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यह एक आर्काइव लेख है, जिसे Jul 10, 2020 को प्रकाशित किया गया था। इसमें दी गई जानकारी वर्तमान समय के लिहाज से पुरानी हो सकती है।

रिफाइनरी से पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान, लग सकता है 642 करोड़ का हर्जाना

By Anurag ShuklaEdited By:
Published: Fri, 10 Jul 2020 09:23 AM (IST)

पानीपत रिफाइनरी पर 642 करोड़ रुपये का हर्जाना लग सकता है। इस मामले में 15 जुलाई को सुनवाई हो सकती ...और पढ़ें

रिफाइनरी से पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान, लग सकता है 642 करोड़ का हर्जाना
रिफाइनरी से पर्यावरण को पहुंच रहा नुकसान, लग सकता है 642 करोड़ का हर्जाना

पानीपत, जेएनएन। सिठाना के सरपंच सतपाल बनाम आइओसीएल मामले में ज्वाइंट कमेटी ने फाइनल रिपोर्ट नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल को सौंप दी है। 80 पेज की इस रिपोर्ट में रिफाइनरी पर पर्यावरण को नुकसान पहुंचाने के लिए 659.49 करोड़ रुपये हर्जाने की अनुशंसा की गई है। इस मामले पर एनजीटी में 15 जुलाई को सुनवाई होगी। एनजीटी यदि ज्वाइंट कमेटी की रिपोर्ट की अनुशंसा को मानते हुए फैसला देता है तो 642.18 करोड़ रुपये हर्जाना लग सकता है। इससे पहले रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ का रुपये का हर्जाना लगाया गया था। यह रिफाइनरी ने भर दिया था। 

सिठाना गांव के सरपंच सतपाल ने एनजीटी में रिफाइनरी पर गैस केमिकल युक्त पानी छोडऩे की शिकायत की थी। इसकी जांच करने के लिए एनजीटी ने 26 नंवबर 2019 को ज्वाइंट कमेटी की गठन किया था। इस कमेटी में केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, हरियाणा स्टेट प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड, और सीएसआइआर-निरी को शामिल किया गया था। कमेटी का नोडल अधिकारी प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के सीनियर साइंटिस्ट भूपेंद्र को बनाया गया।  14 से 16 जनवरी तक ज्वाइंट कमेटी के सदस्य रिफाइनरी पहुंचे। कमेटी ने 12 से 14 फरवरी 2020 तक रिफाइनरी का दोबारा दौरा किया। उस दौरान वहां क्या-क्या परिवर्तन हुआ, इसकी रिपोर्ट तैयार की गई। साथ ही भूजल, वायु प्रदूषण स्वास्थ्य से लेकर पर्यावरण को हुए नुकसान विभिन्न एजेंसियों की रिपोर्ट के आधार पर फाइनल रिपोर्ट तैयार की गई। 80 पेज की रिपोर्ट में बनाई गई। 

रिपोर्ट को एनजीटी की साइट पर डाला

ऑक्सीजन में कमी एवं अवैध रूप से केमिकल युक्त पानी बहाने पर भूजल के दूषित होने पर 26.90 करोड़ रुपये, लोगों के स्वास्थ्य एवं पर्यावरण की क्षतिपूर्ति पर 92.59 करोड़ रुपये, भूजल को हुए नुकसान की क्षतिपूर्ति पर 540 करोड़ रुपये की गणना की गई। कुल  659.49 करोड़ रुपये का हर्जाना लगाया। इसमें 17.31 रुपये की राशी कम की गई है। यह राशि रिफाइनरी की ओर से भरी जा चुकी है।

18.46 लाख कम किए

कमेटी ने पहले 659.49 करोड़ रुपये का हर्जाना तय किया था। दूसरी कमेटी ने इसमें से 18.46 लाख रुपये कम किए हैं। दरअसल, यह राशि दो बार जुड़ गई थी। इसलिए इसे कम किया गया है।

तीन पंचायतों ने उठायाम मुद्दा

रिफाइनरी के साथ ही तीन पंचायतें लगती हैं। ददलाना, बोहली और सिठाना। सिठाना के सरपंच सतपाल ने बताया कि रिफाइनरी के आसपास चार किलोमीटर तक हालात बदतर हो रहे थे। पानी खराब होने लगा। लोग बीमार होने लगे। रिफाइनरी ने जो एनालिसिस यंत्र लगाए थे, वो खराब थे। रिपोर्ट गलत भेजी जा रही थी। उन्होंने एनजीटी में इस मामले को उठाया। इसके बाद ये हर्जाना लगा। अब रिफाइनरी प्रबंधन ने काफी सुधारात्मक काम किए हैं। 

ज्वाइंट कमेटी ने फाइनल रिपोर्ट जमा करवा दी है। अभी तक रिफाइनरी पर 17.31 करोड़ रुपये हर्जाना लगा है। 15 जुलाई को एनजीटी की सुनवाई है। फैसला आना अभी बाकी है। तभी पता लगेगा कितना हर्जाना लगा है। 

शैलेंद्र, रीजनल ऑफिसर, हरियाणा राज्य प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड पानीपत