हरियाणा के किसानों के लिए फायदेमंद रही प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना, प्रीमियम से चार गुणा लिया क्लेम
हरियाणा के किसानों के लिए राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना मौसम आधारित फसल बीमा योजना और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना से प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अधिक लाभदायक साबित हुई है। सात साल में किसानों ने अपनी जेब से 1943 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया है। जबकि उन्होंने बीमा कंपनियों से 7648 करोड़ रुपये का क्लेम लिया। यानी चार गुणा अधिक क्लेम लिया है।

चंडीगढ़, सुधीर तंवर। किसानों को फसल खराबे के मुआवजे के लिए पूर्व में संचालित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एनएआइएस), मौसम आधारित फसल बीमा योजना (डब्ल्यूबीसीआइएस) और संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना (एमएनएआइएस) की तुलना में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना अधिक लाभदायक साबित हुई है।
प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना से मिला किसानों का लाभ
वर्ष 2005 से 2014 तक संचालित तीन अलग-अलग बीमा योजनाओं के तहत हरियाणा में किसानों को फसल खराबे के लिए जहां सिर्फ 164 करोड़ 30 लाख रुपये का क्लेम मिल पाया था, वहीं 2016 में प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना लागू होने के बाद अब तक 7648 करोड़ 33 लाख रुपये का क्लेम मिल चुका है। इस दौरान किसानों ने अपनी जेब से 1943 करोड़ रुपये का प्रीमियम दिया, जबकि फसल खराबे के लिए 7648.33 करोड़ रुपये का भुगतान बीमा कंपनियों से लिया।
किसानों ने प्रीमियम से क्लेम में ली चार गुणा राशि
किसानों ने प्रीमियम से करीब चार गुणा राशि क्लेम में ली। हालांकि इस दौरान प्रदेश सरकार ने भी करीब 2575 करोड़ रुपये और केंद्र सरकार ने 2295 करोड़ रुपये का प्रीमियम सरकारी खजाने से बीमा कंपनियों को दिया। इस तरह बीमा कंपनियों ने कुल 6812.88 करोड़ रुपये का प्रीमियम लिया। इसके बावजूद उन्हें प्रीमियम की तुलना में किसानों को क्लेम में करीब 835 करोड़ रुपये अधिक देने पड़े।
पहले बीमा कंपनियों को करनी पड़ती थी अधिक भरपाई
हरियाणा में फसलों का बीमा नहीं कराने वाले किसानों को सरकार जहां 25 से 50 प्रतिशत फसल खराबे पर नौ हजार रुपये, 50 से 75 प्रतिशत खराबे पर 12 हजार रुपये और 75 प्रतिशत से अधिक खराबे पर 15 हजार रुपये प्रति एकड़ मुआवजा देती है, वहीं बीमित किसानों को इसकी तुलना में बीमा कंपनियों द्वारा कहीं अधिक भरपाई की जाती है। मौजूदा वित्तीय वर्ष में बीमा योजना की अधिसूचना में लेटलतीफी के कारण बड़ी संख्या में किसान योजना का लाभ उठाने से वंचित रह गए हैं, जबकि बाढ़ में फसल तबाह होने के कारण इन किसानों को बीमा कंपनियों अच्छी खासी राहत से मिल सकती थी।
किसानों ने ऐसे उठाया बीमा योजनाओं का लाभ
बीमा योजना -साल - किसानों ने कराया बीमा -प्रीमियम दिया (करोड़ रुपये) -किसान लाभान्वित -क्लेम मिला (करोड़ रुपये)
1. राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना - खरीफ 2004 से रबी 2009 -6,35,751 -24.12 -1,89,659 -55.31 2.
2. मौसम आधारित फसल बीमा योजना -रबी 2009 से रबी 2013-14 -3,58,051 -159.46 -85,830 -60.59 3.
3. संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना -खरीफ 2011 से रबी 2013-14 -2,59,416 -61.70 -44,607 48.40
4. प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना -खरीफ 2016 से रबी 2022-23 -1,05,51,213 -6812.88 -7648.33
बीमा कंपनियों की मनमानी पड़ रही भारी
तीन साल से घटा किसानों का रुझान क्लेम का भुगतान करने में बीमा कंपनियों की मनमानी के कारण पिछले तीन साल में फसलों का बीमा कराने को लेकर किसानों का रुझान कुछ कम हुआ है। खरीफ 2019 में हरियाणा में 8.2 लाख किसानों ने फसलों का बीमा करवाया था, जो कि 8.3 प्रतिशत की वृद्धि के साथ खरीफ 2020 में बढ़कर 8.88 लाख हो गया। खरीफ 2021 में यह संख्या 16.7 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7.40 लाख तक गिर गई तो खरीफ 2022 में यह थोड़ा सुधरकर 7.42 लाख हो गई।
यह रहा आंकड़ा
इसी तरह रबी 2019-20 में 8.91 लाख किसानों ने बीमा करवाया था, जो रबी 2020-21 में 14.5 प्रतिशत की गिरावट के साथ 7.62 लाख रह गए। रबी 2021-22 में किसानों की संख्या घटकर 7.17 लाख हो गई, जो 5.9 प्रतिशत कम थी। रबी 2022-23 में किसानों की संख्या और घटकर 6.54 लाख हो गई है, जो पिछले वर्ष से 8.8 प्रतिशत कम है।
फसल बीमा योजना क्यों हुई फेल
फसल बीमा योजना में किसानों की घटती दिलचस्पी का मुख्य कारण क्लेम के भुगतान में देरी और फसल सर्वे में नुकसान का कम क्षेत्र दर्ज करना है। इसके अलावा फसल बीमा योजना में कवर किसानों को फसल का नुकसान होने के 72 घंटे के अंदर कंपनी को सूचना देनी होती है। जो किसान ऐसा नहीं कर पाते, उन्हें नुकसान के बावजूद बीमा नहीं मिलता।
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