आतंकवाद के बदलते ढांचे को देख सुरक्षा एजेंसियों को कार्यप्रणाली अपग्रेड करनी होगी, उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में मंथन
पंचकूला के मोगीनंद में आसूचना ब्यूरो एनआईए एनएसजी और उत्तरी राज्यों के पुलिस महानिदेशकों की उच्च स्तरीय समन्वय बैठक हुई। बैठक में आतंकवाद और संगठित अपराध से निपटने के लिए साझा रणनीति पर चर्चा की गई। एनआईए के महानिदेशक दाते ने कहा कि आतंकवाद का ढांचा बदल रहा है इसलिए एजेंसियों को अपनी कार्यप्रणाली को अपग्रेड करना होगा।

जागरण संवाददाता, चंडीगढ़। डिजिटल माध्यमों और नई तकनीकों के प्रयोग से आतंकियों की रणनीति भी पहले से कहीं अधिक जटिल हो गई है। ऐसे में सुरक्षा एजेंसियों को अपनी कार्यप्रणाली को समयानुसार अपग्रेड करना होगा। यह बात एनआईए के महानिदेशक सदानंद दाते ने पंचकूला के मोगीनंद में हुई उच्च स्तरीय समन्वय बैठक में कही।
बैठक में देश की शीर्ष सुरक्षा एजेंसियों आसूचना ब्यूरो, राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए), राष्ट्रीय सुरक्षा गार्ड (एनएसजी) के प्रमुख तथा उत्तरी राज्यों पंजाब, हरियाणा, हिमाचल प्रदेश व केंद्र शासित प्रदेश के पुलिस महानिदेशक शामिल हुए। उद्देश्य आपसी तालमेल, क्षमता निर्माण तथा प्रिवेंटिव स्ट्रैटेजी के ज़रिये सुरक्षा तंत्र को और अधिक सशक्त बनाना था।
बैठक में उत्तर भारत में उभरते आतंकवादी खतरों और संगठित अपराध की बदलती चुनौतियों से निपटने के लिए साझा रणनीति पर गहन विमर्श किया गया। दाते ने कहा कि आतंकवाद का बुनियादी ढांचा निरंतर बदल रहा है। उन्होंने बल दिया कि गोल्डन आवर के दौरान सभी एजेंसियों को पता होना चाहिए कि कब, क्या और कैसे कार्रवाई करनी है। कहा कि संयुक्त अभ्यास और आपसी तालमेल ही आतंकवाद से लड़ने का सबसे प्रभावी हथियार है।
हरियाणा पुलिस की रणनीति और स्वाट टीमों की तैनाती
हरियाणा के पुलिस महानिदेशक शत्रुजीत कपूर ने बैठक में राज्य स्तरीय तैयारियों की जानकारी देते हुए बताया कि प्रदेश में 53 स्पेशल वेपन्स एंड टैक्टिक्स (स्वाट) टीमें तैनात हैं, जो किसी भी हिंसक या उग्र स्थिति में फर्स्ट रिस्पॉन्डर के रूप में कार्य करती हैं।
इसके अतिरिक्त बड़े स्तर पर पुलिस कर्मियों को उन्नत शस्त्र संचालन प्रशिक्षण दिया जा रहा है। कपूर ने कहा कि आतंकवाद और बड़े अपराधियों का गठजोड़ बड़ी चुनौती बनकर उभरा है जिससे निपटने के लिए क्षमता निर्माण आवश्यक है।
मीडिया में अपराधियों के नाम और तस्वीरों के प्रचार से उनकी गतिविधियों को बढ़ावा मिलता है और इससे युवाओं की सोच प्रभावित होती है। इस समस्या से निपटने के लिए हरियाणा विधानसभा ने मीडिया से अनुरोध करते हुए एक विशेष प्रस्ताव भी पारित किया है।
उन्होंने पड़ोसी राज्यों पंजाब, हिमाचल प्रदेश और चंडीगढ़ से भी अनुरोध किया कि वे अपने यहाँ भी मीडिया के मंचो से ऐसा न करने के लिए अनुरोध करे।
एनएसजी का प्रशिक्षण मॉडल और संयुक्त अभ्यास
एनएसजी के महानिदेशक बी श्रीनिवासन ने 'संयुक्त आतंकवाद विरोधी प्रतिक्रिया' विषय पर पावर प्वाइंट प्रेज़ेंटेशन दी। उन्होंने बताया कि हरियाणा, पंजाब, हिमाचल और चंडीगढ़ में अलग-अलग स्तर पर प्रशिक्षण सत्र एवं अभ्यास आयोजित किए गए हैं। अब तक हरियाणा में 609 कर्मियों, हिमाचल प्रदेश में 560 कर्मियों और चंडीगढ़ में 261 कर्मियों को बम निरोधक तकनीक, टैक्टिकल ड्राइविंग, कस्टमाइज्ड काउंटर टेरर कैप्सूल, फर्स्ट रिस्पॉन्डर ट्रेनिंग और राष्ट्रीय स्तर के संयुक्त अभ्यासों में प्रशिक्षित किया जा चुका है।
पड़ोसी राज्यों का अनुभव और साझा बेस्ट प्रैक्टिस
बैठक में पंजाब के डीजीपी गौरव यादव, चंडीगढ़ यूटी के डीजीपी डॉ. सागर प्रीत हुड्डा और हिमाचल प्रदेश के एडीजीपी ज्ञानेश्वर सिंह ने भी अपने-अपने राज्यों की बेस्ट प्रैक्टिसेज साझा की। इसके अलावा, एनआईए के आईजी विजय साखरे, हरियाणा सीआईडी के आईजी मनीष चौधरी तथा एसटीएफ हरियाणा के आईजी सतीश बालन ने भी प्रेज़ेंटेशन के माध्यम से आतंकवाद और संगठित अपराध से जुड़ी नई चुनौतियों पर अपने विचार रखे। बैठक के अंत में आए हुए अतिथियों का धन्यवाद आईजी सिमरदीप सिंह ने किया।
साझा संकल्प–एकजुट होकर आतंक पर कड़ा प्रहार
बैठक के समापन पर यह संदेश स्पष्ट रूप से उभरकर सामने आया कि आतंकवाद जैसी चुनौती से मुकाबला केवल हथियारों या तकनीक से ही नहीं, बल्कि एजेंसियों के बीच अटूट समन्वय और विश्वास से संभव है। जब खुफिया सूचनाएं समय पर साझा हों, जब प्रशिक्षण और क्षमता निर्माण निरंतर होता रहें और जब सभी सुरक्षा बल गोल्डन आवर में त्वरित प्रतिक्रिया दें। तभी राष्ट्र की सुरक्षा दीवार अभेद्य बन सकती है।
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