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'किसी ने सोचा न था कि यह प्रचारक PM बनेगा', पानीपत के राजपूताना बाजार में आज भी गूंजते हैं नरेंद्र मोदी के किस्से

Published: Sat, 07 Nov 2026 11:51 AM (IST)

पानीपत के राजपूताना बाजार में आज भी नरेंद्र मोदी के 1978 के दौरे की यादें ताजा हैं, जब वे एक आरएसएस प्रचारक के रूप में 15 दिन यहां ठहरे थे।

पीएम नरेंद्र मोदी की पुरानी तस्वीरें (फाइल फोटो)

पीएम नरेंद्र मोदी की पुरानी तस्वीरें (फाइल फोटो)

HighLights

  1. नरेंद्र मोदी 1978 में पानीपत में आरएसएस प्रचारक के रूप में आए थे

  2. राजपूताना बाजार में 15 दिन ठहरे, अपनी सफाई स्वयं करते थे

  3. स्थानीय परिवारों ने भोजन कराया, सादगीपूर्ण जीवनशैली ने प्रभावित किया

नरेश मेहरा, पानीपत। पानीपत का राजपूताना बाजार सिर्फ कारोबार का केंद्र नहीं, बल्कि शहर की पुरानी विरासत और कई यादगार घटनाओं का गवाह भी है।

बाजार की गलियों में आज भी करीब 48 साल पुरानी एक ऐसी चर्चा सुनने को मिलती है, जिसका संबंध देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से है।

वर्ष 1978 में नरेंद्र मोदी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के प्रचारक के रूप में पानीपत आए थे। उस समय वह करीब 15 दिन तक राजपूताना बाजार स्थित एक पुराने भवन में ठहरे थे। उस दौर में उनकी सादगी और दिनचर्या को लेकर स्थानीय लोगों के पास आज भी कई यादें हैं।

खुद करते थे रहने के स्थान की सफाई, सादगी ने छोड़ी थी अलग छाप

बाजार प्रधान सागर खेतरपाल व स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के अनुसार, वर्ष 1978 में हरियाणा के प्रभारी रहे नरेंद्र मोदी संघ के प्रचारक के तौर पर पानीपत आए थे। राजपूताना बाजार में डॉ. जगदीश आहुजा के पुराने भवन में उनके ठहरने की व्यवस्था की गई थी।

भवन की हालत जर्जर थी और वहां रहने के दौरान उन्हें अपने स्थान की सफाई भी स्वयं करनी पड़ती थी। सीमित सुविधाओं के बीच उनका रहन-सहन बेहद सादा था। उस समय शायद ही किसी ने कल्पना की होगी कि यहां कुछ दिन बिताने वाला यह प्रचारक आगे चलकर देश का प्रधानमंत्री बनेगा।

मिट्ठन स्वीट्स और मेहता क्लाक के परिवार ने पहुंचाया था भोजन

मिट्ठन परिवार से राजेंद्र गुप्ता ने बताया कि संघ के वरिष्ठ नेता सुल्तान सिंह के आग्रह पर मिट्ठन स्वीट्स के तत्कालीन युवा कारोबारी स्व. प्रमोद कुमार और मेहता क्लॉक के मालिक वेद मेहता ने उन दिनों नरेंद्र मोदी के भोजन की व्यवस्था की थी।

दोनों परिवारों ने अपने स्तर पर उन्हें भोजन उपलब्ध कराया। उस समय नरेंद्र मोदी की सादगी और अनुशासित जीवनशैली ने स्थानीय लोगों पर गहरी छाप छोड़ी थी। आज भी इन परिवारों से जुड़ी पुरानी यादें बाजार के लोगों के बीच चर्चा का विषय बनती हैं।

ऐतिहासिक दरवाजे के नाम से जुड़ी बाजार की पहचान

राजपूताना बाजार अमर भवन चौक और गुड़ मंडी रोड के आसपास पुराने शहर के पारंपरिक बाजारों में शामिल है। यहां कपड़े, कालीन, कंबल, घरेलू सामान और किराना कारोबार की दुकानें हैं।

बाजार के नाम का संबंध पुराने राजपूताना दरवाजे से भी जोड़ा जाता है, जो पशु अस्पताल रोड के पास स्थित बताया जाता है। यहां की गलियों में आज भी पुराने शहर की रौनक और इतिहास की यादें महसूस की जा सकती हैं।

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