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    13 साल पुरानी सोरायसिस बीमारी नहीं हुई ठीक तो लिया आयुर्वेद का सहारा, हुआ चमत्‍कार

    By Anurag ShuklaEdited By:
    Updated: Mon, 26 Jul 2021 02:41 PM (IST)

    कुरुक्षेत्र में 13 वर्षों से सोरायसिस की दवा खा-खाकर मरीज ऊब चुका था। इसके बाद आयुर्वेद का सहारा लिया तो एक से दो माह उपचार में ही ठीक हो गए। पीजीआइ तक दौड़ लगा चुके मरीजों को आयुर्वेदिक दवाओं ने किया बिल्कुल ठीक।

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    आयुर्वेद की मदद से सोरायसिस का उचार।

    कुरुक्षेत्र, [विनीश गौड़]। सोरायसिस के जो मरीज वर्षों से दवाएं खा-खाकर ऊब चुके थे और ठीक होने की आस छोड़ चुके थे एक से दो महीने में ही आयुर्वेदिक चिकित्सा ने उन्हें चमत्कार दिखा दिया। सोरायसिस के ऐसे एक दो नहीं बल्कि कई मरीज हैं, जिन्होंने चंडीगढ़ पीजीआइ तक की दौड़ लगाई। कई चिकित्सक और दवाएं बदली लेकिन इस बीमारी ने उनका पीछा नहीं छोड़ा। जबकि आयुर्वेद में एक भी गोली नहीं खाने के बावजूद एक से दो महीने में ही उनके परिणाम आने शुरू हो गए। महज विरेचन पद्धति से वे ठीक हो गए। इसके बाद से ये मरीज आयुर्वेदिक चिकित्सका के मुरीद हो गए। मोबाइल पर फोन करके फालोअप लेने वाले पीजीआइ के चिकित्सकों ने भी जब मरीज के स्वस्थ होने की बात सुनी तो दवाओं के नाम मांगे हैं।

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    13 साल की बीमारी छह माह के इलाज से हुई ठीक

    पवन कुमार चार पांच साल से नहीं बल्कि 13 वर्षों से सोरायसिस की बीमारी से जूझ रहे थे। उन्होंने चंडीगढ़ पीजीआइ से भी इलाज लिया। मगर ज्यादा राहत नहीं मिल पाई। इसके बाद दिसंबर 2020 में आयुर्वेदिक ट्रीटमेंट लेना शुरू किया। वे स्योंसर स्थित राजकीय आयुर्वेदिक डिस्पेंसरी में डा. शुभम गर्ग के पास पहुंचे और इलाज शुरू कराया। यहां उन्होंने मरीज का उपचार पंचकर्मा से शुरू किया और विरेचन शुरू की। पंचतिक्त घी के प्रयोग द्वारा रक्ष कराया और अमलदास औषधियां दी। पवन ने बताया कि छह माह के इलाज में ही वह 90 फीसद ठीक हो गया।

    पीजीआइ से साथ में इलाज लेने वाले आज तक नहीं हुए ठीक, मेरे शरीर पर निशान तक नहीं रहे

    शहर निवासी वेनू शर्मा बताते हैं कि उन्हें पिछले कई वर्षों से सोरायसिस थी। पूरे पेट पर सोरायसिस के कारण लाल धब्बे और खुजली हो रही थी। उन्होंने चंडीगढ़ पीजीआइ से इलाज कराया, लेकिन कोई फर्क नहीं पड़ा। वेनू शर्मा ने बताया कि उन्हें श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल के पंचकर्मा में विभाग में इलाज कराने की सलाह उनके पिता ने दी। वे खुद भी वहां से पंचकर्मा करा रहे हैं। इसके बाद वह पंचकर्मा में डा. अशोक राणा से मिला और इलाज शुरू कराया। वेनू ने बताया कि उनके साथ जो पीजीआइ से इलाज ले रहे थे उनकी हालत आज भी वैसी ही बनी हुई है, जबकि उनकी स्किन बिल्कुल पहले जैसी हो गई। खास बात तो यह है कि चिकित्सक ने उन्हें एक दवा तक खाने के लिए नहीं, बल्कि विरेचन कराया। इसी से काफी पुरानी सोरायसिस ठीक हो गई। पीजीआइ से एक चिकित्सक का फोन भी आया था, जिन्हें बताया कि उनकी बीमारी ठीक हो चुकी है। चिकित्सक ने भी आश्चर्य जताते हुए इलाज की पर्ची मंगवाई जिसे वहां भेजा गया है।

    आयुर्वेद पर विश्वास करना सबसे ज्यादा जरूरी : डा. अशोक राणा

    श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कालेज एवं अस्पताल से चिकित्सक डा. अशोक राणा ने कहा कि स्किन की जितनी भी बीमारियां हैं उनका आयुर्वेद में 100 प्रतिशत उपचार है। मगर सबसे पहले मरीज को आयुर्वेदिक चिकित्सका पद्धति पर विश्वास करना पड़ेगा। सोरायसिस की समस्या को बिल्कुल खत्म किया जा सकता है। इसके लिए मरीज को पंचकर्मा देने के साथ-साथ आहार विहार बदलने की सलाह दी जाती है।