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    हरियाणा: बारिश से पानी की मांग घटी, पंजाब से भाखड़ा में 2500 क्यूसेक पानी कम करने की मांग

    Updated: Sat, 30 Aug 2025 10:11 PM (IST)

    हरियाणा ने भाखड़ा मेनलाइन में पानी की आपूर्ति कम करने का दबाव बनाया है क्योंकि बारिश के कारण पानी की मांग घट गई है। सिंचाई विभाग ने बीबीएमबी और पंजाब सरकार को पत्र लिखकर 2500 क्यूसेक पानी कम करने का आग्रह किया है। पहले भी पानी को लेकर दोनों राज्यों में विवाद हो चुका है।

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    भाखड़ा मेनलाइन में पंजाब से छोड़ा जा रहा ज्यादा पानी (फाइल फोटो)

    राज्य ब्यूरो, चंडीगढ़। भारी बरसात से नदी-नालों में उफान से विभिन्न स्थानों पर बाढ़ की स्थिति है। प्रदेश में पानी की घटी मांग को देखते हुए हरियाणा ने अब भाखड़ा मेनलाइन में आपूर्ति घटाने के लिए दबाव बनाया है।

    भाखड़ा ब्यास मैनेजमेंट बोर्ड (बीबीएमबी) और पंजाब सरकार को लिखे पत्र में हरियाणा के सिंचाई और जल प्रबंधन विभाग के मुख्य अभियंता ने तर्क दिया है कि बारिश के चलते पानी की मांग घटी है। इसलिए तुरंत प्रभाव से भाखड़ा मेन लाइन में छोड़े जाने वाले पानी में 2500 क्यूसेक की कटौती की जाए।

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    पत्र के मुताबिक 29 अगस्त को हरियाणा कांटेक्ट प्वाइंट पर पानी का डिस्चार्ज आठ हजार 894 क्यूसेक पाया गया, जबकि हरियाणा ने सात हजार 900 क्यूसेक की मांग की थी।

    इससे पहले 26 अगस्त को भी हरियाणा ने इंडेंट घटाकर सात हजार 900 क्यूसेक किया था, लेकिन पानी का डिस्चार्ज कम नहीं किया गया।

    अब लगातार बारिश से नहरी पानी की मांग और घट गई है। इसी वजह से शुक्रवार को नया मांगपत्र दिया गया है, जिसमें केवल छह हजार 250 क्यूसेक पानी की जरूरत बताई गई है।

    मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने हाल ही में पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत सिंह मान को पत्र लिखकर बाढ़ग्रस्त क्षेत्र में सहायता के लिए हाथ बढ़ाया था।

    ऐसे में भाखड़ा मेनलाइन में पानी घटाने के लिए लिखे पत्र पर नया विवाद छिड़़ गया है। पंजाब से पानी का कम निकास सीधे-सीधे नदियों और बांधों पर दबाव बढ़ाएगा। पंजाब में इस समय विभिन्न जिलों के सैकड़ों गांव पानी में डूबे हुए हैं।

    रावी, ब्यास और सतलुज का जलस्तर अभी भी खतरे के निशान पर है। कई जगहों पर तट बांध टूटने की आशंका बनी हुई है।

    पंजाब के मुख्यमंत्री भगवंत मान बार-बार कह रहे कि अब पड़ोसी राज्यों को अतिरिक्त पानी लेना चाहिए।

    हालांकि हरियाणा सरकार की तरफ से भेजे गए खत के जवाब में बीबीएमबी की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया गया है।

    पानी को लेकर अप्रैल-मई में दोनों राज्य भिड़ गए थे। हरियाणा 23 अप्रैल से 8500 क्यूसेक पानी की मांग कर रहा था, जबकि पंजाब सरकार ने यह दावा करते हुए पानी में कटौती कर दी कि हरियाणा अपना कोटा मार्च महीने में ही समाप्त कर चुका है।

    हालांकि बीबीएमबी इस तर्क से सहमत नहीं था, लेकिन उसके पानी छोड़ने के फैसले के क्रियान्वयन को पंजाब सरकार ने जबरन रोक दिया था।

    हरियाणा में जलभराव की आशंका वाले निचले क्षेत्रों से ग्रामीणों को दूसरी जगह भेजा जाएगा। मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने सभी जिला उपायुक्तों को बाढ़ के लिहाज से संवेदनशील क्षेत्रों में राहत शिविरों की संख्या बढ़ाने के निर्देश दिए हैं।

    नदियों के किनारे बसे गांवों, बस्तियों और कालोनियों पर सरकार की विशेष निगाह है। पुलिस, स्वास्थ्य, राजस्व, स्थानीय निकाय और आपदा प्रबंधन प्राधिकरण की टीमें फील्ड में उतरी हुई हैं।