चंडीगढ़ , राज्‍य ब्‍यूरो। Exclusive Interview : हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल को उम्मीद है कि किसान संगठनों के 10 माह से चल रहे आंदोलन का जल्द निपटारा हो सकता है। इसके लिए केंद्र सरकार, राज्य सरकार और किसान संगठन अपने-अपने स्तर पर प्रयास कर रहे हैं। मुख्यमंत्री का मानना है कि यदि किसान संगठनों को इन तीनों कृषि कानूनों में कुछ बदलाव की जरूरत महसूस होती है तो केंद्र सरकार उसे मानने के लिये तैयार है, मगर इसके लिए दोनों पक्षों में संवाद जरूरी है। इस प्रक्रिया में कुछ कदम सरकार आगे बढ़ा रही है तो कुछ कदम किसान संगठनों को भी बढ़ाने चाहिये। किसान संगठनों के आंदोलन, दिल्ली में लगातार आवाजाही और ऐलनाबाद उपचुनाव को लेकर मुख्यमंत्री मनोहर लाल से दैनिक जागरण के स्टेट ब्यूरो प्रमुख अनुराग अग्रवाल ने बातचीत की। प्रस्तुत हैं प्रमुख अंश-

तीन कृषि कानूनों के विरोध में किसान संगठनों के आंदोलन को दस माह हो गये, लेकिन समस्या जस की तस बरकरार है। आखिर इस आंदोलन का अंत क्या है?

- केंद्र सरकार के तीनों कृषि कानून किसानों के पक्ष में हैं। उन्हें फायदा पहुंचाते हैं। इनका विरोध वाजिब नहीं है। वैसे तो इन कानूनों का मसला सीधे तौर पर केंद्र सरकार से जुड़ा है। हमारा यानी राज्य सरकार का इसमें कोई रोल नहीं है, लेकिन अगर किसान संगठनों के अग्रणी लोग हमें केंद्र के साथ बातचीत करने के लिए कहेंगे तो हम इसके लिए तैयार हैं। हम केंद्र तक किसान संगठनों की बातचीत की पेशकश पहुंचा देंगे। केंद्रीय मंत्री भी इस आंदोलन का हल निकालने के लिए प्रयासरत हैं। उनकी किसान संगठनों के साथ बातचीत चल रही है।

किसान संगठनों के आंदोलनकारियों की सिर्फ एक ही मांग है कि तीनों कृषि कानूनों को रद किया जाना चाहिये। इससे कम पर वह नहीं मानेंगे?

- इस मांग को किसी सूरत में वाजिब नहीं कहा जा सकता। इसकी वजह है, क्योंकि अभी तक तीनों कृषि कानून लागू नहीं हुए हैं। उन्हें लागू करने पर सुप्रीम कोर्ट ने रोक लगा रखी है। ऐसे में बिना कानून लागू हुए कोई कैसे कह सकता है कि इनका नुकसान होने वाला है। किसान संगठनों को बैठकर इस विषय पर बातचीत करनी चाहिये कि तीनों कानूनों में क्या बदलाव किये जा सकते हैं। अपनी शंकाओं को सरकार के सामने रखना चाहिये। यदि सरकार इन कानूनों में संशोधन के जरिये किसान संगठनों की शंकाओं का समाधान कर देती है तो फिर कोई समस्या नहीं रहेगी।

भाजपा शासित राज्यों में मुख्यमंत्रियों के बदलाव के बाद आपकी दिल्ली में आवाजाही बढ़ी है। प्रधानमंत्री व गृह मंत्री के साथ मुलाकातों को लेकर सियासी चर्चाएं जन्म ले रही हैं?

- मैं पहले भी दिल्ली जाता था, अब भी जा रहा हूं और आगे भी जाता रहूंगा। अब ऐसी क्या बात हो गई जो अचानक मेरी दिल्ली की आवाजाही पर निगाह रखी जाने लगी है। पहले मैं अबकी बार से भी ज्यादा दिल्ली जाता था। तब तो कोई गौर नहीं करता था। बहरहाल, दिल्ली में हमारे केंद्रीय नेता रहते हैं। उनके साथ बहुत से मसलों पर बातचीत करनी होती है, कई विषयों पर उनका मार्गदर्शन लेना होता है, विकास की परियोजनाओं पर बात होती है। किसान संगठनों के आंदोलन पर भी कई बार बात हुई है। इसलिए दिल्ली तो आना-जाना लगा रहेगा। इसलिए मेरी इस आवाजाही के मतलब अपने हिसाब से न निकाले जायें। यह सरकार के कामकाज का एक रुटीन का हिस्सा है।

पंजाब के नवनियुक्त मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी अभी तक दो बार आपसे मुलाकात कर चुके हैं। दोनों राज्यों के बीच विवादित मसलों पर कोई बातचीत हुई?

- पंजाब के मुख्यमंत्री और हमारा एक ही बिल्डिंग में कार्यालय है। पास-पास रहते हैं। हमारी विधानसभा भी एक ही परिसर में है। चरणजीत सिंह चन्नी जब मुख्यमंत्री बने, तब वह शिष्टाचार मुलाकात करने के लिए आये। मैंने उन्हें बधाई दी। दूसरी बार वह अपने बेटे की शादी का निमंत्रण देने आये। दोनों बार शिष्टाचार मुलाकात हुई। राजनीतिक व अन्य मसलों पर बातचीत के लिए समय पड़ा है। तमाम मसलों पर बातचीत करेंगे।

बरौदा के बाद अब ऐलनाबाद उपचुनाव सिर पर है। किसान संगठनों के आंदोलन के बीच यह उपचुनाव होने जा रहा है। क्या कुछ रहने वाला है?

- ऐलनाबाद में मैं भाजपा-जजपा गठबंधन के उम्मीदवार गोबिंद कांडा की जीत के प्रति पूरी तरह आश्वस्त हूं। हमें विकास, भ्रष्टाचार रहित व्यवस्था और सुशासन के आधार पर जनमत मिलेगा। लोग यह भी देखेंगे कि सरकार के तीन साल बाकी हैं। कौन उम्मीदवार उनके हलके में विकास करा सकता है। विपक्ष और किसान संगठनों को मैं इतना जरूर कहना चाहूंगा कि विपक्ष किसानों के कंधे पर बंदूक रखकर उनका राजनीतिक इस्तेमाल न करे और किसान अपने कंधों का इस्तेमाल विपक्ष को न करने दें।

विपक्ष खासकर कांग्रेस व इनेलो का कहना है कि भाजपा व जजपा के पास खुद का कोई उम्मीदवार नहीं था। इसलिए हलोपा से आये गोबिंद कांडा को ऐलनाबाद में उतार दिया?

- कौन कहता है कि हमारे पास उम्मीदवार नहीं था। गोबिंद कांडा बाकायदा हलोपा की सदस्यता को छोड़कर भाजपा में शामिल हुए हैं। हमने उन्हें भाजपा व जजपा गठबंधन का उम्मीदवार बनाया है। इस उम्मीदवार को हरियाणा लोकहित पार्टी यानी हलोपा भी अपना समर्थन दे रही है। पिछले चुनाव में भी ऐसे कई उदाहरण हैं जब हमने जीतने वाले उम्मीदवारों को ही टिकट दिये, भले ही वह दूसरी पार्टियां छोड़कर भाजपा में शामिल हुए।

पूर्व मुख्यमंत्री भूपेंद्र सिंह हुड्डा ने हाल ही में विपक्ष आपके समक्ष कार्यRम की शुरुआत की है। सीएम सिटी करनाल में उन्होंने पहला आयोजन किया। सरकार आपके द्वार कार्यRम तो सुने मगर विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम को कैसे देखते हैं?

- विपक्ष विरोध नहीं करेगा तो क्या करेगा, लेकिन हैरानी की बात है कि हमारे यहां विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है। उन्हें समझ नहीं आ रहा कि हम क्या मुद्दे उठायें। सरकार को कैसे घेरें, क्योंकि हम जनता की चुनी सरकार हैं और जनता के हित में काम करते हैं। हम प्रापर्टी डीलिंग, जमीनों का कारोबार, नौकरियों में भ्रष्टाचार, सीएलयू और तबादलों में वसूली की राजनीति नहीं करते। रही विरोध की बात तो विपक्ष को लोकतांत्रिक ढंग से कहीं भी विरोध करने का अधिकार है, लेकिन जनता जानती है कि सही क्या है और गलत कौन हैं।

इसी माह 27 अक्टूबर को भाजपा-जजपा गठबंधन की सरकार को दो साल पूरे होने जा रहे हैं। अब तक के सफर को कैसे देखते हैं और आगे की क्या योजना है?

- भाजपा व जजपा मिलकर अपने चुनावी वादे पूरे कर रहे हैं। गठबंधन की सरकार जनता के हितों का ध्यान रखते हुए और उन्हें साधते हुए आगे बढ़ रही है। हमारा साथ मजबूत है।

  • दो टूक
  • तीन कृषि कानून तो अभी लागू भी नहीं हुए, फिर इनमें खामियों के नतीजे पर पहुंचना उचित नहीं
  • दिल्ली में हमारे केंद्रीय नेता मौजूद, वहां आना-जाना लगा रहेगा, इस आवाजाही को सामान्य तरीके से लें
  • पंजाब के मुख्यमंत्री चन्नी दो बार मिलने आए, शिष्टाचार बातें हुईं, विवादित मुद्दों पर फिर कभी बात करेंगे
  • ऐलनाबाद में गठबंधन के पक्ष में आएंगे नतीजे, विपक्ष को अपना कंधा राजनीति के लिए इस्तेमाल न करने दें किसान
  • हुड्डा का विपक्ष आपके समक्ष कार्यक्रम चर्चाओं में बने रहने से अधिक कुछ नहीं, उन्हें कुछ तो करना ही है

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Edited By: Anurag Shukla