चंडीगढ़, जेएनएन।  सीआइडी (क्राइम इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट) को सीधे मुख्यमंत्री मनोहर लाल के अधीन किए जाने के बाद गृह मंत्री अनिल विज के तेवर ठंडे पड़ गए हैं। उन्होंने मुख्यमंत्री से किसी तरह के विवाद से इन्कार करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री सुप्रीम हैं और उनसे कभी कोई मतभेद नहीं रहा। मैंने केवल गृह मंत्री के नाते सीआइडी से ब्रीफिंग मांगी थी जो बुधवार से शुरू हो गई है। सीआइडी किसके पास है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता।

कहा, सीआइडी किसके पास है इससे कोई फर्क नहीं पड़ता, ब्रीफिंग शुरू हुई

नई व्यवस्था में गृह मंत्री होने के नाते नियमित तौर पर सीआइडी की ब्रीफिंग अनिल विज को भी होगी। सीआइडी सीएम को अलॉट किए जाने के बाद भी बृहस्पतिवार को सीआइडी के एसपी विवेक कालिया अनिल विज को ब्रीफिंग करने के लिए पहुंचे। दिल्ली से जुड़े भाजपा सूत्रों का कहना है कि पार्टी नेतृत्व ने ही यह बीच का रास्ता निकाला है। इस मुद्दे पर विज से नेतृत्व की खुलकर बात भी होने की सूचना है। सूत्रों के मुताबिक करीब दो सप्ताह पहले ही तय हो गया था कि सीआइडी सीएम के पास ही रहेगी। कुछ तकनीकी पेंच होने की वजह से देरी हो रही थी।

मुख्यमंत्री को बताया सुप्रीम, कोई महकमा लेने-देने का अधिकार

सीआइडी का प्रभार वापस लिए जाने के बावजूद सहज दिख रहे विज ने कहा कि मुख्यमंत्री किसी भी विभाग को ले सकते हैं या विभाजित कर सकते हैं। मैं तो बस यही मांग रहा था कि जब तक मैं गृह मंत्री हूं, मेरे पास सीआइडी की रिपोर्ट आती रहे। उन्होंने कहा कि उनके और मुख्यमंत्री के बीच कोई मतभेद नहीं है क्योंकि मुख्यमंत्री उनके बेस्ट फ्रेंड (सबसे करीबी मित्र) हैं। वहीं, दिल्ली में हरियाणा भाजपा के प्रभारी और राष्ट्रीय महासचिव अनिल जैन ने कहा कि यह मुद्दा सुलझ गया है। मुख्यमंत्री सरकार के प्रमुख हैं और वह जो विभाग चाहें अपने पास रख सकते हैं।

गौरतलब है कि सीआइडी पर चल रहे विवाद का बुधवार देर रात को पटाक्षेप हो गया था जब मुख्य सचिव केशनी आनंद अरोड़ा ने राज्यपाल के हवाले से विज से सीआइडी वापस लिए जाने का नोटिफिकेशन जारी कर दिया। सीआइडी, राजभवन मामलों और कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभागों को सीएम कार्यालय से जोड़ा गया है। परिवहन मंत्री मूल चंद शर्मा को चुनाव विभाग दिया गया है, जबकि कला एवं सांस्कृतिक मामलों का विभाग अब शिक्षा मंत्री कंवर पाल संभालेंगे। पहले यह महकमा परिवहन मंत्री मूल चंद शर्मा देख रहे थे।

सीएम के पास पहले से थे दो विभाग, फिर से नोटिफिकेशन पर सवाल

पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट के एडवोकेट हेमंत कुमार ने ताजा नोटिफिकेशन पर सवाल उठाते हुए कहा कि विगत 13 और 14 नवंबर को जारी नोटिफिकेशनों मे साफ है कि मुख्यमंत्री के पास वह सभी अन्य विभाग होंगे जो किसी मंत्री को नहीं दिए गए हैं। ऐसे में 22 जनवरी के नोटिफिकेशन में कार्मिक एवं प्रशिक्षण और राजभवन मामलों का विभाग मुख्यमंत्री को फिर से आबंटित करने का क्या औचित्य है। पहले से ही यह दोनों विभाग मुख्यमंत्री के पास थे क्योंकि इन्हें किसी मंत्री को आवंटित नहीं किया गया था।

विज बोले- अभय चौटाला ने क्या खोल ली ज्योतिषी की दुकान

गृह मंत्री विज ने इनेलो विधायक अभय चौटाला की टिप्पणी, जजपा का कभी भी भाजपा में विलय हो सकता है, पर पलटवार किया है। उन्होंने कहा कि लगता है अभय चौटाला ने ज्योतिषी की दुकान खोल ली है। साथ ही अभय ने तोता भी रख लिया है जो उन्हें रोजाना ऐसी बातें बताता है।

 

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Posted By: Sunil Kumar Jha

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