Haryana News: काम का बोझ तो बहुत, लेकिन 6 महीने से नहीं मिला मानदेय; स्वास्थ्य विभाग को आशा वर्करों की नहीं चिंता
हरियाणा में 20 हजार से अधिक आशा वर्करों पर काम का बोझ लगातार बढ़ रहा है लेकिन उन्हें समय पर पारिश्रमिक नहीं दिया जा रहा है। आशा वर्करों के काम की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बनाई गई सरकारी एप में 40 तरह के काम दर्ज हैं। लेकिन उनका मानदेय समय से नहीं मिल रहा है। स्वास्थ्य विभाग को इसकी चिंता नहीं दिख रही है।

राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। हरियाणा के विभिन्न जिलों में काम करने वाली करीब 20 हजार आशा वर्करों पर काम का बोझ तो लगातार बढ़ रहा है, लेकिन उन्हें पारिश्रमिक समय से नहीं दिया जाता। आशा वर्करों के काम की रिपोर्ट तैयार करने के लिए बनाई गई सरकारी एप में 40 तरह के काम दर्ज हैं।
इसके अलावा भी केंद्र व राज्य सरकार के विभिन्न सर्वेक्षण कार्यों में आशा वर्करों की मदद ली जाती है, मगर उन्हें समय से पारिश्रमिक देने की चिंता स्वास्थ्य विभाग की ओर से नहीं की जा रही है। किसी जिले में आशा वर्कर को तीन माह से और किसी जिले में छह माह से पारश्रमिक नहीं मिल पाया है।
पारिश्रमिक के अभाव में आशा वर्करों को जीवन यापन करने में काफी परेशानी आ रही है। बीपीएल और अनुसूचित जाति वर्ग की महिलाओं की संस्थागत (अस्पतालों में) प्रसूति पर 1500 रुपये देने का प्रविधान है, ताकि यह महिलाएं जच्चा-बच्चा की अच्छी सेहत के लिए इस राशि को खर्च कर सकें, लेकिन 1500 रुपये की इस राशि को प्राप्त करने के लिए स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों ने इतनी कड़ी शर्तें लगाई हुई हैं कि अधिकतर महिलाएं इस राशि के लाभ से वंचित रह जाती हैं।
आशा वर्करों को प्रत्येक संस्थागत प्रसूति पर 300 रुपये का लाभ प्रदान करने का प्रविधान है। स्वास्थ्य विभाग की ओर से आशा वर्करों की इस राशि का पिछले चार माह से भुगतान नहीं किया गया है।
जननी सुरक्षा वाला भी पैसा फंसा
हरियाणा की आशा वर्करों की इन सभी समस्याओं के समाधान की मांग को लेकर आशा वर्कर्स यूनियन के राज्यस्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने मंगलवार को चंडीगढ़ में स्वास्थ्य सचिव सुधीर राजपाल के साथ बैठक की।
यूनियन की राज्य महासचिव सुनीता, उप प्रधान रानी, कोषाध्यक्ष अनीता, सचिव मीरा व सुदेश तथा राज्य कमेटी की सदस्य वंदना ने स्वास्थ्य सचिव के समक्ष इन सभी समस्याओं को उठाया और उनके समाधान का आग्रह किया।
राज्य महासचिव सुनीता ने स्वास्थ्य सचिव को बताया कि जननी सुरक्षा योजना के लाभ की राशि अभी तक पात्र महिलाओं के साथ-साथ आशा वर्करों को प्रदान नहीं की गई है। ऐसा होने पर महिलाओं का इस योजना के प्रति भरोसा कम होता जा रहा है।
हड़ताल के दौरान 73 दिन का पैसा बकाया
राज्य महासचिव ने बैठक में अधिकारियों को जानकारी दी कि साल 2023 में हड़ताल के दौरान 73 दिन का पैसा बकाया है। बाकी सभी विभागों के कर्मचारियों का पैसा जारी कर दिया गया है, लेकिन आशा वर्करों का पैसा नहीं मिला है। एक आशा वर्कर की यह राशि 9417 रुपये बकाया है।
गर्भवती महिलाओं की डिलीवरी के पास उन्हें वापस घर जाने के लिए सरकार की ओर से एंबुलेंस सुविधा प्रदान नहीं की जाती। आशा वर्करों की रिटायरमेंट आयु 60 साल है।
रिटायरमेंट के दौरान एकमुश्त दो लाख रुपये देने का प्रविधान है, लेकिन यूनियन की पदाधिकारियों ने स्वास्थ्य सचिव से मांग की है कि जो आशा वर्कर ज्यादा बीमार हैं तथा जिनका स्वास्थ्य ठीक नहीं हैं और वे समय से पहले नौकरी छोड़ना चाहती हैं, तो सरकार उन्हें भी दो लाख रुपये का एकमुश्त लाभ प्रदान करे।
आशा वर्करों को मिला भरोसा
स्वास्थ्य विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव सुधीर राजपाल ने इस प्रस्ताव को सरकार के संज्ञान में लाने का भरोसा दिलाया है। यूनियन की पदाधिकारियों ने सरकार से अनुरोध किया है कि आशा वर्करों के लिए निर्धारित एप के संचालन और उस पर प्रोफार्मा भरने की प्रक्रिया को सरल किया जाना चाहिए।
राज्य महासचिव सुनीता ने दावा किया कि स्वास्थ्य सचिव ने विभागीय स्तर की समस्याओं के जल्दी समाधान का भरोसा दिलाया है। साथ ही मुख्यमंत्री कार्यालय में छह माह से लंबित 73 दिन के पारिश्रमिक के भुगतान की अनुमति संबंधी फाइल का फॉलोअप कराया जाएगा।
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