जागरण संवाददाता, पानीपत : एसडी पीजी कॉलेज में संस्कृत सम्मेलन में संस्कृत भाषा की तरफ युवा वर्ग के आकर्षित नहीं होने पर ¨चता व्यक्त की। विद्वानों ने कहा कि संस्कृत में देशवासी पिछड़ रहे हैं, जबकि विदेशी अध्ययन कर आगे निकल रहे हैं। वक्ताओं ने देश में इसको रोजगार से जोड़ने की बात रखी। कॉलेज में शुक्रवार को आयोजित सम्मेलन में मुख्य अतिथि चौ. देवीलाल विश्वविद्यालय सिरसा के पूर्व कुलपति डॉ. राधेश्याम शर्मा रहे। मुख्य वक्ता संस्कृत भारती के उपाध्यक्ष डॉ. श्रेयांस द्विवेदी, हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष डॉ. वीरेंद्र चौहान, संस्कृत भारती के अध्यक्ष एवं अध्यक्ष संस्कृत विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय कुरुक्षेत्र से डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र व लेखक एवं कवि आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री रहे। मंच संचालन संस्कृत के वरिष्ठ प्राध्यापक डॉ. सुश्रुत ने किया डॉ. राधेश्याम शर्मा ने कहा कि संस्कृत सभी भाषाओं की जननी है और जननी से हर कोई प्रेम करता है। संस्कृत सुखद अनुभव और वरदान देने वाली भाषा है और यह सबका कल्याण करती है। संस्कृत दुनिया की सबसे वैज्ञानिक भाषा है। अमेरिका और जर्मनी ने इस भाषा को अपना कर इस तथ्य को साबित भी कर दिया है। विद्यार्थी इस भाषा की तरफ आकर्षित नहीं होते हैं। उन्होंने कहा कि यदि इस भाषा को रोजगार से जोड़ दिया जाए, तो विद्यार्थी इसकी तरफ भी आकर्षित होने शुरू हो जाएंगे। डॉ. सुरेंद्र मोहन मिश्र ने कहा कि अंग्रेजी या अन्य भाषाओं के शब्द मूलत: संस्कृत भाषा से ही लिए गए है। आज देशभर में केवल 14 ह•ार लोग ही संस्कृत में बातचीत कर सकते हैं, जो ¨चता का विषय है। देशभक्ति का जज्बा आता है : डॉ. श्रेयांस द्विवेदी ने कहा कि ओम का उद्घोष हम प्रकृति की हर वस्तु में सुन सकते हैं। हम प्रकृति और ईश्वर के रहस्यों को आसानी से जान सकते है। देश भक्ति का जज्बा भी संस्कृत भाषा में ही छिपा है। आचार्य महावीर प्रसाद शास्त्री संस्कृत की इस दुर्दशा के पीछे इसका कठिन कर पेश करना भी है। हरियाणा ग्रंथ अकादमी के उपाध्यक्ष प्रो. वीरेंद्र ¨सह चौहान ने सरकारों द्वारा संस्कृत को गंभीरता के साथ न लेना इसकी दुर्दशा का बड़ा कारण बताया। चौहान ने कालेज में संस्कृत भारती के सहयोग से संस्कृत संभाषण केंद्र प्रारंभ करने का प्रस्ताव रखा। कालेज में संस्कृत संभाषण केंद्र की घोषणा : कालेज प्रधान दिनेश गोयल व प्राचार्य डॉ. अनुपम अरोड़ा ने कालेज में संस्कृत संभाषण केंद्र स्थापित करने की घोषणा की। प्रधान दिनेश गोयल ने इसको लेकर 21 हजार रुपये देने की भी घोषणा की। उन्होंने बताया कि एक दिवसीय संस्कृत सम्मेलन का उद्देश्य वर्तमान में संस्कृत भाषा की प्रासंगिकता विषय पर गंभीरता के साथ मंथन करना और संस्कृत भाषा को पुन: स्थापित करना रहा। इस अवसर पर डॉ. संगीता गुप्ता, डॉ. मुकेश पूनिया, डॉ. एसके वर्मा, प्रो. इंदु पुनिया, दीपक मित्तल और आईबी कॉलेज से डॉ. रामेशवर दास, डॉ. दिनेश ¨सघल व डॉ. सोनिया मौजूद रहे।