चंडीगढ़, [महेश कुमार वैद्य]। Haryana Cabinet Expension को देखकर लगता है कि मनोहरलाल सरकार की पहली पारी की तरह दूसरी पारी में उसके मंत्रियों से केंद्रीय मंत्रियों राव इंद्रजीत सिंह और कृष्णपाल गुर्जर का टकराव नहीं होगा। मनोहर का नया मंत्रिमंडल मोदी के मंत्रियों के मिजाज के अनुकूल है। मंत्रिमंडल गठन में केंद्रीय मंत्री राव इंद्रजीत सिंह सबसे मजबूत स्थिति में रहे हैं। उन्होंने न केवल अपने दो खास चहेतों को मंत्री बनवाया बल्कि अपने विरोधी को मंत्रिमंडल से दूर रखने में भी कामयाबी हासिल की।

मोदी के मंत्रियों के मिजाज के अनुकूल है मनोहर के नए मंत्री, राव इंद्रजीत ने दो चहेतों को बनवाया मंत्री

केंद्रीय मंत्री कृष्णपाल गुर्जर व रतनलाल कटारिया के लोकसभा क्षेत्रों के जिन मंत्रियों को मनोहर मंत्रिमंडल में जगह मिली है, उनका दोनों से टकराव नहीं है। दोनों के लोकसभा क्षेत्रों से स्वभाविक दावेदारों को जगह मिली है।

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राव इंद्रजीत का रहा दबदबा

राव इंद्रजीत सिंह समर्थक बावल के विधायक डॉ. बनवारीलाल को जहां कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, वहीं नारनौल के विधायक ओमप्रकाश यादव को राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार) का दायित्व सौंपा गया है। लगातार दूसरी बार जीत के कारण डॉ. लाल की स्वभाविक दावेदारी थी लेकिन महेंद्रगढ़ जिले में लगातार दूसरी बार चुनाव जीते डॉ. अभय सिंह यादव की दावेदारी भी मजबूत मानी जा रही थी। अंतिम समय तक भी मुख्यमंत्री मनोहर लाल का झुकाव अभय सिंह की ओर माना जा रहा था। लेकिन राव इंद्रजीत उन्हें किसी भी सूरत में मंत्री बनते देखना नहीं चाहते थे।

राव पिछले कई दिनों से डॉ. अभय सिंह की जगह नारनौल के विधायक ओमप्रकाश यादव को मंत्री बनवाना चाहते थे। ओमप्रकाश यादव का नाम आगे कर राव ने एक तीर से दो निशाने साधने का काम किया। इससे एक ओर जहां उनके विरोधी राव अभय सिंह के नाम पर कैंची चल गई वहीं ओमप्रकाश यादव की लॉटरी खुल गई।

ओमप्रकाश यादव भी लगातार दूसरी बार चुनाव जीते हैं। विशेष बात यह है कि राव ने अपने गुडग़ांव लोकसभा क्षेत्र से बाहर भिवानी-महेंद्रगढ़ में भी अपना जलवा दिखाया है। अपने लोकसभा क्षेत्र से डॉ. बनवारी व भिवानी-महेंद्रगढ़ से ओमप्रकाश यादव को मंत्री बनवाकर केंद्रीय मंत्री ने यह साबित कर दिया है कि उनकी दिल्ली दरबार में पकड़ ढीली नहीं हुई है।

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गुर्जर व कटारिया का नहीं विरोध

फरीदाबाद लोस का प्रतिनिधित्व कर रहे कृष्णपाल गुर्जर और अंबाला लोस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व कर रहे रतनलाल कटारिया का अपने अपने क्षेत्रों से मंत्री बने विधायकों से किसी तरह का टकराव नहीं है। हालांकि लोकसभा चुनाव से पूर्व विज की कटारिया के साथ अनबन थी, लेकिन लोस चुनाव के दौरान दोनों में दोस्ती हो गई थी। दोनों मंत्रियों से किसी तरह का विरोध नहीं है। उनके लोकसभा क्षेत्र से अनिल विज व कंवरपाल गुर्जर की स्वभाविक दावेदारी थी। इस दावेदारी के साथ कटारिया भी खड़े हुए थे। यहां पर पसंद- नापसंद की बजाय विज और गुर्जर की वरिष्ठता को सम्मान दिया गया।

फरीदाबाद लोकसभा क्षेत्र से कृष्णपाल गुर्जर का मूलचंद शर्मा से किसी तरह का टकराव नहीं है। ब्राह्मण वर्ग को प्रतिनिधित्व देने के लिए मूलचंद शर्मा पार्टी की स्वभाविक पसंद थे। रामबिलास शर्मा के समधी होने, कृष्णपाल गुर्जर से संबंध अच्छे होने व लगातार दूसरी जीत ने उन्हें मंत्री बना दिया।

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दुष्यंत की पसंद को सम्मान

मंत्रिमंडल गठन में उपमुख्यमंत्री व जजपा नेता दुष्यंत चौटाला की पसंद का भी पूरा ध्यान रखा गया है। अनुसूचित जाति वर्ग से मंत्री बने अनूप धानक दुष्यंत चौटाला की सोशल इंजीनियरिंग का परिणाम है। अभी दुष्यंत के पास विकल्प खुले हुए हैं। माना जा रहा है कि आगामी विस्तार में जजपा कोटे से कम से कम एक मंत्री और बनेगा।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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