हरियाणा के शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा ने दिवंगत अटल बिहारी के साथ का संस्मरण सुनाया। 20 अक्टूबर 1980 को महेंद्रगढ़ में अटल बिहारी वाजपेयी जी की जनसभा का समय तय हुआ। सभा की तैयारियों के लिए तत्कालीन प्रदेश प्रभारी कुशाभाऊ ठाकरे हरियाणा भाजपा के अध्यक्ष रहे ओमप्रकाश ग्रोवर के रेवाड़ी स्थित निवास पर आए। रेवाड़ी, नारनौल और महेंद्रगढ़ के वरिष्ठ भाजपा पदाधिकारी इस बैठक में एकत्रित हुए।

महेंद्रगढ़ जिला की तरफ से मैं इस बैठक में हिस्सा ले रहा था। नारनौल के जिला प्रधान मुकुट बिहारी संघी ने बैठक में प्रस्ताव रखा कि अटलजी को पूरे क्षेत्र की तरफ से पार्टी के लिए धनराशि भेंट करनी चाहिए। इसे सभी ने मान लिया और मुकुट बिहारी संघी ने स्वयं 21 हजार रुपये की थैली देने का आश्वासन दिया। इसके बाद रेवाड़ी के पदाधिकारियों ने भी 21 हजार रुपये की थैली देने का प्रस्ताव रखा। मैं वहां मौजूद पदाधिकारियों में नया था तो मैंने भी दोनों शहरों को देखते हुए महेंद्रगढ़ से 21 हजार रुपये की थैली देने का एलान कर दिया।

बैठक में उपस्थित पदाधिकारी मुझ पर हंस पड़े। हालांकि कुशाभाऊ ठाकरे ने मेरा मनोबल बढ़ाया और बैठक में उपस्थित पदाधिकारियों के सामने घोषणा की कि यह युवा एक दिन प्रदेश का नेतृत्व करेगा। खैर, महेंद्रगढ़ शहर में अटल बिहारी वाजपेयी की बड़ी जनसभा हुई, इसमें रेवाड़ी-नारनौल की तरफ से 21-21 हजार और महेंद्रगढ़ की तरफ से अटल बिहारी वाजपेयी जी को एक लाख रुपये की थैली भेंट की गई। इस सभा में 40 हजार लोग उपस्थित थे।

अटलजी ने कार्यालय का ताला नहीं तोड़ने दिया

महेंद्रगढ़ की जनसभा खत्म होने के साथ ही अटल बिहारी वाजपेयी ने मुझसे पूछा-रामबिलास आपके बैठने के लिए क्या कोई कार्यालय है यहां पर। मैंने कहा, कार्यालय तो है मगर थोड़ा छोटा है और नजदीक बाजार में है। इस पर अटलजी बोले, चलो, आपके कार्यालय में चलकर चाय पीते हैं। अटलजी पैदल ही कार्यालय की तरफ चल दिए। कार्यालय पहुंचे तो कार्यालय पर ताला लगा था क्योंकि चाबी तो कार्यालय प्रभारी सेवानिवृत्त मुख्य अध्यापक बनारसी दास तिवारी के पास रहती थी और वे जनसभा की व्यवस्थाओं में लगे थे।

जब अटलजी कार्यालय के समक्ष खड़े थे तो भाजपा के कार्यकर्ता सतबीर यादव ने ताला तोड़ने के लिए हाथ में पत्थर उठाते हुए कहा कि साहब, एक रुपये में नया ताला आ जाएगा। अटलजी ने सतबीर यादव का हाथ रोकते हुए कहा कि देश का एक रुपया क्यों बर्बाद किया जाए, कार्यालय फिर कभी आ जाएंगे। हालांकि कार्यालय के नजदीक तब डॉ. जगदंबा प्रसाद खेतान ने नया क्लीनिक बनाया था, वे आग्रह कर अटलजी को अपने क्लीनिक पर चाय पिलाने ले गए। इसके बाद हांफते हुए बनारसी दास तिवारी भी वहां आ पहुंचे और उन्होंने कार्यालय का ताला खोला। अटलजी कार्यालय में 15 मिनट तक रहे और फिर से चाय पी।

जब अटलजी ने भिजवाई अपनी जीप

महेंद्रगढ़ कार्यालय से निकलते हुए अटलजी ने मुझसे पूछा कि गांव-देहात में आवागमन के लिए आपके पास क्या वाहन है तो मैंने बताया कि सिर्फ मोटरसाइकिल है। यह सुनकर वे आगे चल दिए। करीब 15 दिन बाद एक दिन अचानक भाजपा के तत्कालीन राष्ट्रीय महामंत्री यज्ञदत्त शर्मा जी का फोन आया कि आपके लिए अटलजी ने अपनी जीप भिजवाने का निर्देश दिया है।

एक दिन बाद ही अटलजी के नाम पर पंजीकृत यूपीक्यू 2056 नंबर की जीप पहुंच गई, जिसे मैंने पार्टी के प्रचार के लिए खूब चलाया। एक बार जीप में पार्टी के आठ-दस कार्यकर्ता बैठे थे तो पुलिस ने नाके पर रोक लिया। मगर जब पुलिसकर्मियों को पता चला कि जीप का पंजीकरण अटल जी के नाम पर है तो उन्होंने तुरंत छोड़ दिया।

पंडितजी हमारी ससुराल नहीं है तो चिढ़ा रहे हो क्या

अटलजी कितने बेबाक और हास्य-विनोद स्वभावी थे, इसका एक संस्मरण मुझे याद आता है कि मैं नई दिल्ली में महेंद्रगढ़-नारनौल के कुछ कार्यकर्ताओं को उनसे मिलवा रहा था। मेरे ससुराल से भी इस प्रतिनिधमंडल में छाजूराम यादव, शीशराम यादव आए हुए थे, मैंने उनका परिचय कराया कि ये मेरी ससुराल से हैं तो अटलजी ने तपाक से कहा कि पंडितजी हमारी ससुराल नहीं है तो हमें चिढ़ा रहे हो क्या? अटलजी जैसे बड़े दिग्गज और अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त नेता की ये खुशमिजाजी हमें हमेशा याद रहेगी। वे हमारे के लिए हमेशा प्रेरणास्रोत रहेंगे।

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Posted By: Kamlesh Bhatt