कंडम होने के कगार पर पानीपत के 7 राजीव गांधी खेल स्टेडियम, डी-ग्रेड सूची में शामिल; परेशानी में खिलाड़ी
पानीपत के सात राजीव गांधी खेल स्टेडियमों को जर्जर हालत के कारण डी-ग्रेड में रखा गया है। खेल विभाग की रिपोर्ट में स्टेडियमों की खस्ताहाल स्थिति उजागर हुई है, जिससे खिलाड़ियों को परेशानी हो रही है। सिवाह स्टेडियम में 45 लाख रुपये का कार्य लंबित है। खिलाड़ियों को अभ्यास के लिए दूसरे मैदानों में जाना पड़ रहा है। नवीनीकरण की उम्मीद है।

कंडम होने के कगार पर पानीपत के 7 राजीव गांधी खेल स्टेडियम (प्रतीकात्मक फोटो)
जागरण संवाददाता, पानीपत। पानीपत में खेल सुविधाओं की हालत चिंताजनक होती जा रही है। जिले के सात राजीव गांधी खेल स्टेडियमों को कंडम घोषित करते हुए डी-ग्रेड की श्रेणी में रखा गया है।
खेल एवं युवा कार्यक्रम विभाग द्वारा की गई निरीक्षण रिपोर्ट मुख्यालय भेज दी गई है, जिसमें इन स्टेडियमों की जर्जर स्थिति, क्षतिग्रस्त ढांचों और खिलाड़ियों के लिए अनुपयोगी व्यवस्था को साफ तौर पर उजागर किया गया है।
शहर के विभिन्न क्षेत्रों में बने ये खेल स्टेडियम कभी स्थानीय खिलाड़ियों की तैयारी का प्रमुख केंद्र हुआ करते थे, लेकिन लंबे समय से मरम्मत न होने और रखरखाव की कमी के कारण अब खस्ताहाल स्थिति में पहुंच चुके हैं।
कई स्टेडियमों में मैदान की लेवलिंग बिगड़ चुकी है, रनिंग ट्रैक उखड़ गया है और बैठने की व्यवस्था टूट चुकी है। शौचालय, चेंजिंग रूम और स्टोर रूम की स्थिति तो और भी खराब बताई जा रही है।
इसमें सबसे गंभीर स्थिति सिवाह स्थित राजीव गांधी खेल स्टेडियम की पाई गई है, जहां पीडब्ल्यूडी बीएंडआर विभाग का करीब 45 लाख रुपये का कार्य पेंडिंग पड़ा है।
स्टेडियम में कई वर्षों से टूटी खिड़कियों, दरवाजों और शौचालयों की मरम्मत नहीं हुई। खिलाड़ियों ने कई बार शिकायतें भी कीं, लेकिन कार्य शुरू न होने के कारण स्टेडियम लगभग उपयोग के लायक नहीं बचा।
विभागीय अधिकारियों के मुताबिक लंबित कार्यों के लिए जल्द ही टेंडर जारी होने की उम्मीद है। टेंडर जारी होते ही मरम्मत, सफाई और ढांचे को मजबूत करने का काम शुरू किया जाएगा।
खिलाड़ियों का कहना है कि खराब सुविधाओं के कारण उन्हें अभ्यास के लिए दूसरे मैदानों में जाना पड़ रहा है। कई प्रशिक्षण सत्र रद्द करने पड़े हैं, जिससे प्रतियोगी परीक्षाओं और टूर्नामेंट्स की तैयारी प्रभावित हो रही है।
अभिभावक भी चिंता जता रहे हैं कि बच्चों को सुरक्षित और साफ-सुथरा खेल वातावरण नहीं मिल पा रहा। खेल विभाग ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि यदि इन स्टेडियमों की तुरंत मरम्मत नहीं की गई तो भविष्य में बड़े टूनार्मेंट या प्रशिक्षण शिविर आयोजित करना भी संभव नहीं होगा।
विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जिस तरह से रिपोर्ट में खामियों को चिन्हित किया गया है, उसके बाद मुख्यालय से इन स्टेडियमों के नवीनीकरण के लिए हरी झंडी मिल सकती है।

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