कुरुक्षेत्र, [विनीश गौड़]। कोरोना महामारी के सामने स्वास्थ्य विभाग की गति धीमी पड़ गई है। जितनी तेजी से कोरोना वायरस पैर पसार रहा है लोगों का बचाव करने वाला स्वास्थ्य विभाग उतनी ही ढीली गति से चल रहा है। विशेषज्ञों के मुताबिक नया कोरोना वायरस दो से तीन दिन में ही मरीज के फेफड़ों को खराब कर सकता है।

इसके बावजूद घर में क्वारंटाइन किए जा रहे मरीजों तक स्वास्थ्य विभाग का स्टाफ हालचाल पूछने तक नहीं पहुंच रहा। जहां स्टाफ पहुंच रहा है वहां भी तीन से चार दिन देरी से। ऐसे में कहीं ऐसा न हो कि स्वास्थ्य विभाग के भरोसे घरों में क्वारंटाइन मरीज अपने फेेफड़ों का ही नुकसान कर लें। जिले में ऐसे कई मामले आए हैं जहां स्वास्थ्य मंत्री और डीसी को इंटरनेट मीडिया के माध्यम से शिकायत करने के बाद स्वास्थ्य विभाग जागा और तब कर्मियों ने चार से पांच दिन बाद पहुंचकर मरीजों का स्वास्थ्य जांचा।

एलएनजेपी से 50 मीटर की दूरी पर भी पांच दिन बाद पहुंचे स्वास्थ्य कर्मी

आजाद नगर, कल्याण नगर में घर पर क्वारंटाइन कोरोना पॉजिटिव मरीज के परिजनों ने आराेप लगाया कि पांच दिन हो गए एक भी स्वास्थ्य कर्मी मरीज उनका हालचाल जानने नहीं आया। फोन तो बहुत आए, लेकिन कोई मरीज को देखने नहीं पहुंचा। यह तब है जब वे मुख्य अस्पताल से महज 50 मीटर की दूरी पर स्थित कालोनी में रह रहे हैं। इसके बावजूद कोई स्वास्थ्य कर्मी दवा देने तक नहीं आया। एक कोरोना पॉजिटिव मरीज के परिजन ने आरोप लगाया कि डीसी शरणदीप कौर बराड़ को वाट्सएप पर शिकायत देने के बाद स्वास्थ्य कर्मचारी मरीज की जांच करने घर पहुंचे। जबकि दूसरी तरफ कंटेनमेंट जाेन और बफर जोन बनाने के दावे हो रहे हैं।

स्वास्थ्य मंत्री के इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर शिकायत की तब पहुंचे कर्मी

सेक्टर पांच निवासी एक कोरोना पॉजिटिव ने आरोप लगाया कि वह और उनकी पत्नी दोनों कोरोना पॉजिटिव आ गए हैं। मगर दो दिनों से सिर्फ फोन पर ही स्वास्थ्य कर्मचारी उन्हें तापमान नोट करने की सलाह दे रहे हैं, जबकि कोई भी घर देखने तक नहीं आया। जब उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री अनिल विज के इंटरनेट मीडिया अकाउंट पर इसकी शिकायत की उसी दिन स्वास्थ्य कर्मचारियों ने आकर उन्हें कुछ दवाएं दी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य विभाग को तुरंत इस पर संज्ञान लेना चाहिए और मरीजों को उचित दवाएं भी उपलब्ध करानी चाहिए। थोड़ी सी अनदेखी से मरीज की जान तक जा सकती है।

हर रोज घर पर क्वारंटाइन मरीजों को फोन किया जाता : डा. ललित

होम आइसाेलेशन कार्यक्रम नोडल अधिकारी डा. ललित कल्सन ने बताया कि हर रोज घर पर क्वारंटाइन मरीजों को फोन किया जाता है। अगर किसी भी मरीज की शिकायत आती है कि उनके घर पर कोई दवा देने या स्टाफ नहीं पहुंचा तो तुरंत उस पर संज्ञान लिया जाता है। अगर फिर भी कोई स्वास्थ्य कर्मी लापरवाही करेेगा तो उसके खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा उनके पास कोई भी उच्चाधिकारी से शिकायत नहीं पहुंची है। बाकायदा पॉजिटिव मरीजों के घर जाकर ऑक्सीमीटर से जांच भी की जाती है।

पानीपत की ताजा खबरें पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें


यह भी पढ़ें: बेटी पूरे कर रहे टैक्सी चालक पिता के ख्‍वाब, भाई ने दिया साथ तो कामयाबी को बढ़े हाथ

यह भी पढ़ें: पानीपत में बढ़ रहा कोरोना, बच्‍चों को इस तरह बचाएं, जानिये क्‍या है शिशु रोग विशेषज्ञ की सलाह

यह भी पढ़ें: चोट से बदली पानीपत के पहलवान की जिंदगी, खेलने का तरीका बदल बना नेशनल चैंपियन

Indian T20 League

शॉर्ट मे जानें सभी बड़ी खबरें और पायें ई-पेपर,ऑडियो न्यूज़,और अन्य सर्विस, डाउनलोड जागरण ऐप

kumbh-mela-2021