पानीपत में स्वास्थ्य सर्वे में सामने आया चौकाने वाला आंकड़ा, ज्यादातर महिलाएं, किशोरियां एनीमिया ग्रस्त
पानीपत के 71.53 प्रतिशत लोगों में खून की कमी सामने आई है। स्वास्थ्य विभाग के सर्वे में चौकाने वाला मामला सामने आया। जून में हुआ था सर्वे। 85 प्रतिशत महिलाओं में मिला था रक्त कम। हर तीसरे माह के पहले सात दिन टीमों को फील्ड में उतरना है।

पानीपत, जागरण संवाददाता। हरियाणा सरकार ने वर्ष-2030 तक प्रदेश को एनीमिया मुक्त करने का लक्ष्य निर्धारित किया है। स्वास्थ्य विभाग को हर तीसरे माह, पहले सात दिन फील्ड में उतरकर एनीमिया ग्रस्त लोगों को चिन्हित कर, उन्हें पौष्टिक भोजन की सलाह देनी है, इलाज करना है। जून में हुए एक सर्वे के मुताबिक जिला के 71.53 प्रतिशत लोगों में में खून कम मिला है। हैरत की बात यह कि बजट के अभाव में सर्वे स्थगित हो गया था।
बजट और मेडिसिन अभी तक नहीं मिली हैं, नतीजा स्वास्थ्य विभाग की टीमें सितंबर में भी सर्वे शुरू नहीं कर सकी है। सर्वे के दौरान टीमें बच्चों, किशोर-किशोरियों, गर्भवती व स्तनपान कराने वाली महिलाओं, प्रजनन उम्र की महिलाओं का हिमोग्लोबिन चेक करती, रिपोर्ट तैयार करती हैं। एनीमिया ग्रस्त को रक्त बढ़ाने के लिए खानपान के टिप्स देती हैं। अतिकुपोषितों को इलाज शुरू किया जाता है।
जून में हुए एक सर्वे के मुताबिक विभिन्न कैटेगरी में हुई महिलाओं की जांच में पता चला कि 85 प्रतिशत में रक्त कम है। एनीमिया मुक्त भारत अभियान के जिला नोडल अधिकारी डा. ललित वर्मा ने बताया कि बताया कि गत सर्वे में विभाग ने अस्पतालों, गांवों-शहर क्षेत्र में कुल में 23 हजार 433 बच्चों, किशोरों व महिलाओं की जांच की थी। इनमें से 17950 (71.53 प्रतिशत) में खून की कमी यानि ये एनीमिया ग्रस्त मिले थे।
बजट व मेडिसिन मिले तो सर्वे शुरू कराया जाएगा। डा. वर्मा के मुुताबिक फिलहाल टीमों को राष्ट्रीय पोषण सप्ताह में लगाया गया है। राष्ट्रीय किशोर स्वास्थ्य कार्यक्रम के तहत स्कूलों में विद्यार्थियों के स्वास्थ्य की जांच की जा रही है। विभिन्न संस्थाओं की मदद से जागरूकता कार्यक्रमों का शेड्यूल बनाया गया है।
एनीमिया के मुख्य लक्षण :
-त्वचा का सफेद दिखना।
-जीभ, नाखून व पलकों के अंदर सफेदी।
-कमजोरी एवं बहुत अधिक थकावट।
-लेटने व बैठने के दौरान चक्कर आना।
-बेहोश होना, सांस फूलना, हृदय गति का तेज होना।
-चेहरे व पैरों पर सूजन दिखाई देना।
-नींद नहीं आना, आंख की रोशनी कम होना।
-होंठ व नाखूनों का रंग भी बदलना।
-सिरदर्द, श्वास लेने में दिक्कत।
आयु के हिसाब से सिरप-गोली :
-शून्य से पांच वर्ष-आयरन सिरप
-छह से नौ वर्ष-गुलाबी गोली
-10 से 19 वर्ष-नीली गोली
-गर्भवती-स्तनपान कराने वाली महिलाएं-लाल गोली
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