानों पर हमारी गतिविधियां होती है। हमारी पत्रिकाएं विचारों के रूप में देश के ढाई लाख गांवों में पहुंच रही है। अकेले हरियाणा में हमारी 1700 शाखाएं चल रही है। कोई भी ¨हदू पतित नहीं होता ऐसा विचार राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने ही दिया।

    ब्रजलाल गोयल ने कहा कि आरएसएस की राष्ट्रभक्ति पर प्रश्नचिन्ह नहीं लगाया जा सकता। जरूरत के समय स्वयं सेवकों ने शत प्रतिशत समर्पण भाव से योगदान दिया है। विशिष्ट अतिथि रमेश सोनी ने कहा कि देशभक्ति की भावना ही सबसे उत्तम भावना है। राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ ने इस भावना को कभी नहीं छोड़ा। जिला संघ चालक अजय मित्तल ने कहा कि पथ संचलन का अर्थ है कदम से कदम मिलाना। इस अवसर पर सहजिला संघ चालक सुंदर, सह जिला कार्यवाह सुभाष व जिला प्रचारक संजय मुख्य तौर पर मौजूद रहे। कार्यक्रम में जन स्वास्थ्य राज्यमंत्री डा. बनवारी लाल भी बतौर स्वयं सेवक मौजूद थे।

    बाजारों में हुई पुष्प वर्षा

    ¨हदू स्कूल से पथ संचलन की शुरुआत हुई तथा इसके पश्चात अग्रसेन चौक होते हुए मुख्य बाजारों में स्वयं सेवक निकले। स्वयं सेवकों पर बाजार में कई स्थानों पर पुष्प वर्षा भी की गई।