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ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाए या जमानत दें? पंचकूला के स्कूल में बच्ची से क्रूरता मामले में 8 साल के बच्चे पर फैसला आज

Published: Tue, 03 Nov 2026 09:32 AM (IST)Updated: Tue, 03 Nov 2026 09:37 AM (IST)

पंचकूला के स्कूल में 6 साल की बच्ची से क्रूरता मामले में 8 साल के बच्चे की ब्रेन मैपिंग रिपोर्ट ...और पढ़ें

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

फोटो एआई द्वारा जनरेट की गई है।

HighLights

  1. 8 साल के बच्चे की ब्रेन मैपिंग रिपोर्ट आज आएगी

  2. जुवेनाइल जस्टिस बोर्ड बच्चे के भविष्य पर करेगा फैसला

  3. स्कूल स्टाफ की लापरवाही पर जांच जारी, प्रिंसिपल सस्पेंड

जागरण संवाददाता, पंचकूला। छह साल की बच्ची से क्रूरता के मामले में जांच के दौरान सामने आया है कि आठ साल का बच्चा स्कूल में ज्यादा देर नहीं टिकता था। वह कुछ समय स्कूल में रहने के बाद ही घर लौट जाता था।

उसका घर भी स्कूल के पास ही है। अब जांच में यह पहलू अहम हो गया है कि बच्चा स्कूल से कब और कैसे घर जाता था, उसकी गैर-मौजूदगी पर किसी ने ध्यान दिया या नहीं और घटना वाले दिन उसकी गतिविधियां क्या थीं।

इसी बीच बच्चे की सोमवार को चंडीगढ़ के सेक्टर-32 स्थित मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल में ब्रेन मैपिंग कराई। शाम करीब छह बजे उसे वापस बाल सुधार गृह भेज दिया।

इस परीक्षण की रिपोर्ट आज (मंगलवार) को आएगी। रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी। अब अंबाला में काउंसलिंग और पूछताछ के दौरान उसकी दिनचर्या और स्कूल से जुड़े पहलुओं को समझने का प्रयास होगा।

अब बच्चे को दोबारा जुवेनाइल जस्टिस (जेजे) बोर्ड के समक्ष पेश किया जाएगा। बोर्ड ही उसकी सुरक्षा और परिस्थितियों को देखते हुए तय करेगा कि उसे अंबाला के ऑब्जर्वेशन होम में रखा जाए या जमानत दी जाए। यदि उसे वहां रखा जाता है तो इसकी अवधि भी बोर्ड तय करेगा।

वहीं घायल बच्ची पीजीआइ चंडीगढ़ में उपचाराधीन है और उसके स्वास्थ्य में पहले से काफी सुधार हुआ है। बच्ची के पिता का कहना है कि बेटी के स्वास्थ्य, शिक्षा और भविष्य को देखते हुए उन्हें उचित मुआवजा मिलना चाहिए। क्योंकि बेटी बहुत छोटी है और उसके बेहतर भविष्य के लिए आर्थिक तौर पर मदद की दरकार रहेगी।

घटना के इन बिंदुओं पर जांच कर रही कमेटी

घटना के समय स्कूल में कितना स्टाफ था। उस समय बच्चों की संख्या कितनी थी और क्लास में कौन शिक्षक था। स्कूल में लगे सीसीटीवी कैमरों के फुटेज देखने की व्यवस्था प्रिंसिपल के कमरे में थी।

ऐसे में जब बच्ची स्कूल से बाहर निकली, तब प्रिंसिपल स्कूल में थी या नहीं। सीसीटीवी फुटेज को समय पर क्यों नहीं देखा गया। दोपहर की शिफ्ट में स्कूल छोटी कक्षा के बच्चों के लिए होता है, तो पहली मंजिल में 12वीं कक्षा का कमरा क्यों खुला था। जब चौकीदार ने क्लासरूम के दरवाजे को बंद किया तो उसने अंदर जाकर पूरी जांच क्यों नहीं की और बिना जांच के ताला लगा दिया।

प्रिंसिपल और शिक्षकों से ढाई घंटे तक पूछताछ

वहीं दूसरी तरफ बच्ची से मारपीट की घटना के बाद शिक्षा विभाग समेत तीन अलग-अलग समितियां मामले की जांच में जुटी हैं। दो महिला शिक्षकों और प्रिंसिपल नीलू को सस्पेंड किया जा चुका है।

सोमवार को स्कूल में बीईओ की अध्यक्षता में गठित जांच टीम ने ढाई घंटे तक पूछताछ की। इस दौरान निलंबित दोनों टीचर, प्रिंसिपल और स्कूल का पूरा स्टाफ मौजूद रहा।

टीम मामले में लापरवाही से लेकर कार्रवाई में हुई देरी की हर कड़ी को खंगाल रही है। जांच समिति की रिपोर्ट आने के बाद स्कूल के अन्य स्टाफ सदस्यों पर भी कार्रवाई हो सकती है।

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