पानीपत, [विजय गाहल्याण]। ग्राम सचिव का पेपर लीक करने की साजिश रोहतक जिले के सांपला के पुष्पेंद्र ने 25 दिन पहले रची थी। इसके लिए वह दिल्ली से एक डिवाइस भी खरीद कर लाया था। ये डिवाइस बेहद छोटी है, जो कान में फिट हो जाती है। इसमें आ रही आवाज पास बैठे व्यक्ति को भी सुनाई नहीं देती है। उसने पेपर लीक करने के लिए ए और बी, दो प्लान बनाए थे। प्लान ए में रोहतक के बलियाणा का सुनील उर्फ सीलू, सांपला का दीपक, रोहतक की शिवाजी कालोनी का अनुज और बलियाणा का अमन शामिल था। इनके नाकाम होने पर प्लान बी के अनुसार दिल्ली पुलिस के सब इंस्पेक्टर विश्वजीत (पुष्पेंद्र का भाई) और बलियाणा के संजीत को पेपर लीक करना करना था।

दोनों प्लान की रिहर्सल भी की गई थी। यह सफल हो पाते, इससे पहले ही पुलिस ने इन्हें दबोच लिया। इस मामले की जांच के एसपी शशांक कुमार सावन ने एएसपी पूजा वशिष्ठ के नेतृत्व में एसआइटी गठित कर दी है।

 

ये था प्लान ए

करनाल की कर्ण विहार कालोनी के स्कूल के परीक्षा सेंटर में पुष्पेंद्र ने अंकित की ड्यूटी लगा रखी थी। सुबह के सत्र में पुष्पेंद्र और सुनील ने परीक्षा दी। बहादुरगढ़ के दीपक ने इंटरनेट मीडिया के माध्यम से साल्व पेपर की पर्ची अंकित के माध्यम से पुष्पेंद्र और सुनील तक पहुंचानी थी। आंसर की नहीं मिली तो प्लान फेल हो गया। शाम की शिफ्ट में दीपक, अनुज और अमन को परीक्षा देनी थी, लेकिन वे इससे पहले ही पकड़ गए। अंकित के पास क्यूआर कोड का आइकार्ड था, जिसके माध्यम से वो किसी भी परीक्षा केंद्र के अंदर जा सकता था।

ये था प्लान बी

दिल्ली पुलिस का सब इंस्पेक्टर पढ़ाई में होशियार था। दिल्ली के मोहन गार्डन थाने में ट्रेनिंग पर था। वह चाहता था कि भाई पुष्पेंद्र भी सरकारी नौकरी पर लग जाए। इसलिए प्लान बी का हिस्सा था। पुष्पेंद्र ने कान में डिवाइस लगाया। अंदर से डिवाइस के माध्यम से स्कूल के बाहर बैठे विश्वजीत और संजीत को प्रश्न पत्र बताना था। वे उत्तर बता देते। डिवाइस में गड़बड़ी की वजह से बात नहीं बनी।

नरेश भी है मास्टरमाइंड,  10-10 हजार रुपये में लाया था साल्वर

ज्यों-ज्यों मामले की जांच आगे बढ़ रही है, त्यों-त्यों गिरोह से जुड़े खिलाडिय़ों की भूमिका सामने आ रही है। मतलौडा का नरेंद्र भी मास्टरमाइंड है। डिकाडला गांव के पास पैराडाइज स्कूल में पहले भी सरकारी नौकरी की एक परीक्षा हो चुकी है। इसकी भनक मास्टरमाइंड मतलौडा के नरेश को थी। पांच महीने पहले नरेंद्र ने पैराडाइज स्कूल के मालिक गढ़ी केवल के जगदीप से दोस्ती की। परीक्षा से दो दिन पहले नरेंद्र स्कूल आया और जगदीप को प्रलोभन दिया कि तीन युवकों की परीक्षा करानी है। प्रत्येक युवक से 12-12 लाख रुपये लेंगे। दोनों का छह-छह लाख रुपये हिस्सा होगा। पेपर होने पर हिस्सा मिल जाएगा। नरेश ने ही सिवाह के राजेश का जगदीप से कहकर आइकार्ड बनवाया। नरेश ने ही राजेश और पेपर साल्व करने वाले गन्नौर के राहुल व किशनपुरा के वैभव को 10-10 हजार रुपये देने थे। सीआइए-टू नरेश की भी तलाश कर रही है।

अंकित 80 सेंटरों में घूम सकता था

परीक्षा के लिए करनाल के शहर में 76 और 4 परीक्षा केंद्र नीलोखेड़ी में बना रखे थे। अंकित उक्त सभी परीक्षा केंद्रों में बेरोक-टोक घूम सकता था। आशंका है कि कई स्कूलों में पेपर लीक करवाने का प्रयास किया गया है। अंकित का आइकार्ड बनाने में किन-किन अधिकारियों व कर्मचारियों की भूमिका रही है इसकी भी जांच की जा रही है।

एएसपी ने की आरोपितों से पूछताछ

आरोपित जगदीप, उसका बेटा अनुज, पुष्पेंद्र, विश्वजीत, राहुल, राजेश, अनुज, अमन, सुनील, अंकित, दीपक, देवेंद्र और वैभव सहित 14 आरोपित तीन दिन की रिमांड पर हैं। उक्त आरोपितों को रविवार को सीआइए समालखा और सीआइए-टू ने  पैराडाइज स्कूल और करनाल से गिरफ्तार किया था। उनके कब्जे से एमटीएस आइकार्ड, 18 मोबाइल फोन, दो लैपटाप, ङ्क्षप्रटर व अन्य सामान बरामद किया था। एएसपी पूजा वशिष्ठ ने सीआइए-टू में पूछताछ की। ये पता लगाया जा रहा है कि गिरोह में और कितने लोग शामिल हैं। आरोपित तीन दिन की रिमांड पर हैं।

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