पानीपत/कुरुक्षेत्र, [विनीश गौड़]। भारत त्योहार और उपवासों का देश है। यहां हर माह कोई न कोई उपवास होता है। कभी बच्चों के कुशलक्षेम के लिए तो कभी पति की लंबी आयु के लिए। कुछ ही दिनों बाद करवाचौथ का व्रत है। जिसे रखकर महिलाएं अपने पतियों की लंबी आयु के लिए प्रार्थना करेंगी। मगर क्या आपको पता है कि एक दिन का उपवास जहां आपको रक्तचाप से लेकर हृदय राेगों से बचा सकता हैं वहीं कई बीमारियों में यह औषधियों के साथ अत्याधिक कारगर साबित हो सकता है। श्रीकृष्णा राजकीय आयुर्वेदिक कालेज की एसोसिएट प्रोफेसर डा. शीतल इन दिनों उपवास के माध्यम से ही मरीजों को उपचार की सलाह दे रही हैं। वे बताती हैं कि वात, पित्त और कफ की प्रकृत्ति के मुताबिक उपवास रखा जाए तो जटिल से जटिल रोगों का इलाज इलाज संभव है। इस पर वे किताब भी लिख रही हैं। 

इन बीमारियों से बचा सकता है एक दिन का उपवास 

डा. शीतल बताती हैं कि उपवास रक्त शर्करा नियंत्रण में सुधार कर सकता है, जिनके परिवार में मधुमेह अनुवांशिक चली आ रही है और उन्हें मधुमेह का जोखिम रहता है यह उनके लिए उपयोगी हो सकता है। इंसुलिन प्रतिरोध कम हो जाने से शरीर में प्राप्त ग्लूकोज कुशलतापूर्वक कोशिकाओं तक पहुंच सकता है। आपको जानकर हैरानी होगी कि उपवास तीव्र सूजन को भी कम करता है। हृदय रोग, कैंसर और जोड़ों में सूजन की स्थिति में उपवास सूजन के कई मार्करों को कम कर सकता है जो कि स्कलेरोसिस स्थिति के इलाज में उपयोगी हो सकता है। इसके अलावा उच्च रक्तचाप, ट्राग्लिसराइड्स और कोलेस्ट्रॉल के स्तर में सुधार कर हृदय को स्वस्थ रखता है। मस्तिष्क की कार्यक्षमता को बढ़ाकर न्यूरोडिजनेरेटिव डिसऑर्डर को रोकता है। कैलोरी का सेवन और चयापचय को सीमित करके वजन कम करता है। उपवास ग्रोथ हार्माेन को बढ़ाता है और विलंब से वृद्धावस्था और दीर्घायु का विस्तार कर सकता है। एक बात का खास रखना चाहिए कि डायबिटीज और रक्तचाप के मरीजों को चिकित्सक की सलाह के बाद ही उपवास रखना चाहिए। 

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डा. शीतल।

उपवास रखने वाले लोग वात, पित्त और कफ अपनी प्रकृति के मुताबिक ही लें फलाहार 

-उपवास मीठे और नमकीन दोनों अलग-अलग तरह के होते हैं। ऐसे में अगर हर व्यक्ति अपनी प्रकृत्ति के मुताबिक उपवास में भोजन करे तो उसके स्वास्थ्य को भी लाभ होगा। वात प्रवृत्ति वाले व्यक्ति गर्म और कम नमक के और मीठे पदार्थों का सेवन कर सकते हैं। तीखे, कड़वे और कसैले खाद्य पदार्थाें का सेवन स्वास्थ्य को बिगाड़ सकता है। 

-दूसरे पित्त प्रवृत्ति वाले व्यक्ति होते हैं। इनके लिए ठंडा, मीठा और कसैला स्वाद वाला भोजन फायदेमंद होता है। तीखा, खट्टा और नमकीन खाद्य पदार्थ पित्त के गर्म गुण के स्वरूप को बढ़ाकर पित्त बढ़ा सकते हैं। यह बड़ी मात्रा में भोजन पचाने में सक्षम होते हैं। 

-इसके बाद कफ प्रवृत्ति वाले लोग होते हैं जिनकी मंदाग्नि पाई जाती है। इन व्यक्ति को चाहिए कि वे अपना भाेजन गर्म, सूखा या फिर कम नमीवाला हल्का रखें जोकि कड़वे तीखे और कसैले खाद्य पदार्थों से बना हो।

 

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