पानीपत, जेएनएन। थर्मल पावर स्टेशन में 3.02 बजे धमाका हुआ। कूलिंग टावर नंबर एक 10 सेकेंड में धवस्त हो गया। आधा किमी दूर सीमेंट फैक्ट्री में किसी तरह का कंपन महसूस नहीं हुआ, हालांकि दूसरी बिल्डिंगों के शीशे चटक गए। असंध जीद मार्ग को सवा तीन बजे के बाद यातायात के लिए खोल दिया गया। कंपनी के इंजीनियर देश में पहली बार इस प्रक्रिया से कूलिंग टावर गिराने का दावा कर रहे हैं। thermal

कूलिंग टावर गिराने के लिए थर्मल प्रशासन ने जयपुर से एडवांस क्वैरीटेक इंजीनियर्स के तकनीकी विशेषज्ञों की टीम बुलाई थी।

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टीम में शामिल कंपनी के इंजीनियर आनंद शर्मा सहित 12 विशेषज्ञों ने 24 घंटे पहले ही टावर के पिलर में 2000 छेद कर विस्फोटक फिट कर दिया। टावर गिराने में आधुनिक और सुरक्षित 300 किग्रा इमल्शन एक्सप्लोसिव का इस्तेमाल किया गया। विस्फोटक सामग्री को डेटोनेटर के सहारे जोड़ा गया था। कमांड देते ही धमाका हुआ। धूल का गुब्बार जब तक हवा में उड़ता, कूलिंग टावर भरभरा गया। थर्मल प्रबंधन ने विस्फोट के लिए 3.17 बजे का समय निर्धारित कर रखा था। तकनीकी विशेषज्ञों की सलाह पर इस प्रक्रिया को 15 मिनट पहले ही पूरा कर लिया गया। 

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90 फीसद खर्च की बचत 
तापीय विद्युत परियोजना को नवंबर 1979 में कमीशन किया गया था। इंजीनियर आनंद शर्मा ने बताया कि इस विस्फोटक के सहारे कूलिंग टावर को तोडऩे पर होने वाले खर्च में 90 फीसद बचत हुई है। विस्फोट के दौरान आवाज 100 डेसीबल से कम रिकॉर्ड की गई। ऊंचाई पर किसी तरह की कंपन महसूस नहीं हुई। 

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