Guru Purnima 2022: गीता मनीषी ज्ञानानंद से खुर्शीद आलम ने पाया मानवता की सेवा का मंत्र
Guru Purnima 2022 गीता मनीषी ज्ञानानंद से खुर्शीद आलम ने पाया मानवता की सेवा का मंत्र। उनका मानना है कि यह सीख उन्हें अपने परम गुरु महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के पावन सानिध्य में मिली। संकट के समय पास होते हैं गुरुदेव।

करनाल, जागरण संवाददाता। दौर भले ही बदल रहा हो लेकिन आस्था की राह पर चलकर मानवता की सेवा का मंत्र अपनाने वालों की वजह से ही यकीनन आज भी सांप्रदायिक सौहार्द कायम है। राज्य हज कमेटी के समन्वयक और समाजसेवी खुर्शीद आलम ने खुद को इस कसौटी पर साबित करने में कभी कोई कमी नहीं छोड़ी। उनका मानना है कि यह सीख उन्हें अपने परम गुरु महामंडलेश्वर गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानंद महाराज के पावन सानिध्य में मिली, जिनके शिष्यत्व की सौगात मिलना उनके जीवन की सबसे बड़ी सौगात है।
गुरु पूर्णिमा के उपलक्ष में जागरण के रूबरू हुए करनालवासी खुर्शीद आलम ने बताया कि गीता मनीषी स्वामी ज्ञानानन्द महाराज जैसे महान संत हर युग में जन्में, ईश्वर के चरणों में उनकी यही प्रार्थना है। महान तपस्वी व परम श्रद्धेय गुरुदेव से उनकी मुलाकात करीब 30-32 वर्ष पूर्व करनाल में हुई थी। उन्हें सुना तो महसूस हुआ कि यह कोई साधारण संत नहीं हैं बल्कि, उनके महान व्यक्तित्व में पूरी तरह भगवान श्रीकृष्ण की कृपा बरस रही है।
उनकी विद्वता का कोई सानी नहीं है। यूं अनुभव हुआ कि जैसे उनके दर्शन इसलिए हुए हैं कि जीवन में कुछ चमत्कारिक घटित होने वाला है। आखिरकार यही हुआ भी, जब उन्होंने पहले मन ही मन और फिर पूरी तरह प्रत्यक्ष रूप में स्वामी ज्ञानानंद को अपना परम गुरु स्वीकार किया।
संकट के समय पास होते गुरुदेव
खुर्शीद आलम बताते हैं कि उन्होंने कई मर्तबा यह अनुभव किया है कि स्वामी ज्ञानानंद अक्सर संकट के समय अप्रत्यक्ष रूप से अपने भक्तों की रक्षा करते हैं। जब भी कोई संकट में आता है तो उन्हीं के सिमरण और आशीर्वाद से सब ठीक हो जाता है। ऐसे कई वाकयों के दौरान उन्हें आभास हुआ कि गुरुदेव कहीं आसपास ही हैं। अन्य भक्तों से भी वह अक्सर ऐसे अनुभव सुनते रहते हैं।
नियमित रूप से सुनते प्रवचन
खुर्शीद आलम ने बताया कि वह नियमित रूप से अपने गुरुदेव के प्रवचन सुनते हैं। उन्हें अक्सर उनका पावन सानिध्य और मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इसी से प्रेरणा लेकर वह निरंतर सामाजिक कार्यों में सक्रिय रहते हैं। पर्यावरण संरक्षण, गरीबों की यथायोग्य सहायता, सांप्रदायिक सौहार्द कायम रखने के प्रयासों सहित समाज हित में जहां भी उन्हें अपनी आवश्यकता महसूस होती है, वह पहुंच जाते हैं। यह सब गुरुदेव की सीख से ही संभव हो सका है।
मजहब नहीं सिखाता आपस में बैर रखना...
खुर्शीद आलम ने कहा कि मजहब कभी आपस में बैर रखना नहीं सिखाता। सच यह है कि जब भी दुनिया में जुल्मोसितम और भ्रष्टाचार बढ़ता है, तब परम पिता परमात्मा ऐसे महापुरुषों को धरती पर भेजते हैं ताकि इंसान को संकट से छुटकारा मिल सके। उन्हें गुरुदेव के यह शब्द बहुत अच्छे लिखते हैं कि-गीता गीत है भगवान का यह तो तीर्थ है भारत महान का...। आज स्वामी ज्ञानानंद जियो गीता के माध्यम से यह संदेश बखूबी घर-घर पहुंचा रहे हैं। हजारों वर्ष पूर्व कुरूक्षेत्र की पावन धरा पर श्री कृष्ण ने अर्जुन को गीता उपदेश दिया था।
विदेश में भी मनाया जाता है गीता जयन्ती महोत्सव
आज पूरे विश्व में गीता को घर-घर में पढ़ाने का काम महामंडलेश्वर ज्ञानानंद महाराज कर रहे हैं। इन्हीं सार्थक प्रयासों का परिणाम है कि हरियाणा से आरंभ होकर आज गीता जयन्ती महोत्सव विदेश तक मनाया जाने लगा है। गुरुदेव ने कुरूक्षेत्र में गीता ज्ञान संस्थानम की स्थापना कर भारत की संस्कृति को युग-युगान्तर तक जिंदा रखने का अनमोल उपहार दिया है। इससे हर धर्म, मजहब, के लोगों को प्रेरणा मिलती है।
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