पानीपत, जेएनएन। नूरवाला बरसत रोड कृपाल आश्रम के पास ओवरलोड प्राइवेट बस जोहड़ में जा गिरी। बस में करीब सौ यात्री सवार थे। दो की मौत हो गई, जबकि 14 घायल हो गए। यात्रियों में चीख पुकार मच गई। हादसा बस चालक को हार्ट अटैक आने की वजह से हुआ।

सुबह करीब साढ़े नौ बजे एक प्राइवेट बस बरसत गांव से पानीपत आ रही थी। बस ओवरलोड थी और उसमें करीब सौ यात्री सवार थे। कुछ यात्री बस की छत पर भी बैठे थे। बस को करनाल के कलहेड़ी गांव का रहने वाला 33 वर्षीय मुकेश चला रहा था। नूरवाला बरसत रोड कृपाल आश्रम भैंसवाल मोड़ के पास चालक को हार्ट अटैक आ गया। इससे बस असंतुलित होकर एक जोहड़ में जा गिरी। लोग मदद के लिए दौड़ पड़े। हाईवे पर जाम लग गया। 

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बस के शीशे तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला गया। चालक मुकेश सहित चंदौली गांव के 62 वर्षीय धनराज की मौके पर मौत हो गई। दो क्रेन से बस को बाहर निकाला गया। सिविल अस्पताल में 14 घायलों को भर्ती कराया गया। डीसी सुमेधा कटारिया घायलों को हाल जानने सिविल अस्पताल पहुंची। उन्होंने कहा कि इस घटना की जांच कराएंगी। वहीं पानीपत ग्रामीण सीट से प्रत्याशी महीपाल ढांडा भी घायलों को देखने सिविल अस्पताल पहुंचे। वहीं बताया जा रहा है कि बस को निकाला गया तो उसमें एक यात्री का शव पड़ा हुआ था। 

महिला ने थाम ली थी स्‍टेयरिंग, बचा नहीं पाई

चालक की सीट के पास ही एक महिला यात्री भी बैठी हुई थी। उसने देखा कि चालक को अटैक आ गया और बस अनियंत्रित हो गई। महिला ने स्‍टेयरिंग संभालने की कोशिश की, लेकिन बस अनियंत्रित होती चली गई। बस परिचालक की तरफ से पलट गई। 

जोहड़ में कूद गए लोग

बस को जोहड़ में पलटता देख लोग कूद पड़े। लोगों ने बस के शीशे तोड़ दिए। यात्रियों को बाहर निकालना शुरू किया। लोगों ने बस को सीधा करने की कोशिश की, लेकिन नहीं हो सकी। 

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एक के बाद एक एंबुलेंस पहुंची

हादसे की सूचना मिलते ही एक के बाद एक एंबुलेंस पहुंच गईं। करीब 12 एंबुलेंस से यात्रियों को अस्‍पताल ले जाया गया। 14 घायलों को सिविल अस्‍पताल ले जाया गया। इसके अलावा कई लोग दूसरे वाहन का सहारा लेकर चले गए।

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बस हटने के बावजूद जोहड़ में तलाश जारी

करीब 30 मिनट में यात्रियों को बाहर निकाला गया और 20 मिनट बाद बस को दो क्रेन की मदद से बाहर निकाला गया। कहीं कोई या‍त्री पानी में तो नहीं डूबा, इसलिए लोग और पुलिसकर्मी जोहड़ में तलाश जारी रखी। 

पहले से बीमार था चालक

चालक के परिजनों का आरोप है कि दिल की बीमारी से चालक पीडि़त था और इलाज के छुट्टी मांग रहा था।मालिक ने यह कहते हुए इंकार कर दिया था कि एक माह का नोटिस देने के बाद ही नौकरी छोड़ेगा। छुट्टी न मिलने से लगातार ड्यूटी कर रहा था। इस वजह से उसकी जान चली गई। 

Posted By: Anurag Shukla

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