पानीपत, [विजय गाहल्याण]। खेल जगत में माना जाता है कि चोट खिलाड़ी का गहना होता है। यानी चोट खेल का हिस्सा है। हालांकि चोटिल होने के बाद खिलाड़ी का भविष्य भी दांव पर लग जाता है। चोट को ठीक करने के लिए खिलाड़ी अथक प्रयास करता है। इसके बाद वह जोरदार वापसी करता है और सफल होने की संभावना ज्यादा होती है। ऐसी ही कहानी सेक्टर-11 स्थित हरियाणा शहरी विकास प्राधिकरण (हशविप्रा) के क्वार्टर में रहने वाले पहलवान हिमांशु खत्री की है। चोट को हरा स्टाइल बदलकर मैदान में आए तो स्वर्ण पदक जीत लिया।

दरअसल, फ्री स्टाइल कुश्ती का अभ्यास करते हुए उनके दाएं घुटने में चोट लग गई। अभ्यास छूट गया। रिसालू गांव स्थित धर्म सिंह कुश्ती एकेडमी के संचालक और कोच जसबीर सिंह फौजी उर्फ जस्सा मलिक ने उन्हें ग्रीको कुश्ती के अभ्यास की सलाह दी। इसके बाद हिमांशु की जिंदगी बदल गई। उन्होंने 26 से 27 मार्च को चंडीगढ़ में हुई सब जूनियर ग्रीको कुश्ती चैंपियनशिप में चार पहलवानों को हराकर स्वर्ण पदक जीता। हिमांशु का मानना है कि चोट न लगती तो वह फ्री स्टाइल कुश्ती करते और इसमें शायद सफल नहीं हो पाते।

ममेरे भाई से प्रेरित होकर कुश्ती का अभ्यास शुरू किया

सोनीपत के पाणची गांव के 17 वर्षीय हिमांशु खत्री ने बताया कि मामा धनराम सिंह गिल और ममेरे भाई नवीन गिल पहलवान रहे हैं। भाई को कुश्ती खेलते देख उन्होंने भी तीन साल पहले कोच जसबीर के पास कुश्ती का अभ्यास शुरू किया। पहले साल राज्यस्तरीय कुश्ती चैंपियनशिप में कांस्य पदक जीता। इसके बाद हौसला बढ़ा और उन्होंने राज्यस्तरीय कुश्ती प्रतियोगिता में ही स्वर्ण पदक जीता।   

पिता और रिश्तेदारों के सहयोग से खुराक की पूर्ति  

हिमांशु ने बताया कि पिता आजाद ङ्क्षसह खत्री हशविप्रा के ट्यूबवेल आपरेटर हैं। उनकी नौकरी से दो बहनों की शिक्षा व घर का खर्च मुश्किल से चलता है। खुराक पर काफी खर्च होता है। खुराक की पूर्ति पिता व रिश्तेदारों के सहयोग से होती है।

एशियन चैंपियनशिप के लिए सात घंटे अभ्यास

हिमांशु ने बताया कि दिल्ली में 24 से 27 जून को एशियन सब जूनियर ग्रीको कुश्ती चैंपियनशिप होगी। इस स्पर्धा के लिए उनका चयन हो गया है। तैयारी के लिए वह हर रोज सात घंटे कुश्ती का अभ्यास कर रहे हैं। देश और विदेश के पहलवानों के वीडियो देख तकनीक में भी सुधार कर रहे हैं। उनका लक्ष्य स्वर्ण पदक जीतना है। ग्रीको रोमन में कमर के नीचे प्रतिद्वंद्वी को पकडऩा या किसी रक्षात्मक या आक्रामक उद्देश्य के लिए पैरों का उपयोग करना सख्त मना होता है। फ्री स्टाइल कुश्ती में इस तरह का कोई प्रतिबंध लागू नहीं होता।

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Edited By: Anurag Shukla