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    अंबाला के माता वैष्णो देवी मंदिर में होती है मन से पूजा करने वालों की मनोकामनाएं पूरी, इतिहास जानकर हो जाएंगे हैरान

    By JagranEdited By: Naveen Dalal
    Updated: Tue, 27 Sep 2022 03:36 PM (IST)

    अंबाला में 26 जनवरी 2014 को माता वैष्णो मंदिर की स्थापना हुई। मंदिर की स्थापना करने में मंदिर कमेटी का बड़ा योगदान रहा है। जिसके कारण मंदिर की चर्चा पूरे शहर में रहती है। यहां हर रविवार को भंडारा लगाया जाता है। जिसकी इच्छा पूरी होती है

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    अंबाला का माता वैष्णो देवी मंदिर बना आस्था का केंद्र।

    अंबाला, जागरण संवाददाता। अंबाला शहर के सेक्टर दस स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर आस्था का केंद्र बना हुआ है। मंदिर ज्यादा पुराना नहीं, लेकिन सभी सेक्टर वासी इस मंदिर में दर्शन करने जरूर पहुंचते हैं। यहां पर माता वैष्णो देवी की तरह गुफा भी बनाई हुई है। दूसरी ओर मंदिर में सभी देवी-देवताओं की मूर्तियां रखी हुई हैं।

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    इतिहास 

    26 जनवरी 2014 को मंदिर की स्थापना हुई। मंदिर की स्थापना करने में मंदिर कमेटी का बड़ा योगदान रहा है। जिसके कारण मंदिर की चर्चा पूरे शहर में रहती है। यहां हर रविवार को भंडारा लगाया जाता है। जिसकी इच्छा पूरी होती है वे लोग भी भंडारा की सेवा करके जाते हैं। वैष्णो माता मंदिर में भक्तों के सहयोग से भंडारे चलते हैं। मंदिर में राम दरबार, सांई दरबार, शिवजी, राधा-कृष्ण की मूर्ति, भगवती, बजरंग बली, गणेश, लक्ष्मी नारायण, संतोषी माता, काल भैरव तक की मूर्तियां रखी हुई हैं। 

    तैयारियां 

    सुबह 8 से 10 बजे तक पूजा होती है। इसके बाद दुर्गा सप्तशती का पाठ होता है जो सुबह 10 से दोपहर 1 बजे तक चलता है। इसके बाद भंडारा 12 से 3 बजे तक होता है। साढ़े 4 बजे से कीर्तन शुरू हो जाता है। शाम को साढ़े 7 से सवा 8 बजे तक आरती होती है। बाद में सवा 8 बजे भोग डालकर समापन किया जाता है। 

    मंदिर के पुजारी के अनुसार

    नवरात्र में मंदिर में विशेष पूजा होती है। मंदिर में श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ने लगी है। मंदिर में इन दिनों हर साल जाप होता है। यहां सच्चे मन से पूजा करने वालों की मुराद पूरी होती है।

    ---शालिक राम, पंडित।

    श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा तथा मां शैलपुत्री के दर्शन कर सुखी जीवन की कामना

    शारदीय नवरात्र के दूसरे दिन सुबह मंदिरों में श्रद्धालुओं ने मां दुर्गा के दर्शन कर सुखी जीवन की कामना की। अल सुबह से ही श्रद्धालुओं की लाइन शहर के मंदिरों में लगनी शुरू हो गई थी। माता के दर्शनों के लिए महिलाओं की संख्या अधिक थी। नवरात्रों में मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की भीड़ को ध्यान में रखकर मंदिर कमेटी द्वारा सुरक्षा के विशेष प्रबंध किए गए हैं। मंदिर प्रबंध समिति ने महिला तथा पुरूषों के लिए मंदिर प्रांगण में अलग-अलग व्‍यवस्‍था की गई। मंदिर की भव्य सजावट की गई। वहीं मेला कमेटी के सदस्य भी पूरी सतर्कता से जुटे रहे।